Success Story: 1250 एकड़ में जैविक खेती, देसी गायों की डेयरी और 40 करोड़ का टर्नओवर - लेखराम यादव की सफलता की कहानी Success Story: 72 एकड़ में गन्ने की खेती, इंटरक्रॉपिंग मॉडल और 2 करोड़ का कारोबार - सरताज खान की सफलता की कहानी खेती से 100 करोड़ का टर्नओवर: हेलीकॉप्टर के बाद अब हवाई जहाज से कृषि क्रांति लाएंगे डॉ. राजाराम त्रिपाठी Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 5 February, 2021 5:56 PM IST

मध्य प्रदेश को अब बहुत जल्दी ही बासमती चावल उत्पादक राज्य का दर्जा मिल सकता है. दरअसल देश की एपीडा (Agricultural & Processed Food Products Export Development Authority) ने राज्य के शरबती गेहूं और बासमती चावल को जीआई टैग देने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए कृषि मंत्रालय को भेजा है. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में राज्य के बासमती विवाद पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय कार्रवाई कर सकती है और एपीडा जीआई टैग दे सकती है.

राज्य के बासमती पर है विवाद

गौरतलब है कि अगस्त 2020 में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग न देने की गुजारिश की थी. इस बारे में आपत्ति जताते हुए अमरिंदर सिंह ने पीएम मोदी को खत लिखा था कि मध्य प्रदेश की बासमती को अगर जीआई टैग मिलता है, तो इससे पंजाब के किसानों को बहुत नुकसान होगा और पाकिस्तान जैसे देश इससे फायदा उठाएंगें.

पंजाब को है आपत्ति

बता दें कि बासमती के मामले में पंजाब को पहले रही जीआई टैग मिला हुआ है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार लंबे समय से इसके लिए संर्घष कर रही है. इस बारे में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पीएम मोदी को कई बार पत्र लिख चुके हैं. अपने एक पत्र में उन्होंने मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग देने का पक्ष रखते हुए ऐतिहासिक दस्तावेजों के हवाले से कहा था कि 1944 के सिंधिया स्टेट रिकॉर्ड में मध्य प्रदेश के किसानों को बासमती धान के बीज देने की बात कही गई है.

क्या कहते हैं ऐतिहासिक दस्तावेज

ध्यान रहे कि मध्य प्रदेश में भी 25 साल से बासमती धान का उत्पादन हो रहा है, लेकिन इसको किसी तरह की कोई पहचान नहीं मिली है, इसलिए किसानों को कम कीमत में धान बेचना पड़ता है. कई व्यापारी तो यहां के धान को ही पंजाब आदि का बताकर बाकि राज्यों में ऊंचे दाम पर बेचते हैं.

English Summary: Madhya Pradesh may get GI tag for basmati rice farmers will earn more profit
Published on: 05 February 2021, 06:01 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now