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Updated on: 19 January, 2026 12:32 PM IST
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

VB-G RAM G Act 2025: Facts and Myths:राष्ट्रपति द्वारा विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G RAM G विधेयक, 2025 को मंजूरी दिए जाने के साथ ही यह विधेयक अब विधिवत कानून बन चुका है. यह नया कानून, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के जगह पर लाया गया है और ग्रामीण भारत में रोजगार सुरक्षा को एक नई मजबूती प्रदान करता है. सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण जीवन को स्थायी और मजबूत आधार देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. इस कानून के तहत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिन के बजाय 125 दिन के सांविधिक रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी, जिससे रोजगार का अधिकार पहले से कहीं अधिक सशक्त होगा.

हाल के दिनों में MGNREGA और नए VB–G RAM G कानून को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं. इन्हीं को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी किया है. सरकार का स्पष्ट मानना है कि कुछ तत्व ग्रामीण जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं. नीचे ऐसे सभी दावों और उनकी सच्चाई को विस्तार से स्पष्ट किया गया है-

1. दावा: “आपका काम का अधिकार छीना जा रहा है”

सच्चाई: यह पूरी तरह गलत है.

नए कानून में काम की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है. यह कोई भीख या कृपा नहीं है, बल्कि कानूनी अधिकार है.

अगर 15 दिन के अंदर काम नहीं दिया गया, तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा.

पहले कई तकनीकी नियमों के कारण यह भत्ता नहीं मिल पाता था. अब ऐसे सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं.

  • अब अधिकार सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर लागू होगा.

2. दावा: “सरकार चुनिंदा ग्राम पंचायतों को ही काम देगी”

सच्चाई: यह दावा निराधार है.

यह कानून पूरे देश में एक साथ लागू होगा.
हर ग्रामीण ग्राम पंचायत इसके दायरे में आएगी.

“Notified area” सिर्फ एक कानूनी शब्द है, जिसका मतलब होता है कानून कब और कहाँ से लागू होगा. इसका मतलब चुनिंदा गांव नहीं होता.

  • यह कानून पूरे देश में एक साथ लागू होगा.

3. दावा: “मजदूरी मनमानी होगी/घटा दी जाएगी”

सच्चाई: यह पूरी तरह गलत है.

नए कानून में:
• हर साल मजदूरी दर घोषित होगी
• मजदूरी MGNREGA से ज्यादा होगी
• भुगतान 7-14 दिन के भीतर करना होगा
• देर होने पर जुर्माना देना अनिवार्य होगा

पहले सबसे बड़ी समस्या थी - पैसा समय पर नहीं मिलता था.
अब समय पर भुगतान कानूनी अधिकार है.

4. दावा: “फसल के समय काम बंद हो जाएगा”

सच्चाई: यह बात तोड़-मरोड़ कर कही जा रही है.

राज्य सरकारें अधिकतम 60 दिन के लिए काम को रोक सकती हैं, ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो.

  • लेकिन: 125 दिन की गारंटी बनी रहेगी

  • यह केवल समय का समायोजन है, अधिकार खत्म करना नहीं

5. दावा: “ग्राम पंचायतों से अधिकार छिन जाएंगे, ठेकेदार आ जाएंगे”

सच्चाई: यह सरासर झूठ है.

ग्राम पंचायत:
• काम तय करेगी
• योजना बनाएगी
• ग्राम सभा से मंजूरी लेगी
• निगरानी करेगी

कानून साफ कहता है:

  • कोई ठेकेदार नहीं होगा.

  • कम से कम 50% काम पंचायतों से ही होगा.

6. दावा: “अब मेट, रोजगार सहायक नहीं होंगे”

सच्चाई: यह भी गलत है.

नए कानून में प्रशासनिक खर्च 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है.

इसका मतलब:
• मेट रहेंगे
• रोजगार सहायक रहेंगे
• तकनीकी स्टाफ रहेगा
• सोशल ऑडिट टीम रहेगी

7. दावा: “राज्य सरकारों पर बोझ पड़ेगा”

सच्चाई: यह आधी सच्चाई है.

केंद्र सरकार पहले से ज्यादा पैसा दे रही है.

कुल खर्च: लगभग ₹1.5 लाख करोड़
जो पहले से कहीं ज्यादा है.

राज्य का हिस्सा बोझ नहीं, बल्कि निवेश है –
जिससे:
• रोजगार बढ़ता है
• गांव में संपत्ति बनती है
• पलायन घटता है
• स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है

60:40 और 90:10 का वित्तीय ढांचा कोई नया प्रयोग नहीं, बल्कि वर्षों से स्थापित और सफल केंद्र प्रायोजित योजनाओं का मॉडल है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) और जल जीवन मिशन जैसी प्रमुख योजनाएं इसी ढांचे पर आधारित हैं, जिन्होंने सहकारी संघवाद के तहत ठोस और टिकाऊ परिणाम दिए हैं.

8. दावा: “महिलाओं और SC/ST परिवारों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा”

सच्चाई: यह पूरी तरह गलत है.

यह कानून खास तौर पर प्राथमिकता देता है:
• SC/ST परिवारों को
• महिलाओं को
• दिव्यांगों को
• गरीब परिवारों को

इसके तहत:
• ज्यादा काम के दिन
• समय पर मजदूरी
• मजबूत शिकायत प्रणाली
• गांव में टिकाऊ संपत्ति

यह कानून भूख, कर्ज और पलायन कम करता है, बढ़ाता नहीं.

English Summary: VB-G RAM G act 2025 facts vs myths rural employment law guarantee 125 days MGNREGA replacement
Published on: 19 January 2026, 12:41 PM IST

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