अगर आप किसी गांव या कस्बे में रहते हैं और कोई बड़ा बिजनेस शुरु करने की सोच रहे हैं, तो ट्रैक्टर डीलरशिप आपके लिए एक अच्छा करोबार साबित हो सकता है. खेती-बाड़ी में जिस तरह से कृषि मशीनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और ट्रैक्टर किसानों की खेती की जिस तरह से रीढ़ बन गया है. यानी की खेती में जुताई, बुवाई से लेकर फसल की ढुलाई तक में ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में ट्रैक्टर की एजेंसी शुरू करके बिक्री के साथ सर्विस और कृषि उपकरणों से भी कमाई की जा सकती है.
ट्रैक्टर एजेंसी के लिए सही लोकेशन सबसे जरुरी
ट्रैक्टर एजेंसी की सफलता में लोकेशन की बड़ी भूमिका होती है. ग्रामीण इलाके में ऐसा स्थान चुनना बेहतर रहता है, जो मुख्य सड़क, हाईवे या किसी प्रमुख ग्रामीण बाजार से जुड़ा हो. शोरूम तक किसानों के साथ-साथ ट्रैक्टर, ट्रॉली और कृषि उपकरण आसानी से पहुंच सकें, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए.
इसके अलावा, जमीन की जरूरत कंपनी की डीलरशिप पॉलिसी और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. एक सामान्य सेटअप में शोरूम, ट्रैक्टर डिस्प्ले एरिया, स्टॉकयार्ड और सर्विस वर्कशॉप के लिए पर्याप्त जगह रखनी पड़ती है.
शोरूम के साथ सर्विस सेंटर क्यों जरुरी?
सिर्फ ट्रैक्टर बेचने से डीलरशिप का कारोबार मजबूत नहीं होता. ग्राहकों को बिक्री के बाद सर्विस की सुविधा देना भी बेहद महत्वपूर्ण है. इसलिए एजेंसी में एक व्यवस्थित वर्कशॉप तैयार करनी पड़ती है और शोरूम में किसानों के बैठने के लिए कस्टमर एरिया, ट्रैक्टर डिस्प्ले सेक्शन और ऑफिस बनाया जा सकता है. वहीं स्टॉकयार्ड में नए ट्रैक्टर और कृषि उपकरण रखे जाते हैं. सर्विस सेंटर में जरूरी मशीनरी, टूल्स, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था करनी होती है.
कितने रुपये से शुरू हो सकता है कारोबार?
ट्रैक्टर डीलरशिप के लिए कुल निवेश की कोई एक तय रकम नहीं होती. यह चुनी गई कंपनी, शहर या गांव, जमीन अपनी है या किराए की है, शोरूम के आकार और शुरुआती स्टॉक पर निर्भर करता है और एक अनुमान के तौर पर ग्रामीण क्षेत्र में मध्यम स्तर की डीलरशिप स्थापित करने के लिए करीब 50 लाख से 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का निवेश लग सकता है. यह सिर्फ एक indicative estimate है, वास्तविक राशि संबंधित कंपनी की शर्तों और प्रोजेक्ट के आकार के अनुसार अलग भी हो सकती है.
डीलरशिप लेने के लिए क्या करना होगा?
डीलरशिप के लिए सबसे पहले उस कंपनी का चयन करें, जिसके ट्रैक्टर आपके इलाके में किसानों के बीच लोकप्रिय हैं. इसके बाद संबंधित कंपनी की आधिकारिक डीलरशिप प्रक्रिया की जानकारी लें. आमतौर पर कंपनी संभावित डीलर की लोकेशन, जमीन, निवेश क्षमता, बाजार की संभावनाओं और बिजनेस प्रोफाइल का मूल्यांकन कर सकती है और आवेदन स्वीकार होने के बाद कंपनी की टीम साइट विजिट या अन्य वेरिफिकेशन प्रक्रिया कर सकती है. सभी शर्तें पूरी होने पर डीलरशिप एग्रीमेंट और आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं.
सिर्फ ट्रैक्टर बिक्री से नहीं होगी कमाई
इस कारोबार में कमाई का जरिया केवल ट्रैक्टर की बिक्री नहीं होता. डीलरशिप के साथ कृषि उपकरण, रोटावेटर, कल्टीवेटर और अन्य implements की बिक्री भी की जा सकती है. इसके अलावा genuine spare parts, इंजन ऑयल और सर्विसिंग से भी कारोबार को अतिरिक्त आय मिल सकती है. वहीं, कई ग्राहक ट्रैक्टर खरीदने के लिए बैंक या फाइनेंस कंपनी से लोन लेते हैं. इसलिए कंपनी की व्यवस्था और नियमों के अनुसार फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस से जुड़ी सेवाएं भी डीलरशिप के कारोबार का हिस्सा बन सकती हैं.
लेखक: रवीना सिंह