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Updated on: 28 February, 2026 5:28 PM IST
प्रगतिशील किसान अंजू कुमारी, फोटो साभार: कृषि जागरण

बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला के दलसिंहसराय प्रखण्ड की रहने वाली प्रगतिशील किसान अंजू कुमारी आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं. कभी मात्र ₹750 मासिक आय से जीवन की शुरुआत करने वाली अंजू कुमारी आज अपनी मेहनत और नवाचार के बल पर ₹3 लाख से अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं. सीमित संसाधनों, आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि अपने क्षेत्र की अनेक महिलाओं के जीवन में भी नई आशा का संचार किया.

उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सफलता का मार्ग अवश्य निकलता है. ऐसे में आइए प्रगतिशील किसान अंजू कुमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं-

प्रारंभिक जीवन और आर्थिक संघर्ष

अंजू कुमारी का संबंध एक साधारण ग्रामीण परिवार से है. जीवन के शुरुआती वर्षों में उनकी मासिक आय मात्र ₹750 थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन था. आर्थिक अस्थिरता, सीमित संसाधन और सामाजिक दबाव उनके जीवन का हिस्सा थे. वर्ष 2012 में उन्होंने Aga Khan Foundation से जुड़कर सामाजिक कार्यों की शुरुआत की. यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय था, लेकिन शुरुआती तीन वर्षों - 2012 से 2015 तक, उन्हें नियमित वेतन नहीं मिला.

इस दौरान आर्थिक कठिनाइयां और बढ़ीं, परंतु अंजू ने हार नहीं मानी. उन्होंने सामुदायिक कार्यों को जारी रखा और अपने भीतर आत्मविश्वास बनाए रखा. दिसंबर 2016 में उन्होंने सामुदायिक उद्यमी के रूप में कार्य प्रारंभ किया. यही वह मोड़ था, जहां से उनकी जीवन यात्रा ने नई दिशा पकड़ी.

कृषि की ओर कदम और नई पहचान

अंजू कुमारी ने कृषि को केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि बदलाव का माध्यम बनाया. उन्होंने Krishi Vigyan Kendra से पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण प्राप्त किया. इस प्रशिक्षण ने उन्हें वैज्ञानिक खेती की बारीकियों से परिचित कराया.

उन्होंने जैविक खेती को अपनाया और पोषक अनाज जैसे मड़ुआ, कोदो, ज्वार, बाजरा और चीना का उत्पादन शुरू किया. पारंपरिक खेती के साथ-साथ उन्होंने देशी बीज संरक्षण और उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया. बीज उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया को अपनाकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. उनके प्रयासों से क्षेत्र में जैव विविधता को बढ़ावा मिला और किसानों में देशी बीजों के महत्व के प्रति जागरूकता फैली.

कृषि, पशुपालन और बीज उत्पादन से उनकी वार्षिक आय लगभग ₹50,000 तक पहुंची. इसके अतिरिक्त उन्होंने सिलाई और ट्यूशन के माध्यम से लगभग ₹25,000 वार्षिक आय अर्जित की. निरंतर परिश्रम और नवाचार के परिणामस्वरूप आज उनकी कुल वार्षिक आय ₹3 लाख से अधिक हो चुकी है. ₹750 मासिक आय से ₹3 लाख वार्षिक आय तक की यह यात्रा उनके अदम्य साहस और मेहनत का परिणाम है.

महिला सशक्तिकरण की प्रेरक पहल

अंजू कुमारी ने अपने संघर्षों से सीखा कि आर्थिक स्वतंत्रता ही वास्तविक सशक्तिकरण की कुंजी है. उन्होंने लगभग 80 महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों में प्रशिक्षित किया. स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्होंने उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन और लघु उद्यम की जानकारी दी.

उनके प्रयासों से कई महिलाएं कृषि, पशुपालन, सिलाई, मशरूम उत्पादन और अन्य घरेलू उद्योगों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं. महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ. आज वे महिलाएं परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं. अंजू का स्पष्ट संदेश है कि यदि महिलाएं एकजुट होकर कार्य करें, तो वे न केवल अपनी स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं.

शिक्षा, पोषण और जागरूकता की दिशा में प्रयास

अंजू कुमारी ने केवल आर्थिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए. उन्होंने विद्यालयों में जाकर बच्चों को जैव विविधता, फसल विविधता और पोषण वाटिका के महत्व के बारे में जागरूक किया. बच्चों को स्थानीय और पोषक खाद्यान्न के महत्व को समझाया, ताकि वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण विषयों पर बैठकों का आयोजन किया गया. उन्होंने ग्रामीण परिवारों को संतुलित आहार, रसोई बगीचे और स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया. इन प्रयासों से क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ी और कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिली.

उपलब्धियां और सम्मान

अंजू कुमारी के निरंतर प्रयासों और समर्पण को विभिन्न स्तरों पर सराहा गया. वर्ष 2018 में उन्हें मास्टर रिसोर्स पर्सन के रूप में चयनित किया गया. 8 मार्च 2022 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया.

जीविका के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें अवॉर्ड और प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुआ. विभिन्न जिला एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में भी उन्हें सम्मानित किया गया. 15 अगस्त 2025 को उत्कृष्ट कृषि कार्य के लिए उन्हें राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया, जो उनके जीवन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है.

उन्हें कृषि जागरण द्वारा जिला स्तरीय मिलेनियर फार्मर अवॉर्ड से नवाजा गया. राज्य स्तरीय जदयू प्रकोष्ठ से कृषि के क्षेत्र में प्रगतिशील महिला किसान के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ. साथ ही, उन्हें अन्नपूर्णा अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया.

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

अंजू कुमारी के कार्यों का प्रभाव केवल उनके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहा. आर्थिक रूप से जहां उनकी आय ₹750 मासिक से बढ़कर ₹3 लाख वार्षिक से अधिक हो गई, वहीं सामाजिक स्तर पर 80 से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं.

कृषि के क्षेत्र में जैविक खेती और देशी बीज संरक्षण को बढ़ावा मिला. बच्चों में पोषण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि समुदाय में महिला नेतृत्व को नई पहचान मिली. आज अंजू कुमारी केवल एक किसान नहीं, बल्कि परिवर्तन की प्रतीक बन चुकी हैं.

चुनौतियां और दृढ़ संकल्प

उनकी यात्रा आसान नहीं थी. प्रारंभिक आर्थिक अस्थिरता, नियमित वेतन का अभाव, सामाजिक ताने और विरोध, इन सबने उनके मार्ग में बाधाएं उत्पन्न कीं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया.

हर कठिनाई को उन्होंने सीखने का अवसर माना. उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि आत्मविश्वास, मेहनत और सकारात्मक सोच से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है.

English Summary: Anju Kumari progressive farmer success story 3 lakh income from organic farming women empowerment
Published on: 28 February 2026, 05:33 PM IST

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