मध्य प्रदेश के किसान भाई इस समय गेहूं की खरीद में बिजी है और इस टाइम राज्य में गेहूं की खरीदी जोरों शोरों पर चल रही है. राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है. किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है, ताकि सभी किसान अपनी फसल के सही दाम प्राप्त कर सकें.
कितने किसानों ने बेचा गेहूं
अब तक राज्य में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के अनुसार 1,30,655 किसानों से 57,13,640 क्विंटल से अधिक गेहूं की खरीद की जा चुकी है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि इस बार किसान बड़ी संख्या में सरकारी खरीदी केंद्रों का रुख कर रहे हैं और व्यवस्था पर उनका भरोसा बढ़ा है और किसानों को उनकी फसल की सही कीमत.
स्लॉट बुकिंग में क्या बड़ा बदलाव हुआ?
किसानों की बढ़ती संख्या और केंद्रों पर भीड़ को देखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग व्यवस्था में बदलाव किया है. पहले जहां प्रति दिन 1000 क्विंटल की सीमा थी, अब इसे बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दिया गया है. इससे अधिक किसान एक ही दिन में अपनी उपज बेच सकेंगे और लंबी कतारों से राहत मिलेगी. प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां कार्य दिवसों में खरीदी जारी है.
किस दाम पर गेहूं खरीद की जा रही है?
अगर आप भी गेहूं किसान ये तो आपको यह पता होना जरुरी है कि गेहूं खरीद 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर की जा रही है. यानी की इस साल किसानों को गेहूं का बेहतर मूल्य मिल रहा है. केंद्र सरकार ने 2585 रुपये प्रति क्विंटल MSP तय किया है, वहीं राज्य सरकार ने 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़ दिया है, जो उनकी आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है.
उपार्जन केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं
राज्य सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं. यहां छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, बारदाना (जूट और पीपी बैग्स), तौल कांटे, सिलाई मशीन और कंप्यूटर-इंटरनेट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं. साथ ही उपज की सफाई के लिए पंखे और छनने की व्यवस्था भी की गई है.
फसल उपार्जन केंद्रों पर कब तक बेच सकते हैं?
केंद्र सरकार राज्य के किसानों को फसल उपार्जन केंद्रों पर सारी सुविधाएं भी दे रही है और साथ ही गेहूं फसल पर हर किसान को बेहतर दाम मिल सकें. इस क्रम में 30 अप्रैल 2026 तक फसल उपार्जन केंद्रों पर गेहूं बेचने की तारीख को बढ़ा दिया गया है, ताकि समय रहते किसान अपनी फसल उपार्जन केंद्रों पर बेच सकें.
लेखक: रवीना सिंह