RFOI Award 2025: UP के सफल किसान मनोहर सिंह चौहान को मिला RFOI अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI - First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI Award 2025: केरल के मैथ्यूकुट्टी टॉम को मिला RFOI Second Runner-Up Award, 18.62 करोड़ की सालाना आय से रचा इतिहास! Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 9 April, 2023 4:18 PM IST
हाथरस हींग को मिला GI Tag

हींग जिसे हम सब लोग अपने खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. इसे हम भारतीय व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने का सबसे अच्छा मसाला भी कह सकते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हींग को अब सिर्फ भारतीय मसालों (Indian Spices) में ही शामिल नहीं बल्कि विदेश के बाजार में अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

दरअसल, उत्तर प्रदेश के एक जिला एक उत्पाद में शामिल हाथरस की हींग (Asafoetida) को GI Tag दिया गया है. इसके बाद से ही देश-विदेशों के बाजार में भारतीय हींग की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

रोजगार के नए अवसर होंगे पैदा

मिली जानकारी के मुताबिक, विश्व स्तर पर हींग को पहचान मिलने के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि देश के कई युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इसी के साथ लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिलेगा. बता दें कि उत्तर प्रदेश के हाथरस हींग को GI Tag मिलने के बाद भारतीय व्यापारियों को विदेशों में अपना कारोबार फैलाने में बेहद आसानी होगी. देखा जाए तो विदेशों में सिर्फ हींग ही नहीं हाथरस के रंग, गुलाल, गारमेंट्स और नमकीन आदि भी बेहद मशहूर हैं.

क्या है GI Tag ? (What is GI Tag?)

जीआई टैग का पूरा नाम जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (Geographical Indications Tag) है जो किसी खास जगह की पहचान होता है. दरअसल, यह किसी भी प्रोडक्ट को उसकी भौगोलिक पहचान दिलाता है. रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट-1999 के तहत भारतीय संसद में जियोग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ गुड्स लागू किया गया था, जो कि किसी राज्य को किसी खास भौगोलिक परिस्थितियों में पाई जाने वाली वस्तुओं के लिए विशिष्ट वस्तु का कानूनी अधिकार देता है. ऐसे में उस खास क्षेत्र के अलावा उस चीज का उत्पादन नहीं किया जा सकता है. 

ये भी पढ़ें: किश्तों में अल्फांसो आम ख़रीदने के लिए आपके पास ये होना ज़रूरी

जी आई टैग के लिए ऐसे करें आवेदन?

जीआई टैग (GI Tag) के लिए कंट्रोलर जनरल ऑफ पेरेंट्स, डिजाइंस एंड ट्रेड मार्क्स के कार्यालय में आवेदन किया जा सकता है. इसका मुख्य ऑफिस चेन्नई में स्थित है. यह संस्था आवेदन के बाद इस बात की छानबीन करती है कि यह दावा कितना सही है, इसके बाद ही जीआई टैग दिया जाता है.

English Summary: GI Tag: Hathras asafoetida gets GI tag, Indian spice will smell abroad too
Published on: 09 April 2023, 04:22 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now