Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! PM Kusum Yojana से मिलेगी सस्ती बिजली, राज्य सरकार करेंगे प्रति मेगावाट 45 लाख रुपए तक की मदद! जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 9 April, 2020 2:57 PM IST
Garlic Grading

राजस्थान में किसानों के लिए लहसुन कमाई का एक नया साधन बनता जा रहा है. नकदी मसाला फसलों की ग्रेडिंग व पैंकेजिंग करके यहां के किसान अच्छा पैसा कमा रहे हैं. यहां के लहसुन को तमिलनाडु आदि राज्यों में भेजा जाता है. औसत एक किलों पर 30 रूपए तक का फायदा किसानों को होता है.

लहसुन की ग्रेडिंग व पैंकेजिंग से कमाई (Earning from garlic grading and packaging)

अक्सर रकबा बहुत अच्छा होने के बाद भी किसानों को लहसुन के दाम ठीक तरह से नहीं मिल पाते, लेकिन ग्रेडिंग और पैकिंग के बाद लहुसन को मार्केट में बेचा जा सकता है. इसी का प्रमाण है कि जिले की मंडियों में अगर लहसुन के औसत भाव 5 से 9 हजार रूपए क्विटंल है, तो भी तमिलनाडु जैसे राज्यों में वो 7 से 13 हजार प्रति क्विंटल में बिक जाते हैं.

यहां के किसान निवासी छोटूमाल मालव के अनुसार वो 30 बीघा में ऊटी और 20 बीघा में स्थानीय लहसुन की खेती की करते हैं. लहसुन के बाजार के अध्ययन के बाद उन्होंने इसकी खुद ही ग्रेडिंग करने का फैसला किया. ग्रेडिंग के दौरान वो मोटा, बेस्ट क्वालिटी, मध्यम, कलीदार आदि लहसुनों को अलग-अलग 8-10 किलों में पैकेजिंग करते हैं. इन्हें ट्रकों में लादकर तमिलनाडु ले जाया जाता है. ग्रेडिंग और पैकेजिंग का खर्च निकाल भी दिया जाए तो भी किलो के हिसाब से 10 से 20 रूपये ज्यादा की कमाई हो रही है.

बेहतर क्वालिटी की है मांग (Demand for better quality)

ग्रेडिंग, पैकिंग कर लहसुन को बेचना लाभकारी है. गुणवत्ता वाले लहसुन की अधिक मांग है. ग्रडिंग के बाद 6 हजार से लेकर 12 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक इन्हें आसानी से बेचा जा सकता है. जबकि स्थानीय मंडियों में दाम 4 से 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक ही रहते हैं. 

किसानों के मुताबिक लहसुन की फसल कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे- उसकी किस्म, भूमि की उर्वरा शक्ति और उसकी सही देखरेख. आम तौर पर लंबे दिनों वाली किस्में को उपज के हिसाब से अच्छा माना जाता है. इन किस्मों से करीब प्रति हेक्टेयर से 100 से 200 क्विंटल तक की उपज हो जाती है.  

English Summary: farmers are earning good by garlic grading know more about it
Published on: 09 April 2020, 02:59 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now