Tarbandi Yojana: अब 2 बीघा जमीन वाले किसानों को भी मिलेगा तारबंदी योजना का लाभ, जानें कैसे उठाएं लाभ? Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Subsidy: भेड़-बकरी पालन शुरू करना हुआ आसान! सरकार दे रही 50% सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन! Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक सिंचाई के लिए पाइप खरीदने पर किसानों को ₹15,000 तक की सब्सिडी, जानिए पात्रता और आवेदन प्रक्रिया!
Updated on: 9 September, 2020 2:17 PM IST

देश आज उस आदमी को नमन कर रहा है, जिसके कारण भारत में दूध की नदियां बह रही है. जी हां, आज ही के दिन डॉ. वर्गीज कुरियन की डेथ एनिवर्सिरी है. वर्गीज देश के ही नहीं बल्कि दुनिया के जाने-माने डेयरी प्रोडक्ट ब्रैंड अमूल (AMUL) के फाउंडर थे. उन्हें श्वेत क्रांति के जनक के रूप में भी जाना जाता है. चलिए इस लेख के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे छोटे से किसान का बेटा भारत में श्वेत क्रांति लाने में सफल रहा.

शिक्षा

'मिल्कमैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध हो चुके डॉ. वर्गीज कुरियन का जन्म केरल के एक छोटे से गांव कोझिकोड में 26 नवंबर 1921 में हुआ था. उन्होनें लोयोला कॉलेज से ग्रेजुएशन और गिंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पढ़ाई की. इस दौरान उन्हें सिर्फ अपनी पढ़ाई की चिंता थी. आम युवाओं की तरह वो काम की खोज करते हुए जमशेदपुर स्थित टिस्को चले गए.

स्कॉलरशिप से अमेरिका तक का सफर

वो दौर था जब भारत के युवा पढ़ाई के लिए अमेरिका जैसे बड़े देशों की तरफ आकर्षित हो रहे थे. वर्गीज को भी भारत सरकार से स्कॉलरशिप मिला और वो अमेरिका पढ़ाई करने चले गए. लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था, मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद भी वो वहां नहीं रूके. मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद वापस भारत लौटे.

ये खबर भी पढ़े: कबाड़ के सामान से बना दिया साइकिल आटा चक्की, आधे घंटे में 3 किलो पीस सकते हैं गेहूं

छोटी सी चिंगारी से आई क्रांति

अमेरिका से लौटने के बाद वर्गीज एक छोटे मिल्क पाउडर कारखाने में डेयरी इंजीनियर के तौर पर काम करने लगे. धीरे-धीरे उन्हें ऐहसास हुआ कि कैसे पशुपालकों का शोषण हो रहा है और उन्हें उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा. उसी दौरान दुग्ध उत्पादक संघ का एक निजी डेयरी के खिलाफ संघर्ष तेज हो गया. इन सभी घटनाओं ने उनके युवा मन को प्रभावित किया और आखिरकार उन्होनें नौकरी छड़कर कुछ अपना काम शुरू करने का मन बना लिया.बहुत सोचने के बाद एक छोटे से गैराज में एक डेयरी खोला गया, जिसका नाम उन्होंने अमूल डेयरी रखा. जिस बात को कोई नहीं समझ पा रहा था, वर्गीज वो समझने में कामयाब रहे. उन्होंने गांव के किसानों को दूध के बदले उचित मूल्य देना शुरू किया. बहुत जल्दी ही उनके साथ दो गांवों के किसान जुड़ गए. कुछ ही समय में डेयरी सहाकारित संघ की स्थापना भी कर दी गई.

लालबहादुर शास्त्री का मिला साथ

अमूल की सफलता चारो तरफ तहलका मचा रही थी. गांव-गांव से किसान उनके साथ जुड़ने लगे. अचानक देश में दूध का उत्पादन तेज होने लगा. इस सफलता की गूंज तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री तक भी गई. शास्त्री जी अमूल मॉडल से बहुत प्रभावित हुए. बिना देर किए उन्होनें इसे दूसरी जगहों पर फैलाने का निर्णय भी ले लिया. इसके लिए बाकायदा राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया गया.

1970 में भारत ने रचा इतिहास

1970 में अमूल मॉडल की बदौलत भारत ने इतिहास रच दिया. अंग्रेजी शासन के दौरान जो भारत अकाल के मुंह में जा रहा था, वही भारत 1970 में दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया. यहां दूध की नदियां बहने लगी. अमूल डेयरी की स्थापना करने वाले वर्गीज कुरियन आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कंपनी आज भी बेस्ट प्रोडक्ट क्वलिटी के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है.  

English Summary: know more about white revolution and Dr Verghese Kurien on his death anniversary
Published on: 09 September 2020, 02:21 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now