छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के केशवा गांव के प्रगतिशील किसान मोहन लाल चंद्राकर आज उन किसानों में गिने जाते हैं जिन्होंने खेती को केवल पारंपरिक पेशा नहीं, बल्कि एक सफल एग्री-बिजनेस मॉडल में बदल दिया. MBA और अंग्रेज़ी साहित्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी में वरिष्ठ पद पर काम किया, लेकिन अंततः उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया छोड़कर अपने गांव और खेती की ओर लौटने का फैसला किया. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन इसी निर्णय ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई.
करीब 42 एकड़ जमीन वाले मोहन चंद्राकर ने खेती को नए नजरिए से देखा. उन्होंने महसूस किया कि केवल धान बेचकर किसान कभी बड़ी आर्थिक सफलता हासिल नहीं कर सकता. इसी सोच के साथ उन्होंने जैविक खेती, वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर काम शुरू किया. उन्होंने पर्पल राइस, पर्पल व्हीट और सुगंधित धान जैसी विशेष फसलों की खेती को बढ़ावा दिया. इन फसलों की खासियत यह है कि इनमें एंटीऑक्सीडेंट और औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इन्हें अधिक पसंद करते हैं.
मोहन चंद्राकर ने “तथास्तु एग्रोटेक” नाम से अपनी पैडी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की, जहां वे सालाना लाखों क्विंटल धान की प्रोसेसिंग करते हैं. उन्होंने किसानों को संगठित कर FPO (ऊर्जा कृषि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड) बनाया, जिसमें सैकड़ों किसान जुड़े हुए हैं. इस मॉडल के जरिए किसान सामूहिक उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में कई गुना बढ़ोतरी हुई है.
आज मोहन चंद्राकर केवल खेती नहीं कर रहे, बल्कि एग्री-प्रेन्योरशिप का ऐसा मॉडल तैयार कर चुके हैं जो हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है. उनका सालाना टर्नओवर लगभग 22 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. वे अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं. खासकर अपनी पत्नी स्मिता चंद्राकर, जिन्होंने उनके हर निर्णय में साथ देकर एग्री-एंटरप्रेन्योर बिजनेस को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रस्तुत है प्रगतिशील किसान एवं कृषि उद्यमी मोहन चंद्राकर से विशेष बातचीत के संपादित अंश -
सवाल: सबसे पहले अपने बारे में बताइए?
जवाब: मेरा नाम मोहन चंद्राकर है और मैं महासमुंद, छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूं. मेरा जन्म 1970 में हुआ. मेरे पिता किसान हैं और बचपन से ही मेरा जुड़ाव खेती से रहा. मैंने बीकॉम, एमए इंग्लिश लिटरेचर और MBA की पढ़ाई की है. MBA मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी बिलासपुर से किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब 10 साल तक मल्टीनेशनल कंपनियों में काम किया. मैं स्टील सेक्टर में सीनियर मैनेजर एक्सपोर्ट्स के पद तक पहुंचा.
लेकिन नौकरी के दौरान हमेशा यह महसूस होता था कि मेरा असली जुड़ाव गांव और खेती से है. परिवार की जिम्मेदारी भी थी क्योंकि मैं अकेला बेटा हूं. इसलिए अंततः मैंने नौकरी छोड़ दी और खेती की ओर वापस लौट आया.
सवाल: मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ खेती में आने का फैसला कितना कठिन था?
जवाब: यह फैसला आसान नहीं था. उस समय लोग नौकरी को सबसे सुरक्षित करियर मानते थे. लेकिन मेरा मन खेती में ही लगता था. मेरे पिता खेती संभाल रहे थे और जमीन भी काफी थी. मुझे लगा कि अगर वैज्ञानिक तरीके और बिजनेस सोच के साथ खेती की जाए तो इसमें अपार संभावनाएं हैं.
मैंने 2007-08 के आसपास नौकरी छोड़ी. पहले कुछ बिजनेस किए लेकिन मन नहीं लगा. फिर पूरी तरह खेती में उतर गया. शुरू में लोगों ने कहा कि MBA करके खेती कौन करता है, लेकिन मैंने इसे चुनौती की तरह लिया.
सवाल: खेती की शुरुआत आपने किस तरह की?
जवाब: शुरुआत में हम पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे. ज्यादा रासायनिक खाद और पारंपरिक सिस्टम पर निर्भर थे. उत्पादन सीमित था और लाभ भी कम मिलता था. धीरे-धीरे मैंने खेती को समझना शुरू किया और महसूस किया कि अगर किसान केवल कच्चा उत्पाद बेचता रहेगा तो ज्यादा कमाई नहीं कर पाएगा.
यहीं से मैंने ऑर्गेनिक खेती और वैल्यू एडिशन पर काम शुरू किया. सबसे पहले मैंने पर्पल राइस की खेती शुरू की, जो छत्तीसगढ़ में बहुत कम लोग करते थे. इसके बाद पर्पल व्हीट और सुगंधित धान पर भी काम शुरू किया.
सवाल: पर्पल राइस की खेती का विचार आपको कैसे आया?
जवाब: मुझे हमेशा कुछ नया करने का शौक रहा है. एक दिन किसानों के साथ चर्चा के दौरान मुझे पर्पल राइस के बारे में जानकारी मिली. मेरे एक मित्र के पास इसका बीज था. मैंने उनसे करीब 5 किलो बीज लिया और ट्रायल शुरू किया.
जब इसकी फसल तैयार हुई तो मुझे लगा कि इसमें कुछ खास बात है. फिर मैंने इसका लैब टेस्ट करवाया. रिपोर्ट में पता चला कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बहुत ज्यादा है और यह स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है. खासकर डायबिटीज और इम्यूनिटी के लिए यह काफी लाभकारी पाया गया. इसके बाद मैंने इसे कमर्शियल तरीके से बाजार में उतारने का फैसला किया.
सवाल: सामान्य धान और पर्पल राइस में क्या अंतर होता है?
जवाब: खेती के तरीके में ज्यादा अंतर नहीं होता. उत्पादन प्रक्रिया लगभग समान है. लेकिन चावल के गुण पूरी तरह अलग हैं. सामान्य सफेद चावल केवल ग्लूकोज देता है, जबकि पर्पल राइस में एंटीऑक्सीडेंट और औषधीय गुण होते हैं.
यह शरीर में ग्लूकोज रिलीज को नियंत्रित करता है, इसलिए डायबिटीज मरीजों के लिए लाभकारी माना जाता है. इसका स्वाद सामान्य चावल से थोड़ा अलग होता है क्योंकि यह ब्राउन राइस कैटेगरी में आता है.
सवाल: आपने रासायनिक खेती छोड़ ऑर्गेनिक खेती की ओर क्यों रुख किया?
जवाब: सबसे बड़ा कारण खेती की बढ़ती लागत थी. रासायनिक खेती में खाद और दवाइयों का खर्च लगातार बढ़ रहा है. उत्पादन तो मिलता है, लेकिन मुनाफा बहुत कम बचता है.
दूसरी बात, मैं हमेशा प्रकृति के करीब रहा हूं. मैंने अपनी जमीन पर चंदन, सागवान और 150 से ज्यादा किस्मों के आम के पेड़ लगाए हैं. इसलिए मैं चाहता था कि खेती पर्यावरण के अनुकूल हो. आज मैं करीब 35-40% जमीन पर पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती करता हूं. वहां केवल गोबर खाद और जैविक खाद का उपयोग किया जाता है.
सवाल: ऑर्गेनिक खेती में सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है?
जवाब: सबसे बड़ी चुनौती सही बाजार और सही मूल्य मिलना है. ऑर्गेनिक उत्पादन में मात्रा थोड़ी कम होती है, लेकिन उसकी गुणवत्ता बहुत बेहतर होती है. अगर किसान को सही कीमत न मिले तो वह निराश हो जाता है. इसलिए ऑर्गेनिक खेती के साथ मार्केटिंग और ब्रांडिंग बहुत जरूरी है.
सवाल: आपकी खेती में सबसे सफल प्रयोग कौन सा रहा?
जवाब: मेरा सबसे सफल प्रयोग पर्पल राइस और सुगंधित धान की ऑर्गेनिक खेती रहा. जब मैंने इसे बाजार में उतारा तो लोगों ने इसे काफी पसंद किया. इससे मुझे नाम भी मिला और अच्छा मुनाफा भी हुआ. तब मुझे समझ आया कि खेती को भी कमर्शियल तरीके से किया जा सकता है.
सवाल: आपने प्रोसेसिंग यूनिट कैसे शुरू की?
जवाब: मैंने देखा कि किसान धान बेच देते हैं और असली मुनाफा मिलर्स कमाते हैं. इसलिए मैंने खुद की पैडी प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का फैसला किया. आज मेरी “तथास्तु एग्रोटेक” नाम से प्रोसेसिंग यूनिट है, जहां सालाना लगभग सवा लाख से डेढ़ लाख क्विंटल धान की प्रोसेसिंग होती है. हम धान को प्रोसेस करके चावल, ब्रोकन राइस, ब्रान और अन्य उत्पाद तैयार करते हैं. धान का कोई हिस्सा बेकार नहीं जाता.
सवाल: प्रोसेसिंग से किसानों की आय कितनी बढ़ सकती है?
जवाब: अगर किसान केवल धान बेचता है तो उसकी कमाई सीमित रहती है. लेकिन अगर वही किसान प्रोसेसिंग करके चावल बेचता है तो उसकी आय 200% तक बढ़ सकती है.
धान से केवल चावल ही नहीं निकलता, बल्कि ब्रान, हस्क और अन्य बाय-प्रोडक्ट भी निकलते हैं जिनकी अच्छी कीमत मिलती है.
सवाल: आपके ब्रांडेड उत्पाद कौन-कौन से हैं?
जवाब: हम “तथास्तु” ब्रांड के नाम से कई उत्पाद बेचते हैं. इनमें सुगंधित चावल और पर्पल राइस शामिल हैं.
सवाल: पर्पल राइस की मार्केटिंग कैसे करते हैं?
जवाब: हम इसे सीधे ग्राहकों तक पहुंचाते हैं. सोशल मीडिया, नेटवर्किंग और रेफरेंस के जरिए लोग हमसे संपर्क करते हैं. आज पर्पल राइस का चावल 250 रुपये किलो तक बिकता है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी कीमत 800-900 रुपये किलो तक पहुंच जाती है. धीरे-धीरे इसका बाजार बढ़ रहा है और विदेशों से भी मांग आने लगी है.
सवाल: आपने FPO बनाने का फैसला क्यों लिया?
जवाब: मैंने 2017 में FPO बनाया. मेरा मानना था कि छोटे किसान अकेले बड़े बाजार तक नहीं पहुंच सकते. इसलिए किसानों को संगठित करना जरूरी है. आज हमारे FPO से करीब 300 किसान जुड़े हैं. इनमें से 30-35 किसान विशेष वैरायटी की खेती करते हैं. FPO मॉडल से किसान सामूहिक उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग कर पाते हैं.
सवाल: FPO मॉडल किसानों को कैसे फायदा पहुंचाता है?
जवाब: अगर किसान मिलकर एक ही वैरायटी की खेती करें तो बड़े स्तर पर उत्पादन संभव होता है. इससे बाजार में बड़ी मात्रा में सप्लाई की जा सकती है और अच्छी कीमत मिलती है. इसके अलावा सामूहिक खेती से ऑर्गेनिक मॉडल लागू करना भी आसान हो जाता है.
सवाल: क्या ग्राहक हेल्दी फूड के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं?
जवाब: बिल्कुल. आज लोग दवाइयों से परेशान हो चुके हैं और हेल्दी फूड चाहते हैं. अगर आप शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद देंगे तो ग्राहक ज्यादा कीमत देने को तैयार रहते हैं. लोग आज भी हमसे 250 रुपये किलो पर्पल राइस खरीदते हैं क्योंकि उन्हें उसकी गुणवत्ता पर भरोसा है.
सवाल: किसानों के लिए मार्केटिंग सीखना कितना जरूरी है?
जवाब: बहुत जरूरी है. अगर किसान अपने उत्पाद की खासियत नहीं बताएगा तो लोग उसे क्यों खरीदेंगे? मैं हमेशा कहता हूं - “जो दिखता है वही बिकता है.” किसानों को अपने उत्पाद की ब्रांडिंग और मार्केटिंग सीखनी होगी.
सवाल: खेती में सफल होने के लिए सबसे जरूरी चीज क्या है?
जवाब: तीन चीजें सबसे जरूरी हैं- धैर्य, अपने उत्पाद की जानकारी और बाजार की समझ.
अगर किसान को पता है कि उसका बाजार कहां है और ग्राहक क्या चाहता है, तो वह खेती में सफल जरूर होगा.
सवाल: किसानों को सबसे बड़ी कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए?
जवाब: किसानों को रसायनों पर अत्यधिक निर्भर नहीं होना चाहिए. जितना हो सके प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए.
सवाल: आज आपका सालाना टर्नओवर कितना है?
जवाब: आज खेती, प्रोसेसिंग और एग्री बिजनेस मिलाकर मेरा सालाना टर्नओवर लगभग 22 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. पिछले साल हमारा टर्नओवर करीब 22.5 करोड़ रुपये रहा.