RFOI Award 2025: UP के सफल किसान मनोहर सिंह चौहान को मिला RFOI अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI - First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI Award 2025: केरल के मैथ्यूकुट्टी टॉम को मिला RFOI Second Runner-Up Award, 18.62 करोड़ की सालाना आय से रचा इतिहास! Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 5 October, 2021 12:56 PM IST
Vada Kolam Rice

देश में चावल की बढ़ती मांग को देखते हुए अनुसन्धान केंद्रों में कई नई किस्मों को विकसित किया जा रहा है. जिसको पारम्परिक तरीकों से हटकर उगाया जा सके. नई किस्मों की उपज अक्सर काफी आसान से होती है. मेहनत और पानी दोनों काम मात्रा में लगती है और उपज भी दोगुना होता है. हाल ही में विकसित चावल की किस्म DBW 303 किसानों के बीच काफी प्रचलित हो रही है.

महाराष्ट्र के पालघर जिले के वाडा से ऐसी ही एक खबर आई है. दरअसल, वाडा तहसील में उगाई जाने वाली चावल की किस्म कोलम चावल को जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिला है, जो इस चावल को न केवल एक विशेष पहचान दिलायेगा, बल्कि इसका बड़ा बाजार भी उपलब्ध हो कराएगा.

महाराष्ट्र के वरिष्ठ कृषि अधिकारी के अनुसार, संभागीय कृषि संयुक्त निदेशक अंकुश माने ने बताया कि वाडा कोलम चावल को जीआई टैग मिला है. इस संबंध में 29 सितंबर को मुंबई में बैठक हुई थी.

बता दें, कि वाडा कोलम चावल को जिनी अथवा झिनी के तौर पर भी जाना जाता है. यह एक परंपरागत किस्म है, जिसे पालघर जिले के वाडा तहसील में उगाया जाता है. इस चावल का रंग सफेद होता है. महाराष्ट्र के साथ-साथ अन्य जिलों में इस किस्म को लेकर किसानों के बीच उत्सुकता काफी बढ़ गयी है. उपज में बढ़ोतरी को लेकर किसानों को मुनाफा भी अधिक होगा.

GI  टैग मिलने के बाद अब इस किस्म में किसान अपनी रूचि अधिक दिखा रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि घरेलू बाजार में इस चावल की कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम है और विदेशों में इसकी मांग बहुत अधिक है.

तीसरी पीढ़ी के वाडा कोलम किसान अनील पाटिल कहते हैं कि वाडा तहसील के 180 गांव के करीब 2500 किसान चावल की इस किस्म की खेती करते हैं. प्रदेश के चिन्नोर धान भी GI टैग में 44 शामिल है. आपको बता दें इसकी सुगंध ही इसकी ख़ासियत है. जिससे प्रदेश ही नहीं पूरा विश्व सुगन्धित हो रहा है.

2019  में कृषि बालाघाट अनुसन्धान परिषद हैदराबाद ने GI टैग का वादा किया था. वही महाराष्ट्र ने भी यही दावा किया था. जिसके बाद मध्य प्रदेश के चिन्नोर को GI टैग की अनुमति दे दी गयी. टैग मिलने के बाद राज्य के मुख्य मंत्री खुद इसकी ब्रांडिंग में उतर गए थे. बालाघाट जिले के लगभग 25 गावों में इसका उत्पादन हो रहा है.

English Summary: Maharashtra's Vada Kolam rice gets GI tag
Published on: 05 October 2021, 01:07 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now