RFOI Award 2025: UP के सफल किसान मनोहर सिंह चौहान को मिला RFOI अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI - First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI Award 2025: केरल के मैथ्यूकुट्टी टॉम को मिला RFOI Second Runner-Up Award, 18.62 करोड़ की सालाना आय से रचा इतिहास! Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 6 July, 2020 11:25 AM IST

भारत में गर्मियों का आगमन आम के साथ होता है. लेकिन इस बार कोरोना के कहर के कारण आम के किसान खून के आंसू रो रहे हैं. मामूली आमों को तो छोड़िए बाजार में अपनी सत्ता चलाने वाला दशहरी भी इन दिनों कुछ खास कमाल नहीं कर पा रहा है. अंतराष्ट्रीय व्यापार तो वैसे भी बंद है, लेकिन घरेलू बाजार में भी मांग न के बराबर ही है.

बाजार में फेल हुआ दश्हरी

आम निर्यातकों एवं किसानों के पास घाटा सहने के अलावा कोई चारा नहीं है. अब मलीहाबादी दशहरी को ही ले लीजिए, गर्मियों में ये धड़ाधड़ बिकते थे. लेकिन अब 10 से 15 रुपए किलो भी के भाव भी अगर बिक जाए, तो किसान खुशी से मान जा रहे हैं.

लोकल बाजर के सहारे है आम

कोरोना संक्रमण के कारण मंडियों से रौनक तो वैसे भी गायब ही है, ऊपर से लॉकडाउन के कारण आयत-निर्यात में भी दिक्कत हो रही है. ले देकर लोकल लोकल बाजार का ही सहारा है, जहां भाव बहुत कम है.

ये खबर भी पढ़ें: सोयाबीन की फसल से अधिक उपज लेने के लिए ऐसे करें एकीकृत खरपतवार प्रबंधन

बड़े शहरों ने किया किनारा

दशहरी की मांग बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, जयपुर आदि जगहों पर है. हर बार इन शहरों से लगभग 75 प्रतिशत तक का व्यापार होता था, लेकिन इस बार बस नाम मात्र ही ऑर्डर आया है.

खाड़ी देशों ने भी किया निराश

आम के व्यापारियों को मोटा मुनाफा खाड़ी देशों जैसे दुबई आदि से होता है. हर साल लगभग 150 टन से अधिक दश्हरी आम इन देशों में भेजा जाता है. इस बार मुश्किल से 10 टन आम ही बाहर भेजा गया है. गया है. पिछले साल खाड़ी देशों और यूरोप में 120 टन आम भेजा गया था.

सरकार से मदद की आस

लॉकडाउन में किसानों आम व्यापार में किसानों के घाटे को देखते हुए सरकार तरह-तरह के कदम उठा रही है, लेकिन फिलहाल किसानों में निराशा ही है. आम के नुकसान को देखते हुए कृषिक समाज आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है.

English Summary: heavy loss of mango farmers and mango business due to lockdown know more about it
Published on: 06 July 2020, 11:29 AM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now