Success Story: जायडेक्स की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी ने बदली खेती की तस्वीर, 30% तक घटी लागत और सुधरी मिट्टी की सेहत! Success Story: जायटॉनिक टेक्नोलॉजी से किसान कैसे बढ़ा रहे हैं उत्पादन और घटा रहे हैं खेती की लागत? एथेनॉल का अधूरा हिसाब: ऊर्जा सुरक्षा की कीमत कौन चुका रहा है? Success Story: जायडेक्स के जैविक उत्पादों से बदली खेती की तस्वीर, लागत हुई 50% कम, उपज में भी हुई शानदार वृद्धि! Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 10 August, 2026 11:16 AM IST
पी. वेंकटरामनन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण और मूल्य नियंत्रण मंत्री, तमिलनाडु सरकार

महिलाओं को कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए उन्हें भूमि पर अधिकार दिलाना जरूरी है. इसके लिए सरकार को महिलाओं के भूमि अधिकारों को मजबूत करने के साथ उन्हें प्रोत्साहन देने के उपायों पर भी विचार करना चाहिए. यह बात तमिलनाडु सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण और मूल्य नियंत्रण मंत्री पी. वेंकटरामनन ने कही.

उन्होंने यह बात चेन्नई में एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Building Gender-Just Food, Land and Water Systems” के समापन सत्र में कही.

मंत्री पी. वेंकटरामनन ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं को भूमि अधिकार मिले.” उन्होंने कहा कि महिलाओं के भूमि अधिकारों को लेकर अभी भी जागरूकता का अभाव है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी बजट सत्र या अगले बजट सत्र में महिलाओं के भूमि अधिकारों को बेहतर बनाने और उन्हें प्रोत्साहन देने के तरीकों पर चर्चा की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि विभिन्न मंचों और क्षेत्रों में लैंगिक समानता पर चर्चा होती है, लेकिन इस सम्मेलन ने कृषि के क्षेत्र में लैंगिक मुद्दों को अधिक गहराई से समझने का अवसर दिया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य की सरकारी नीतियों और योजनाओं में कृषि क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तीकरण को अधिक प्राथमिकता दी जाएगी.

महिलाओं की भूमिका और अधिकारों पर हुई गहन चर्चा

MSSRF का वार्षिक सम्मेलन संस्थान के संस्थापक और भारत की हरित क्रांति के प्रमुख वास्तुकार प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जाता है. इस वर्ष सम्मेलन का विषय “लैंगिक न्यायपूर्ण खाद्य, भूमि और जल व्यवस्था का निर्माण” था.

सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित International Year of the Woman Farmer की पृष्ठभूमि में किया गया. इस पहल के माध्यम से कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, जैव विविधता संरक्षण, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा टिकाऊ ग्रामीण आजीविका में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता दी जा रही है.

MSSRF की चेयरपर्सन डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि दो दिनों की चर्चा में खाद्य, भूमि और जल व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ. इन चर्चाओं के दौरान कई नीतिगत कमियां भी सामने आईं.

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी का महिलाओं पर पड़ने वाला प्रभाव भी सम्मेलन में प्रमुख मुद्दा रहा. उन्होंने सम्मेलन के पहले दिन हुए कट्टैक्कुट्टू प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि तिलगवती और उनकी टीम ने जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक गर्मी और ग्रीनहाउस गैसों जैसे मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया.

महिलाओं के हाथ में आर्थिक संसाधन पहुंचाने पर जोर

यूएन वीमेन, इंडिया कंट्री ऑफिस की डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और वित्तीय संसाधनों तक उनकी पहुंच बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि महिलाओं के हाथ में आर्थिक संसाधन पहुंचना महत्वपूर्ण है. साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए योजनाओं और नीतिगत कार्ययोजनाओं में तेजी लाने की अपील की.

उन्होंने विशेष रूप से गरीब और हाशिए पर रहने वाली उन महिलाओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई, जिनकी आजीविका कृषि पर निर्भर है और जो जलवायु परिवर्तन के असमान प्रभावों का अधिक सामना करती हैं.

महिलाओं और बालिकाओं के लिए विशेष पोषण कार्यक्रम की जरूरत

मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक डॉ. एन. आर. भानुमूर्ति ने कहा कि भारत सार्वजनिक नीति के संकट का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में कई कार्यक्रम लागू किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद देश पोषण संबंधी चुनौती का प्रभावी समाधान नहीं कर पाया है.

उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष पोषण कार्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

सम्मेलन के निष्कर्षों से तैयार होगा नीति पत्र

MSSRF के निदेशक, जैव विविधता, डॉ. ई. डी. इजरायल ओलिवर किंग ने दो दिनों के सम्मेलन में हुए सभी सत्रों और उनसे सामने आए प्रमुख निष्कर्षों का सार प्रस्तुत किया.

उन्होंने कहा कि सम्मेलन से प्राप्त विचारों और सुझावों को एक नीति पत्र (Policy Paper) का स्वरूप दिया जाएगा. यह नीति पत्र खाद्य, भूमि और जल प्रणालियों में लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने तथा कृषि और ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए आगे की नीति-चर्चाओं का आधार बनेगा.

English Summary: women land rights agricultural empowerment MSSRF International Conference
Published on: 10 August 2026, 11:20 AM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now