Haryana electricity subsidy 2025: हरियाणा में बिजली दरों में भले ही बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन सरकार ने किसानों, गरीब परिवारों और कोल्ड स्टोर संचालकों को बड़ी राहत दी है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने पहले हरियाणा बजट 2025 में यह साफ किया कि किसानों को पहले की तरह ही सस्ती बिजली मिलती रहेगी. साथ ही, गरीब उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज और कोल्ड स्टोरेज की दरों में कटौती ने इस बदलाव को संतुलित कर दिया है.
किसानों को 10 पैसे यूनिट में बिजली
बिजली की नई दरों के तहत नलकूप कनेक्शन की यूनिट कीमत ₹6.48 से बढ़ाकर ₹7.35 कर दी गई है. हालांकि, इसका असर किसानों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें पहले की तरह ही ₹0.10 प्रति यूनिट पर बिजली दी जाएगी. बाकी ₹7.25 प्रति यूनिट राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में बिजली निगमों को देगी. इस कदम से किसानों को सालाना ₹6,718 करोड़ की राहत मिलेगी.
कोल्ड स्टोर्स के लिए नई राहत
कोल्ड स्टोर संचालकों के लिए बिजली की दरों में बड़ा बदलाव हुआ है. पहले जहां उन्हें ₹7.50 प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होता था, वहीं अब:
- 20 किलोवाट तक के लोड वाले कोल्ड स्टोर्स को बिजली ₹4.50 प्रति यूनिट में मिलेगी.
- 20 किलोवाट से अधिक लोड वाले को ₹6.50 प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा.
- इससे छोटे और मध्यम स्तर के कोल्ड स्टोर्स को खासा लाभ मिलेगा.
गरीब परिवारों को भी मिली राहत
- बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन सरकार ने गरीब उपभोक्ताओं को राहत दी है.
- अब 300 यूनिट तक मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज हटा दिए गए हैं.
- पहले 0 से 250 यूनिट तक की अलग-अलग स्लैब में फिक्स चार्ज ₹70 से ₹115 प्रति किलोवाट था.
- अब 301 से 500 यूनिट खपत पर ₹50 प्रति किलोवाट
- 500 यूनिट से ऊपर भी ₹50 प्रति किलोवाट ही रहेगा.
- सरकार गरीब परिवारों को ₹2 प्रति यूनिट सब्सिडी भी देगी.
सरकारी विभागों को भी राहत
पब्लिक हेल्थ, सिंचाई विभाग, नगर निगम, नगरपालिका जैसे सरकारी विभागों को पुरानी दरों पर ही बिजली मिलती रहेगी - ₹7.35 प्रति यूनिट. उनके मासिक फिक्स चार्ज में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. मेट्रो व रेलवे को भी HT दरें यथावत दी जाएंगी.
उपभोक्ता वर्ग का बंटवारा
- 78% उपभोक्ता 2 किलोवाट तक के लोड वाले हैं
- 16% के पास 2 से 5 किलोवाट का लोड
- केवल 6% उपभोक्ता 5 किलोवाट से अधिक लोड के हैं
उद्योगों पर असर
जहां घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को राहत दी गई, वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में वृद्धि की गई है. हालांकि, ये दरें अब भी पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम हैं.