RFOI Award 2025: UP के सफल किसान मनोहर सिंह चौहान को मिला RFOI अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI - First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI Award 2025: केरल के मैथ्यूकुट्टी टॉम को मिला RFOI Second Runner-Up Award, 18.62 करोड़ की सालाना आय से रचा इतिहास! Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 26 August, 2023 12:00 AM IST
कृषि वृद्धि गरीबी और असमानता घटाने में कृषीतर सेक्टरों में वृद्धि की तुलना में चार गुना प्रभावकारी

गरीबी की बहुत बड़ी संख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर रहती है। सेक्टर में समृद्धि बुनियादी ग्रामीण गैर कृषि मजदूरी उत्पादों और सेवाओं के लिए मांग बढ़ाती है। इनमें से अधिकांश माल स्थानीय लोगों द्वारा बनाया जाता है तथा उपयोग किया जाता है। कृषि में उच्च वृद्धि से ग्रामीण गैर फार्म सेक्टर में रोजगार पैदा करने तथा आय बढ़ाने की बड़ी संभावना होती है। 

विश्व विकास रिपोर्ट (WDR 2008) ने तर्क दिया है कि कृषि वृद्धि गरीबी और असमानता घटाने में कृषीतर सेक्टरों में वृद्धि की तुलना में चार गुना प्रभाव कारी है।सस्टएनइगं ग्रोथ एंड शेयरिंग प्रोस्पेरिटी (ESCAP 2008) नाम की एक अन्य यू,एन, रिपोर्ट भी कहती है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में लगातार गरीबी दशाब्दियों से कृषि की उपेक्षा का परिणाम है। सर्वेक्षण कहता है कि क्षेत्र के गरीबों अर्थात लगभग 218 मिलियन में हर तीसरे व्यक्ति को गरीबी से ऊपर उठाया जा सकता है औसत कृषि श्रम उत्पादकता बढ़ाई जा सके। इसलिए कृषि आय में वृद्धि को गरीबी नवीनीकरण में अधिक प्रभाव कारी माना गया है। भारत में गरीबी में गिरावट का दर 1990 के निम्न कृषि वृद्धि अवधि के दौरान की अपेक्षा 1980 की दशाब्दी की अपेक्षाकृत उच्चतर कृषि वृद्धि अवधि के दौरान के दशक अधिक थी। उदाहरण के लिए भारत में ग्रामीण गरीबी 1993 -94 और 2004 -5 के बीच 94% बिंदु तक गिरी, जबकि 1977 - 78 और 1987-88 के बीच यह 14% बिंदु तक गिरी थी।

गरीबी भूख और कुपोषण के मुख्य कारणों में से एक खाद्य सामग्री की अपर्याप्त सुलभता जो ग्रामीण भारत में व्यापक रूप में फैले हुए कुपोषण और भूख का मुख्य कारण है। इन से ग्रस्त कामागर अपने और अपने परिवार के लिए प्राप्त कमाने के लिए शारीरिक रूप में बहुत अक्षम होता है। कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि गरीबी नवीनीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह कार्य कृषि मजदूरी बढ़ाकर और गरीब परिवारों को वहन करने योग्य मूल्य पर खाद और अन्य कृषि वस्तुओं को सुलभ बनाकर किया जा सकता है।

परंतु गरीबी कम करने में कृषि संवृद्धि अधिक प्रभावी हो सकती है (यदि मानव विकास घटकों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा में प्राप्त निवेश किया जाए)। बुनियादी शिक्षा का प्रावधान और कुशलता विकसित तथा उन्नयन करने के लिए औपचारिक और अनौपचारिक परीक्षण फार्म कामगारों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राप्त ज्ञान और कुशलताएं से वे नई प्रौद्योगिकी, बाजार के अवसरों और जोखिमों के अनुक्रिया करने के लिए अधिक सक्षम हो सकते हैं। रबीन्द्रनाथ चौबे ब्यूरो चीफ कृषि जागरण बलिया उत्तरप्रदेश।

English Summary: Role in poverty renewal in agriculture.
Published on: 26 August 2023, 12:18 IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now