उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के मकसूदापुर गांव के प्रगतिशील युवा किसान विवेक शर्मा ने जैविक खेती को अपनाकर एक नई मिसाल पेश की है. पारंपरिक खेती से जुड़े परिवार में जन्मे विवेक पिछले छह वर्षों से स्वयं खेती की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. शुरुआत में वे भी अन्य किसानों की तरह रासायनिक खेती पर निर्भर थे, लेकिन बढ़ती लागत और मिट्टी की खराब होती सेहत ने उन्हें खेती का तरीका बदलने के लिए प्रेरित किया. पिछले तीन वर्षों से वे जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों की मदद से 100 प्रतिशत जैविक खेती कर रहे हैं.
उनका कहना है कि इन उत्पादों के उपयोग से खेती की लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी आई है, उपज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, फसलों को बाजार में प्रीमियम कीमत मिल रही है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ी है और सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता भी पहले की तुलना में कम हो गई है. आज उनकी खेती आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. ऐसे में आइए विवेक शर्मा की सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं-
पीढ़ी दर पीढ़ी खेती से जुड़ा है परिवार
युवा किसान विवेक शर्मा का परिवार कई पीढ़ियों से खेती करता आ रहा है. बचपन से ही उन्होंने खेतों में काम होते देखा और खेती के महत्व को समझा. हालांकि, पिछले छह वर्षों से वे स्वयं खेती का पूरा संचालन कर रहे हैं और आधुनिक तकनीकों के साथ खेती को अधिक लाभदायक बनाने का प्रयास कर रहे हैं.
वर्तमान में वे लगभग 20 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं. उनका मानना है कि आज के समय में केवल मेहनत से खेती लाभदायक नहीं बन सकती, बल्कि नई तकनीक और वैज्ञानिक सोच को अपनाना भी जरूरी है.
पांच वर्षों से कर रहे हैं जैविक खेती
विवेक शर्मा बताते हैं कि उन्होंने लगभग पांच वर्ष पहले जैविक खेती की शुरुआत की थी. शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उनका विश्वास था कि स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर खेती की नींव होती है. शुरुआत में उन्होंने सीमित क्षेत्र में जैविक खेती की और धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ इसका दायरा बढ़ाते गए. पिछले तीन वर्षों से वे पूरी तरह 100 प्रतिशत जैविक खेती कर रहे हैं.
जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों ने बदली खेती
विवेक शर्मा बताते हैं कि उनकी खेती में बड़ा बदलाव तब आया, जब उन्होंने जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों का उपयोग शुरू किया. वर्तमान में वे जायटॉनिक NPK, जायटॉनिक किट, जायटॉनिक गोधन, जायटॉनिक जिंक, जायटॉनिक पोटाश, जायटॉनिक-एम और जायटॉनिक सुरक्षा जैसे उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं.
उनका कहना है कि इन उत्पादों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ और फसलों को संतुलित पोषण मिलने लगा. धीरे-धीरे खेतों की उत्पादकता भी बढ़ने लगी.
100 प्रतिशत जैविक खेती से मिली नई पहचान
विवेक शर्मा का मानना है कि जैविक खेती केवल रासायनिक उर्वरकों को छोड़ना नहीं है, बल्कि मिट्टी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना भी है. वे बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों से वे अपनी पूरी खेती में केवल जैविक तरीकों का उपयोग कर रहे हैं. इससे खेतों की मिट्टी पहले की तुलना में अधिक उपजाऊ और जीवंत हो गई है.
खेती की लागत में आई 50 प्रतिशत तक की कमी
विवेक शर्मा के अनुसार, जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों का सबसे बड़ा लाभ खेती की लागत में कमी के रूप में मिला है. पहले रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर काफी अधिक खर्च होता था. हर सीजन में लागत बढ़ती जा रही थी. लेकिन जैविक उत्पादों को अपनाने के बाद रासायनिक इनपुट की जरूरत पूरी तरह समाप्त हो गई. परिणामस्वरूप खेती की कुल लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी आई. उनका मानना है कि कम लागत का सीधा फायदा किसान की आय पर पड़ता है.
उपज में हुआ शानदार इजाफा
विवेक शर्मा बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि जैविक खेती में उत्पादन कम हो सकता है, लेकिन अनुभव इसके बिल्कुल विपरीत रहा. वे कहते हैं कि मिट्टी की गुणवत्ता सुधरने के बाद फसलों की बढ़वार बेहतर हुई और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली. उनके अनुसार अच्छी मिट्टी ही अच्छी फसल की सबसे बड़ी ताकत होती है.
प्रीमियम कीमत पर बिकती है उपज
विवेक शर्मा का कहना है कि जैविक तरीके से तैयार होने वाली उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है. इसी कारण बाजार में उनकी उपज को सामान्य फसलों की तुलना में बेहतर कीमत मिलती है. वे बताते हैं कि जब लागत कम हो और बिक्री का मूल्य अधिक मिले, तो किसान का मुनाफा स्वतः बढ़ जाता है.
मिट्टी की उर्वरा शक्ति में आया बड़ा सुधार
विवेक शर्मा बताते हैं कि रासायनिक खेती के कारण मिट्टी धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक शक्ति खोने लगती है. लेकिन जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों के नियमित उपयोग से उनकी मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार बढ़ी है. अब मिट्टी पहले की तुलना में अधिक भुरभुरी, मुलायम और जैविक गतिविधियों से भरपूर हो गई है. वे कहते हैं कि स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ खेती की पहचान है.
अब फसलों को कम पानी की जरूरत
विवेक शर्मा बताते हैं कि जैविक खेती अपनाने के बाद उन्होंने एक और बड़ा बदलाव देखा. अब उनकी फसलों को पहले की तुलना में कम सिंचाई की आवश्यकता होती है. उनका मानना है कि जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे पानी की बचत होती है और सिंचाई का खर्च भी कम हो जाता है. आज के समय में जब जल संकट बढ़ रहा है, ऐसे में यह बदलाव किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
विवेक शर्मा का मानना है कि जैविक खेती केवल किसान के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम उपयोग होने से मिट्टी, पानी और वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके साथ ही खेतों में जैव विविधता भी बेहतर बनी रहती है.
अन्य किसानों को भी कर रहे हैं प्रेरित
विवेक शर्मा की सफलता देखकर आसपास के कई किसान भी जैविक खेती की ओर आकर्षित हुए हैं. वे समय-समय पर अन्य किसानों को अपने खेत पर बुलाकर उन्हें जैविक खेती की जानकारी देते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं. उनका मानना है कि यदि किसान एक-दूसरे से सीखें, तो खेती को और अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है.
किसानों के लिए संदेश
विवेक शर्मा सभी किसानों से अपील करते हैं कि वे केवल तत्काल उत्पादन पर ध्यान न दें, बल्कि अपनी मिट्टी की सेहत को भी प्राथमिकता दें. वे कहते हैं कि यदि किसान धीरे-धीरे वैज्ञानिक तरीके से जैविक खेती अपनाएं और जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों का सही तरीके से उपयोग करें, तो खेती की लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त करने में मदद मिल सकती है.
सफलता की नई पहचान
आज विवेक शर्मा उन युवा किसानों में शामिल हैं जिन्होंने आधुनिक सोच और वैज्ञानिक तकनीक के साथ खेती को नई दिशा दी है. लगभग 20 एकड़ में की जा रही उनकी 100 प्रतिशत जैविक खेती यह साबित करती है कि यदि सही तकनीक, धैर्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए तो खेती को अधिक लाभदायक, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है.