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Updated on: 28 February, 2026 11:34 AM IST
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विवि द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में “कृषिरत महिलाओं को कृषि खाद्य प्रणाली में सुदृढ़ करने हेतु एक दिवसीय संवेदीकरण सह जागरूकता कार्यशाला” का आयोजन

ग्रामीण महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने और स्थानीय कृषि-खाद्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विवि द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में “कृषिरत महिलाओं को कृषि खाद्य प्रणाली में सुदृढ़ करने हेतु एक दिवसीय संवेदीकरण सह जागरूकता कार्यशाला” का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की कृषिरत महिला अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत किया गया.

परियोजना के अंतर्गत महिला किसानों के लिए विशेष तकनीकी और उद्यमशीलता सत्र भी संचालित किए गए. कार्यशाला के मुख्य कार्यक्रम में स्थानीय खाद्य-प्रणाली की मजबूती, पोषण संवर्धन, जैविक खेती की तकनीकें तथा समूह-आधारित उद्यमिता पर चर्चा रही. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि डॉ उमाकांत बहेरा ने कहा ने कहा कि महिलाएं कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसलिए उन्हें आगे आना ही होगा.

उन्होंने महिला किसान कृष्ण यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि किस तरह से ₹500 से वह आज 5 करोड़ के अचार के व्यापार खड़ा कर ली हैं. स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ मयंक राय ने कहा कि महिलाओं के सहयोग नहीं नेतृत्व द्वारा ही कृषि-खाद्य प्रणाली का सुदृढ़ीकरण संभव है.

महिला सशक्तिकरण में मिसाल मेघालय राज्य के बारे में उन्होंने बताया कि सारी संपत्ति, मकान, दुकान, जमीन, जायदाद माता-पिता सबसे छोटी बेटी को दे देते हैं. कार्यक्रम समन्वयक कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने सतत किचन गार्डन के ज़रिए ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया. कार्यशाला को संबोधित करते हुए सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ उषा सिंह ने कहा कि कृषिरत महिलाओं को कृषि-खाद्य प्रणाली में जोड़ने के लिए यह कार्यशाला अत्यंत महत्वपूर्ण है.

अधिष्ठाता ने मातृ एवं शिशु पोषक पर भी विशेष जोड़ दिया. परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ संगीता देव ने नए उत्पाद सहित सेकेंडरी एग्रीकल्चर के बारे में विस्तार से बताया. इन्होंने महिलाओं को उद्यमिता की ओर अग्रसर होने के लिए प्रोत्साहित किया. आयोजन सचिव एवं प्रभारी अधिकारी कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र डॉ. सुधानंद प्रसाद लाल ने कार्यशाला का संचालन करते हुए कहा कि अगर भारत में महिलाओं को समान अवसर मिले तो भारतीय अर्थव्यवस्था में 90 लाख करोड रुपए तक कुछ ही वर्षों में जोड़ा जा सकता है. 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2026 को महिला किसान का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है. यह संवेदीकरण सह जागरूकता कार्यशाला इस दिशा में एक कदम है. धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ गीतांजलि चौधरी ने दिया. मौके पर आरके निखिल, जिला परियोजना प्रबंधक पश्चिम चंपारण, जीविका, डॉ सविता कुमार, डॉ नीरज कुमार, डॉ शिप्रा कुमारी, आदि मौजूद थे.

English Summary: women led strengthening of agri food system dr mayank workshop at dr rajendra prasad central agricultural university madhopur
Published on: 28 February 2026, 11:37 AM IST

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