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Updated on: 18 May, 2026 3:39 PM IST
Success Story of Lac Farmer Milan Singh Vishwakarma

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के छोटे से गांव कुरुभाठा से निकलकर लाख की खेती में राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले प्रगतिशील किसान मिलन सिंह विश्वकर्मा आज लाखों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जिस खेती को कभी लोग जंगलों तक सीमित मानते थे और जिसमें भविष्य नहीं देखते थे, उसी लाख की खेती ने मिलन सिंह को करोड़ों के कारोबार तक पहुंचा दिया। वर्ष 2003 में आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और परिवार के विरोध के बीच उन्होंने लाख उत्पादन की शुरुआत की थी। शुरुआत में उनके पास न तो पर्याप्त पैसा था और न ही आधुनिक संसाधन, लेकिन सीखने की जिद और नई तकनीक अपनाने की सोच ने उन्हें बाकी किसानों से अलग बना दिया।

झारखंड के रांची से उनके यहां आए वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण ने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने समझा कि अगर लाख की खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो यह पारंपरिक खेती से कई गुना अधिक लाभ दे सकती है। इसके बाद उन्होंने पेड़ों की कटाई-छंटाई, कीट प्रबंधन, फंगीसाइड स्प्रे और वैज्ञानिक तरीके से “बीहन संचारण” जैसी तकनीकों को अपनाया। धीरे-धीरे उन्होंने किसानों से पेड़ लीज पर लेने शुरू किए और फिर खुद के प्लांटेशन विकसित किए। आज वह खुद के 22 एकड़ और कुछ जमीन लीज पर लेकर लाख की वैज्ञानिक खेती करते हैं, जिसमें हजारों की संख्या में कुसुम, बेर, सेमियालता और अन्य वृक्ष लगे हुए हैं।

मिलन सिंह की सफलता सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। आज उनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़  रुपये से अधिक पहुंच चुका है। वे लाख उत्पादन के साथ-साथ दूसरे किसानों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। उनके फार्म पर देश के अलग-अलग राज्यों से किसान सीखने आते हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई सम्मान प्राप्त कर चुके मिलन सिंह मानते हैं कि तकनीक और प्रशिक्षण के बिना किसान आगे नहीं बढ़ सकता। लाख की खेती ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि उन्हें एक नई पहचान भी दी। पेश है मिलन सिंह विश्वकर्मा से हुई खास बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल: आप लाख की खेती पिछले कितने वर्षों से कर रहे हैं?
जवाब: मैं वर्ष 2003 से लाख की खेती कर रहा हूं। उस समय रांची से वैज्ञानिकों की एक टीम हमारे क्षेत्र में आई थी। उन्होंने किसानों को लाख उत्पादन की आधुनिक तकनीक के बारे में बताया। मैंने उनके प्रशिक्षण में भाग लिया और वहीं से मेरे जीवन में बदलाव शुरू हुआ। शुरुआत में यह सिर्फ सीखने और प्रयोग करने जैसा था, लेकिन धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि अगर इसे वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो लाख की खेती किसानों की आय बदल सकती है। आज इतने वर्षों के अनुभव के बाद मैं खुद भी दूसरे किसानों को प्रशिक्षण देता हूं।

सवाल: आपने पारंपरिक खेती से लाख की खेती की तरफ कदम कैसे बढ़ाया?
जवाब
: हमारे इलाके में पहले जंगलों में प्राकृतिक तरीके से लाख पैदा होती थी। किसान बिना किसी तकनीकी जानकारी के पेड़ों पर लाख लगा देते थे। उत्पादन बहुत कम मिलता था और कीट-बीमारियों के कारण नुकसान ज्यादा होता था। जब वैज्ञानिकों ने हमें समझाया कि अगर पेड़ों की सही कटाई-छंटाई, समय पर बीहन संचारण और दवाइयों का उपयोग किया जाए तो उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है, तब मुझे लगा कि इसमें भविष्य है। उसी समय मैंने तय किया कि मैं इसे पूरी मेहनत और तकनीकी तरीके से करूंगा। यही फैसला मेरे जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

सवाल: शुरुआती दौर में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
जवाब
: शुरुआती समय मेरे लिए बहुत कठिन था। सबसे बड़ी समस्या आर्थिक स्थिति थी। परिवार की हालत इतनी मजबूत नहीं थी कि खेती में ज्यादा निवेश कर सकें। दूसरी समस्या तकनीकी ज्ञान को जमीन पर सही तरीके से लागू करना था। ट्रेनिंग तो हमने ले ली थी, लेकिन शुरुआत में कटाई-छंटाई, कीटनाशक स्प्रे और मौसम प्रबंधन जैसी चीजों को समझने में समय लगा। कई बार तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया और पूरी फसल खराब हो गई। इसके अलावा मजदूरों की व्यवस्था और बाजार तक पहुंच बनाना भी चुनौती था। लेकिन मैंने हर नुकसान से सीख ली और धीरे-धीरे अपने मॉडल को बेहतर बनाया।

सवाल: जब आपने लाख की खेती शुरू की तो परिवार और गांव वालों की क्या प्रतिक्रिया थी?
जवाब
: शुरुआत में परिवार वालों ने ज्यादा समर्थन नहीं किया। उन्हें लगता था कि लाख की खेती कोई स्थायी काम नहीं है और इसमें जोखिम बहुत ज्यादा है। गांव के लोग भी कहते थे कि यह जंगल में होने वाली चीज है, इससे भविष्य नहीं बनेगा। कई लोगों ने कहा कि कोई दूसरा बिजनेस या नौकरी करो। लेकिन मुझे अपने ऊपर विश्वास था। मैंने सोचा कि अगर वैज्ञानिक इस खेती को बढ़ावा दे रहे हैं तो इसमें जरूर संभावना होगी। धीरे-धीरे जब उत्पादन बढ़ा और आमदनी शुरू हुई, तब वही लोग मेरी तारीफ करने लगे। आज गांव के कई किसान इस खेती को अपनाना चाहते हैं।

सवाल: आपकी पढ़ाई कहां तक हुई और आपने खेती को ही क्यों चुना?
जवाब
: मैंने 12वीं तक पढ़ाई की है। उस समय गांवों में शिक्षा की सुविधाएं बहुत सीमित थीं। हमारे आसपास अच्छे कॉलेज नहीं थे और परिवार की आर्थिक स्थिति भी ज्यादा मजबूत नहीं थी। आगे पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया। उस समय मेरे पास दो रास्ते थे - या तो नौकरी की तलाश करूं या खेती में कुछ नया करूं। उसी दौरान लाख की खेती का प्रशिक्षण शुरू हुआ और मैंने उसमें हिस्सा लिया। मुझे लगा कि अगर मैं इसे सही तरीके से सीख लूं तो अपने गांव में रहकर भी अच्छा कर सकता हूं। आज मुझे खुशी है कि मैंने खेती को चुना, क्योंकि इसी ने मुझे पहचान और सम्मान दोनों दिए।

सवाल: पारंपरिक और वैज्ञानिक लाख खेती में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
जवाब
: परंपरागत खेती में किसान सिर्फ पेड़ों पर लाख लगा देते थे और बाद में जो उत्पादन मिलता था उसी पर निर्भर रहते थे। उसमें ना सही कटाई-छंटाई होती थी और ना ही रोग प्रबंधन। इसी वजह से उत्पादन बहुत कम रहता था। पहले कुसुम के एक पेड़ से मुश्किल से 5 से 10 किलो लाख निकलती थी। अब वैज्ञानिक तरीके से काम करने पर उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। हम लोग पहले पेड़ों की कटाई-छंटाई करते हैं ताकि नई शाखाएं निकलें। उसके बाद सही समय पर बीहन संचारण करते हैं और नियमित दवा स्प्रे से फसल को सुरक्षित रखते हैं। इससे लाख की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो जाते हैं।

सवाल: आप वर्तमान में कितने रकबे में लाख की खेती कर रहे हैं?
जवाब
: शुरुआत में मैंने सिर्फ 5 एकड़ क्षेत्र में काम शुरू किया था। धीरे-धीरे जब आमदनी बढ़ी तो मैंने अपने खेतों में पौधारोपण शुरू किया। आज मेरे पास लगभग 22 एकड़ है। इसके अलावा, कुछ पेड़ लीज पर लेकर लाख की खेती करता हूं। इसमें 5000 से ज्यादा कुसुम के पेड़, हजारों बेर के पेड़ और लगभग 40 हजार सेमियालता के पौधे हैं। इसके अलावा मैं दूसरे किसानों से भी पेड़ लीज पर लेकर लाख उत्पादन करता हूं। मैंने अपने खेत में ड्रिप इरिगेशन, फेंसिंग और पौधों की वैज्ञानिक व्यवस्था भी विकसित की है। मेरा लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे और बड़े स्तर पर ले जाना है।

सवाल: किसानों को लाख की खेती शुरू करने से पहले क्या समझना चाहिए?
जवाब
: सबसे पहले किसानों को यह समझना चाहिए कि लाख की खेती पूरी तरह तकनीकी खेती है। अगर बिना जानकारी के इसे शुरू करेंगे तो नुकसान हो सकता है। किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र, भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान या अनुभवी किसानों से प्रशिक्षण जरूर लेना चाहिए। सही पेड़ का चयन, कटाई-छंटाई, बीहन संचारण और दवा प्रबंधन की जानकारी बहुत जरूरी है। साथ ही किसानों को धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि यह खेती सीखने में समय लेती है लेकिन एक बार समझ आने पर बहुत अच्छा लाभ देती है।

सवाल: मौसम और तापमान लाख की खेती को कितना प्रभावित करते हैं?
जवाब
: लाख की खेती में मौसम का बहुत बड़ा रोल होता है। अगर तापमान 17 डिग्री से नीचे चला जाए या 35 डिग्री से ऊपर चला जाए तो लाख के कीड़ों पर बुरा असर पड़ता है। ज्यादा गर्मी में लाख सूखने लगती है और लगातार बारिश होने पर कीड़े बह जाते हैं। ठंड और कोहरे का असर भी फसल पर पड़ता है। इसलिए किसान को मौसम के अनुसार अपनी रणनीति बनानी पड़ती है। यही कारण है कि लाख की खेती में लगातार निगरानी और अनुभव दोनों जरूरी हैं।

सवाल: आपका सालाना टर्नओवर कितना है?
जवाब
: अभी मेरा सालाना टर्नओवर लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। यह सब एक दिन में नहीं हुआ। इसके पीछे कई वर्षों की मेहनत, सीख और लगातार प्रयोग शामिल हैं। शुरुआत में मेरे पास बहुत कम संसाधन थे, लेकिन मैंने धीरे-धीरे अपने मॉडल को विकसित किया। आज लाख की खेती के साथ-साथ प्रशिक्षण और पौधारोपण से भी आय होती है। आने वाले समय में मेरा लक्ष्य इसे और बड़े स्तर पर ले जाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को रोजगार और प्रेरणा मिल सके।

English Summary: success story Milan Singh lac farming 1 crore turnover agri business model
Published on: 18 May 2026, 03:48 PM IST

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