Success Story: बस्तर की मिट्टी से उभरी महिला एग्रीप्रेन्योर अपूर्वा त्रिपाठी, हर्बल उत्पादों से बना रहीं वैश्विक पहचान Success Story: प्राकृतिक खेती से संजीव कुमार की बदली तकदीर, लागत में आई 60% तक कमी, आमदनी में हुई 40% तक वृद्धि कृषि में मशीनों के उपयोग में STIHL की भूमिका: भारतीय खेती के लिए आधुनिक समाधान Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 16 March, 2026 6:33 PM IST
Woman Agripreneur Apurva Tripathi

एक महिला एग्रीप्रेन्योर के रूप में मैं मानती हूं कि कृषि केवल आजीविका नहीं, यह हमारी विरासत है. नवाचार, सततता और सशक्तिकरण के साथ हम खेती को परिवर्तन की शक्ति बना सकते हैं- अपूर्वा त्रिपाठी, संस्थापक - एम.डी. बोटैनिकल्स, एग्रीप्रेन्योर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले से आने वाली अपूर्वा त्रिपाठी आज देश की उभरती हुई महिला एग्रीप्रेन्योर के रूप में पहचान बना चुकी हैं. वे एम.डी. बोटैनिकल्स की संस्थापक तथा मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म्स एंड रिसर्च सेंटर में क्वालिटी कंट्रोल प्रमुख के रूप में कार्य कर रही हैं. उनके नेतृत्व में जैविक औषधीय पौधों पर आधारित एक ऐसा कृषि-उद्यम विकसित हुआ है, जो किसानों को बेहतर आय और बाजार उपलब्ध करा रहा है. इस नेटवर्क से जुड़े हजारों किसान औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से स्थायी आय प्राप्त कर रहे हैं.

अपूर्वा के प्रयासों से उत्पादित हर्बल उत्पाद देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच रहे हैं और इस उद्यम का वार्षिक कारोबार लगातार बढ़ रहा है. विशेष रूप से जनजातीय महिला किसानों को उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़कर उन्होंने ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी है.

बस्तर की धरती से उभरती एक नई पहचान

कोंडागांव की जनजातीय और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध धरती पर पली-बढ़ी अपूर्वा त्रिपाठी ने बचपन से ही प्रकृति और कृषि के साथ गहरा संबंध महसूस किया. बस्तर की मिट्टी में औषधीय पौधों की प्रचुरता और पारंपरिक ज्ञान की समृद्ध विरासत ने उनके विचारों को गहराई से प्रभावित किया.

हालांकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनके सामने महानगरों में आकर्षक करियर के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़े रहने का निर्णय लिया. यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि ग्रामीण विकास और कृषि उद्यमिता के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक था.

उन्होंने यह महसूस किया कि यदि आधुनिक ज्ञान, वैज्ञानिक पद्धतियों और बाजार की समझ को ग्रामीण संसाधनों से जोड़ा जाए तो कृषि केवल पारंपरिक पेशा नहीं बल्कि एक सशक्त उद्यम बन सकती है.

शिक्षा और विधिक दृष्टि: ज्ञान से सशक्त नेतृत्व

अपूर्वा त्रिपाठी ने अपनी उच्च शिक्षा बी.ए. एलएल.बी. और एलएल.एम. (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एवं कॉर्पोरेट लॉ) में प्राप्त की. विधि के क्षेत्र में उनकी विशेष रुचि पारंपरिक ज्ञान, औषधीय पौधों और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी रही.

वर्तमान में वे पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों और पादप प्रजातियों से संबंधित विधिक विषय पर पीएच.डी. कर रही हैं. इस शोध का उद्देश्य पारंपरिक औषधीय ज्ञान को संरक्षित करना और किसानों तथा समुदायों के अधिकारों को मजबूत बनाना है.

उनकी यह विधिक समझ उन्हें एक अलग पहचान देती है, क्योंकि वे केवल उद्यमी नहीं बल्कि नीति और कानून के स्तर पर भी कृषि और हर्बल उद्योग से जुड़े मुद्दों को समझती और प्रस्तुत करती हैं.

विरासत: एक हरित आंदोलन की नींव

अपूर्वा की प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत उनके पिता डॉ. राजाराम त्रिपाठी हैं, जो देश के प्रसिद्ध हर्बल वैज्ञानिक और सफल किसान हैं. वर्ष 1996 में उन्होंने मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म्स एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना की थी.

पिछले लगभग तीन दशकों में इस संस्थान ने औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है. इस पहल के अंतर्गत:

  • 35 लाख से अधिक औषधीय पौधों का रोपण किया गया

  • हजारों किसानों को औषधीय खेती से जोड़ा गया

  • भारत का एक बड़ा प्रमाणित ऑर्गेनिक औषधीय किसान नेटवर्क विकसित हुआ

  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात कर वैश्विक पहचान प्राप्त की

यह विरासत केवल एक कृषि परियोजना नहीं बल्कि प्रकृति, विज्ञान और किसानों के सहयोग से विकसित एक सतत आंदोलन था.

आज अपूर्वा त्रिपाठी इसी विरासत को आधुनिक उद्यमिता और वैश्विक बाजार की दृष्टि से आगे बढ़ा रही हैं.

कॉर्पोरेट अवसर से ग्रामीण विकास की ओर

उच्च शिक्षा के बाद अपूर्वा के सामने लगभग 25 लाख रुपये प्रतिवर्ष के आकर्षक कॉर्पोरेट अवसर उपलब्ध थे. लेकिन उन्होंने इस मार्ग को छोड़कर बस्तर लौटने का निर्णय लिया.

उनका मानना था कि वास्तविक विकास तब संभव है जब गांवों की क्षमता को पहचानकर उन्हें अवसर प्रदान किया जाए. इसलिए उन्होंने अपने परिवार की विरासत और स्थानीय संसाधनों को आधार बनाकर एक नए कृषि-उद्यम मॉडल की शुरुआत की.

यह निर्णय उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और इसी से आगे चलकर एम.डी. बोटैनिकल्स की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ.

एम.डी. बोटैनिकल्स: खेत से उपभोक्ता तक

वर्ष 2022 में स्थापित एम.डी. बोटैनिकल्स का उद्देश्य स्पष्ट था- बस्तर में उगाई जाने वाली प्रमाणित जैविक जड़ी-बूटियों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना.

यह उद्यम पारंपरिक कृषि को आधुनिक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है. आज इस ब्रांड के अंतर्गत कई प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • 60 से अधिक निर्यात गुणवत्ता वाले ऑर्गेनिक उत्पाद

  • 11 प्रीमियम हर्बल टी ब्लेंड्स

  • न्यूट्रास्यूटिकल्स और हर्बल कैप्सूल

  • “She Health” और “He Health” जैसे विशेष स्वास्थ्य उत्पाद

इस ब्रांड की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूर्ण पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी है-

  • कच्चा माल स्वयं के फार्म और किसान नेटवर्क से प्राप्त होता है

  • प्रसंस्करण और पैकेजिंग पूरी तरह अपने ही इकोसिस्टम में की जाती है

  • उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष नियंत्रण रखा जाता है

इस मॉडल ने उपभोक्ताओं में विश्वास पैदा किया है और ब्रांड की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है.

महिला सशक्तिकरण की नई धारा

एम.डी. बोटैनिकल्स केवल एक व्यावसायिक उद्यम नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम भी है.

इस संगठन की संरचना में लगभग 95 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओं के हाथों में है, जबकि 98 प्रतिशत कार्यबल जनजातीय महिलाएं हैं.

इन महिलाओं को केवल श्रमिक के रूप में नहीं बल्कि उद्यम की साझेदार के रूप में विकसित किया गया है. उन्हें निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रशिक्षण और अवसर दिए जाते हैं:

  • औषधीय पौधों की खेती

  • प्रसंस्करण और गुणवत्ता परीक्षण

  • पैकेजिंग और उत्पाद विकास

  • विपणन और ब्रांडिंग

इस पहल के माध्यम से बस्तर की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और उनके आत्मविश्वास तथा सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हो रही है.

किसानों के लिए नए अवसर

अपूर्वा त्रिपाठी के नेतृत्व में विकसित किसान नेटवर्क ने हजारों किसानों को औषधीय पौधों की खेती से जोड़ा है.

इस मॉडल में किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाता बल्कि उन्हें सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनाया जाता है.

किसानों को निम्नलिखित सहायता प्रदान की जाती है:

  • उन्नत पौध सामग्री और तकनीकी मार्गदर्शन

  • जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण

  • फसल की खरीद की सुनिश्चित व्यवस्था

  • बाजार और निर्यात के अवसर

इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती भी एक लाभकारी विकल्प बन गई है.

राष्ट्रीय पहचान और सम्मान

अपूर्वा त्रिपाठी के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली है. उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड 2024, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा प्रदान

  • बेस्ट एग्री एंटरप्रेन्योर अवार्ड, 26 जनवरी 2026, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा सम्मानित

  • एसएचआरडी रिसर्च अवार्ड 2025, झांसी

  • राष्ट्रमाता जिजाबाई भोसले अवार्ड

  • संघर्षशील महिला सम्मान

  • बेस्ट एंटरप्रेन्योर सम्मान

इन सम्मानों ने उन्हें देश में जैविक कृषि और हर्बल उद्यमिता के क्षेत्र में एक अग्रणी युवा नेता के रूप में स्थापित किया है.

नीति और विधिक योगदान

अपूर्वा त्रिपाठी केवल उद्यमिता तक सीमित नहीं हैं बल्कि नीति और विधिक विमर्श में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं.

वे कई राष्ट्रीय संस्थाओं और संगठनों से जुड़ी हुई हैं, जैसे:

  • सदस्य, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)

  • विधिक सलाहकार, ‘ककसाड़’ राष्ट्रीय पत्रिका

  • सलाहकार, SAMPDA NGO एवं CHAMF इंडिया सहित विभिन्न किसान एवं हर्बल संगठनों में

उनकी विधिक विशेषज्ञता पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा, किसानों के अधिकारों की रक्षा और हर्बल उद्योग में न्यायपूर्ण व्यापार व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक रही है.

एक व्यापक दृष्टि: भविष्य की योजना

अपूर्वा त्रिपाठी का लक्ष्य केवल व्यापार विस्तार तक सीमित नहीं है. उनकी दृष्टि इससे कहीं अधिक व्यापक है.

वे चाहती हैं कि:

  • छत्तीसगढ़ को भारत की हर्बल कैपिटल के रूप में स्थापित किया जाए

  • जनजातीय पारंपरिक ज्ञान को विधिक संरक्षण मिले

  • ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त हो

  • भारतीय जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान मिले

उनका मानना है कि कृषि को परंपरा और विज्ञान के बीच सेतु के रूप में विकसित करना ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है.

नई भारतीय कृषि की प्रेरक पहचान

अपूर्वा त्रिपाठी आज उस नई भारतीय कृषि की प्रतिनिधि हैं, जो नवाचार, सततता और सामाजिक समावेशन पर आधारित है.

युवा, शिक्षित और दूरदर्शी नेतृत्व के साथ उन्होंने यह सिद्ध किया है कि यदि सही दृष्टि और प्रतिबद्धता हो तो कृषि क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है.

हर जड़ी-बूटी, हर उत्पाद और हर पहल के माध्यम से वे केवल एक ब्रांड नहीं बना रही हैं बल्कि एक ऐसे आंदोलन को आगे बढ़ा रही हैं जो किसानों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है.

बस्तर की मिट्टी से उठी यह हरित धारा आज देश और दुनिया में भारतीय जैविक परंपरा की नई पहचान बन रही है.

English Summary: Chhattisgarh bastar woman agripreneur Apurva Tripathi herbal business success story
Published on: 16 March 2026, 06:35 PM IST

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