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Updated on: 24 June, 2019 3:12 PM IST

दीवानगी, सच्चा प्यार, मोहब्बत और इश्क. ये सब आज किसी गुज़रे ज़माने की बात लगते हैं. आज इन सबकी कीमत घट गयी है. एक ओर सिनेमा को जहां समाज में अश्लीलता और हवस परोसने के लिए लताड़ा जाता है वही सिनेमा कभी-कभी कुछ ऐसी फिल्मों का गवाह बन जाता है जो दिल में घर कर जाती हैं और जिंदगीभर हमारे साथ चलती हैं. 'कबीर सिंह' भी कुछ ऐसी ही फिल्म है. लगभग 3 घंटे की ये फिल्म आपको  जँभाई  लेने का मौका भी नहीं देगी. वैसे है तो ये साउथ फिल्म की कॉपी लेकिन इसको हिंदी में लिखने वाले ने अपने बेहतरीन लेखन का परिचय दिया है.

बेहतरीन डायलॉग, शानदार अभिनय, शिद्दत वाली मोहब्बत और अनूठी दोस्ती. फिल्म की कहानी शुरु होती है शाहिद यानि कबीर सिंह से जो एक मेडीकल स्टूडेंट होने के साथ अपने कॉलेज का टॉपर भी है. कबीर को गुस्सा आता है. इतना गुस्सा आता है कि वो आपे से बाहर हो जाता है. उसके मां-बाप यहां तक की कॉलेज के डीन भी उसे गुस्सा कम करने के लिए मनाते हैं लेकिन वो नहीं मानता. तभी एंट्री होती है प्रीति यानि क्यारा अडवाणी की. फिल्म में आप शुरुआत के इस सीन को ही फिल्म का क्लाईमैक्स मान सकते हैं क्योंकि कबीर को प्रीति से पहली नज़र में ही प्यार हो जाता है और निर्देशक ने इस सीन को फिल्म में काफी समय दिया है. इसके बाद कबीर की दीवानगी बढ़ती जाती है और अब प्रीति भी कबीर से प्यार करती है. कबीर प्रीति के मां बाप से बात करने उसके घर जाता है लेकिन प्रीति के पिता उसे ज़लील करके निकाल देते हैं और प्रीति की शादी दूसरी जगह करवा देते हैं. कबीर का बुरा हाल हो जाता है. वह घर-परिवार, समाज से पूरी तरह कट जाता है. तभी खबर आती है कि कबीर की दादी चल बसी. अब यहां से 'कबीर सिंह' फिल्म का एक नया पहलू निकल कर आता है.

फिल्म के गाने गुनगुनाते हुए लोग सिनेमाहॉल से बाहर निकल रहे हैं. ऐसा कोई गाना नहीं है जिसे तारीफ  न मिली हो. कुल मिलाकर अगर फिल्म को देखा जाए तो ये फिल्म शाहिद कपूर की अबतक की सबसे बेहतरीन फिल्म साबित हो सकती है. फिल्म 3 दिनों में 50 करोड़ पार कर चुकी है और अभी शोज़ हाउसफुल जा रहे हैं. तो आप भी इस फिल्म को अपने नज़दीकी सिनेमाघरों में देखने जाइए और एक बेहतरीन कहानी का आनंद लीजिए.

 

English Summary: kabir singh movie review
Published on: 24 June 2019, 03:24 PM IST

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