Success Story: महिला किसान रूबी पारीक की जैविक खेती से बदली तकदीर, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये! किसानों के लिए FREE बिजली कनेक्शन! 8.40 लाख लाभार्थियों को मिलेगा फायदा, ऐसे करें आवेदन Success Story: कृषि विभाग ने दिया ऐसा आइडिया की बदल गई किसान की तकदीर, अब सालाना कमा रहे 14 लाखों रुपये! सचिन जाटन: महिंद्रा NOVO 605 DI के साथ सफलता की कहानी, कड़ी मेहनत और सही चुनाव ने बनाई कामयाबी की राह! भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 26 February, 2025 3:57 PM IST
अपने पारीक ऑर्गेनिक फार्म में राजस्थान की महिला प्रगतिशील किसान रूबी पारीक, फोटो साभार: कृषि जागरण

Success Story of Rajasthan Organic Farmer Ruby Pareek: राजस्थान के दौसा जिले की रहने वाली रूबी पारीक ने जैविक खेती के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. अपने कठिन जीवन संघर्षों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज उनका सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक पहुंच चुका है. उनके पास 10 एकड़ जमीन है, जहां वे जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी प्रशिक्षित कर रही हैं. उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि आज हजारों किसान और छात्र उनसे प्रेरणा ले रहे हैं.

प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक के द्वारा किए गए नवाचारों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया है. ऐसे में आइए आज प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक की सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं-

संघर्ष और प्रेरणा

प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक का बचपन कठिनाइयों से भरा था. उनके पिताजी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, जिसके इलाज में पूरी जमा पूंजी खर्च हो गई और जमीन-जायदाद भी बिक गई. अपने पिता की इस स्थिति ने रूबी के मन को झकझोर कर रख दिया. उन्होंने सोचा कि न जाने कितने लोग इसी तरह पीड़ा सहन कर रहे होंगे. इसी पीड़ा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस बीमारी के मूल कारण को जानने की कोशिश की.

शोध करने पर उन्होंने पाया कि खेतों में अत्यधिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी विषैली हो रही है, जो कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन रही है. इस निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद रूबी पारीक ने जैविक खेती अपनाने का निश्चय किया. उन्होंने तय किया कि वे अपने खेतों में किसी भी प्रकार के रसायनों का प्रयोग नहीं करेंगी और पूरी तरह प्राकृतिक विधियों पर आधारित खेती करेंगी.

जैविक खेती की ओर पहला कदम

रूबी पारीक के कृषि फार्म पर 2006 में कृषि विज्ञान केंद्र दौसा की एक टीम आई और उन्हें जैविक खेती की समग्र जानकारी दी. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने जैविक खेती को अपनाने और इसे समाज में प्रचारित करने का संकल्प लिया.

पारीक ऑर्गेनिक फार्म में लगे पपीते के पेड़ के पास खड़ीं राजस्थान की महिला प्रगतिशील किसान रूबी पारीक, फोटो साभार: कृषि जागरण

अपने पति ओम प्रकाश पारीक की मदद से उन्होंने "किसान क्लब खटवा" नामक संस्था की स्थापना की, जो जैविक खेती के समुचित विकास और प्रचार-प्रसार में कार्य कर रही है. उन्होंने अन्य किसानों को भी इस पद्धति से अवगत कराया और उन्हें रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया.

नवाचार और पर्यावरण संरक्षण

प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक ने अपने फार्म पर जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़ी सभी विधियों को अपनाया. पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लगभग 10,000 पौधे लगाए, जिससे न केवल हरियाली बढ़ी बल्कि पर्यावरण को भी लाभ मिला. 2008 में उन्होंने नाबार्ड की सहायता से 200 मीट्रिक टन उत्पादन वाली राजस्थान की सबसे बड़ी वर्मी कंपोस्ट इकाई स्थापित की.

पारीक ऑर्गेनिक फार्म में नाबार्ड के सहयोग से स्थापित वर्मी कंपोस्ट इकाई में काम करती प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक, फोटो साभार: कृषि जागरण

इस इकाई के माध्यम से गरीब मजदूरों को रोजगार भी मिल रहा है और किसानों को निःशुल्क वर्मी कंपोस्ट, केंचुआ और अजोला फर्न (Mosquito Ferns) भी उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके अलावा, उन्होंने किसानों को जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रेरित किया और स्वयं अपने खेतों में जीवामृत, घनजीवामृत, पंचगव्य, दशपर्णी अर्क जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग करना शुरू किया.

सम्मान और पुरस्कार

रूबी पारीक की मेहनत और उनके कार्यों की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर की गई. 2011-12 में उनके "किसान क्लब खटवा" को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके बाद उन्होंने नवाचार की दिशा में और भी अधिक कार्य करना शुरू किया. 2015-16 में नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से "खटवा किसान जैविक प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड" की स्थापना की, जिससे जैविक उत्पादों को उचित बाजार मिल सके.

उन्होंने जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर भी ध्यान दिया, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके.

अपने फार्म पर छात्र-छात्राओं और महिला किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण देते हुए प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक, फोटो साभार: कृषि जागरण

रूबी पारीक को अब तक पांच राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है:

  1. धरती मित्र राष्ट्रीय अवार्ड (2021) - ऑर्गेनिक इंडिया द्वारा दादा साहब फाल्के अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, मुंबई में प्रदान किया गया.

  2. स्वयं सिद्धा शिखर सम्मान (2022) - कविकुंभ, शिमला द्वारा सम्मानित.

  3. इनोवेटिव फार्मर राष्ट्रीय अवार्ड (2023) - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के हाथों सम्मानित.

  4. जैविक इंडिया राष्ट्रीय अवार्ड (2023) - इंटरनेशनल कंपीटीशन सेंटर फॉर ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर द्वारा दिया गया.

  5. सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय कृषि गौरव पुरस्कार (2024) - महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात द्वारा सम्मानित.

अपने फार्म पर छात्र-छात्राओं और महिला किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण देते हुए प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक, फोटो साभार: कृषि जागरण

सामुदायिक विकास और प्रशिक्षण

प्रगतिशील महिला किसान रूबी पारीक ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किए. उन्होंने कट्स संस्था के माध्यम से कई सरकारी स्कूलों में जैविक पोषण वाटिकाओं की स्थापना की, ताकि बच्चों को स्वस्थ और पोषणयुक्त भोजन मिल सके. इसके अलावा, उन्होंने सामुदायिक पारंपरिक जैविक बीज बैंक की स्थापना की, जिससे किसान महिलाओं को निशुल्क बीज मिल सकें और वे अपने घरों में पोषण वाटिका विकसित कर सकें.

आज तक उन्होंने लगभग 24,000 कृषि महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं और महिला किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया है. उनकी इस पहल से हजारों किसान लाभान्वित हुए हैं और जैविक खेती को अपनाकर अपनी आजीविका को समृद्ध बना रहे हैं. इसके अलावा, उन्होंने कई वर्कशॉप और प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए, जिनमें विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खेती से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी.

English Summary: success story of Rajasthan organic farmer Ruby Pareek annual is Rs 50 lakh from organic farming
Published on: 26 February 2025, 04:56 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now