RFOI Award 2025: UP के सफल किसान मनोहर सिंह चौहान को मिला RFOI अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI - First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI Award 2025: केरल के मैथ्यूकुट्टी टॉम को मिला RFOI Second Runner-Up Award, 18.62 करोड़ की सालाना आय से रचा इतिहास! Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 28 May, 2019 12:00 AM IST

राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते..! कल जब इस गीत को सुना तो इच्छा हुई कि फिल्म भी देख ली जाए. संडे का दिन था, इंटरनेट की कोई सीमा नहीं थी. सो देख ली ! मां की कसम दुख हुआ. मुझे भी और मां को भी, क्योंकि हम दोनों ने साथ बैठकर देखी. इस फिल्म में एक ही बात निकलकर आई और वो है - सम्मान. सम्मान हर उस चीज़ का जिसका हम सम्मान करते हैं. कहने का मतलब ये है कि सम्मान करने से अच्छा है सम्मान न करें. बस, अपने कर्तव्य का पालन पूरी ईमानदारी से करें. दरअसल इस कंट्री में हो क्या रहा है न, कि हर चीज की पूजा की जा रही है. चाहे वो औरत हो या गंगा, लेकिन फिर उसी चीज़ को धर्म की आड़ में दूषित किया जा रहा है और यह आज नहीं हो रहा. सालों-साल से यही चलता आ रहा है. एक तरफ काली की पूजा और दूसरी तरफ औरत का दामन एक तरफ गंगा को मां का दर्जा और दूसरी तरफ गटर जैसी गंगा. जले-मुर्दे की राख जाएगी तो गंगा में, मुंडन के बाल जाएंगे तो गंगा में, कपड़े-लत्ते धुलेंगे तो गंगा में और हद है कि मल-मूत्र भी जा रहा है तो गंगा में.

तो क्या हम अपनी मां के साथ भी यही व्यवहार करते हैं ? शायद कुछ लोगों को गुस्सा आए. हालांकि शर्म आनी चाहिए. इस देश में हर चीज़ को धर्म के साथ जोड़कर महान बना दिया जाता है और फिर उसी महानता की आड़ में कुकर्म किए जाते हैं. आवाज़ उठाने वाला और प्रश्न करने वाला या तो नास्तिक है या गैर-मज़हबी, जो आपके धर्म को नुकसान पहुंचा रहा है. लाखों, ओ सौरी ! करोड़ो अभी तक गंगा की सफाई के लिए पोते जा चुके हैं लेकिन कुछ नेता डकार गए और कुछ अधिकारी. अच्छा ! एक बात और है - हिसाब भी नहीं मांगना है, नहीं तो आप जान और मान दोनों से जाएंगे.

हमसे अच्छे तो गोरे हैं. वो नदी को न तो मां मानते हैं, न मौसी और न मामी. मानते हैं तो सिर्फ पानी और उसी को पीने योग्य बना कर रखते हैं. हां, धर्म का भी इससे कोई लेना देना नहीं होता.

लंदन की थेम्स नदी और गंगा नदी की तस्वीरों को अगर आप साथ में देखेंगें तो दिल यही करेगा कि थेम्स अपनी हो जाए क्योंकि दूसरी तरफ तो काला नाला बह रहा है. साला कोई पैदा होगा तो गंगा गंदी करेंगे, कोई जीएगा तो गंगा गंदी करेंगे और तो और कोई साल मर जाए तो उसकी नैय्या भी गंगा ही पार लगाएगी. पर अब सवाल ये है कि गंगा को कौन पार लगाएगा ? भगवान तो आएंगे नहीं, क्योंकि अगर उन्हें ही आना होगा तो हमारी ज़रुरत क्या है. हम सब में भी तो उसी का अंश है. लेकिन वो ईश्वरीय अंश अब विषैला दंश बन गया है. जिसके ज़हर से गंगा भी अब गंगा नहीं रह गई है.

गंगा कहे पुकार के

निश्चल जल धार के

गर अभी नहीं संभले

तो कल भी मिलेगा उधार से...

English Summary: how to clean ganga river and its rejuvenation
Published on: 28 May 2019, 04:03 IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now