Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! PM Kusum Yojana से मिलेगी सस्ती बिजली, राज्य सरकार करेंगे प्रति मेगावाट 45 लाख रुपए तक की मदद! जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 27 May, 2020 8:22 PM IST

पपीता सरलता से उगाया जाने वाला, कम समय में स्वादिष्ट फल देने वाला वृक्ष है. पपीता वीटा ए, सी और पपेन में भरपूर होता है. इस फसल में कई बीमारियाँ लगती हैं जिनका समय-समय पर नियंत्रण करना आवश्यक है. इस लेख में पपीते की हानिकारक बीमारियों के लक्षण व उनके रोकथाम की उचित जानकारी दी गई है.

मोजेक- यह एक विषाणु रोग है. रोगग्रस्त पौधों के पत्ते छोटे और मुड़े हुए नज़र आते हैं.

रोकथाम- यह विषाणु रोग अक्सर चेपे द्वारा फैलता है. इसे नष्ट करने के लिए 250 मि ली मैलाथियान 50 ई. सी. को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिडकें.

कालर रोट/ तनागलन- इस रोग से प्रभावित पौधे भूमि की सतेह के पास से अक्सर गलने लग जाते हैं, पत्तियां पीली पड़ जाती और हैं पौधे की बढ़वार रुक जाती है.    

रोकथाम- रोगग्रस्त पौधों को निकाल कर नष्ट कर दें और ध्यान रखें कि पौधे के आस पास पानी न खड़ा हो.

लीफ कर्ल- यह एक जटिल विषाणु रोग है. रोगग्रस्त पौधों के पत्ते छोटे और नीचे की ओर मुड़े हुए नज़र आते हैं. पतियों का शिराओं से पिला हो जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं. इस रोग से प्रभावित पौधों पर फल कम और छोटे आकर के लगते हैं. 

रोकथाम- रोगग्रस्त पौधों को निकाल क्र नष्ट करदें और भिण्डी के खेत के नजदीक इसकी काश्त न करें.

एन्थ्राक्नोज़- यह रोग प्रमुख रूप से फलों को प्रभावित करता है. रोगग्रस्त फलों पर अंदर की तरफ धंसे हुए धब्बे बन जाते हैं, जिसके ऊपर गुलाबी रंग के बिंदु दिखाई देते हैं.

रोकथाम- इस रोग से प्रभावित फलों को तुरंत नष्ट करें तथा 0.2% कैप्टान का छिडकाव 15 दिन के अंतर पर करें.

लेखक : ऐनी खन्ना एवं  कुशल राज

कृषि महाविद्यालय, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

ये खबर भी पढ़े: पशुओं का बीमा करवाने पर किसानों को बीमा किस्त पर सरकार दे रही है 70 प्रतिशत की सब्सिडी

English Summary: Signs and solutions of important diseases of papaya
Published on: 27 May 2020, 08:25 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now