देश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ रुपये की लागत से पशुधन बीमा योजना को लागू करने का फैसला किया है. इसके तहत प्रदेश के 2 लाख 28 हजार 350 से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार खुद वहन करेगी, जबकि केवल 15 प्रतिशत प्रीमियम लाभार्थी को देना होगा. यानी की सरकारी हिस्से में 51 प्रतिशत केंद्र सरकार और 34 प्रतिशत राज्य सरकार का योगदान रहेगा.
किन्हें मिलेगा लाभ?
साथ ही बता दे इस योजना का लाभ इन लोगों को मिलेगा जिनमें शामिल है-
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लघु और सीमांत किसान
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भूमिहीन पशुपालक
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डेयरी फार्म संचालक और अन्य पात्र पशुपालकों को मिलेगा.
इसके अलावा, अगर किसी बीमित पशु की महामारी, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है, तो पशुपालक को बीमा राशि दी जाएगी. वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है और काम करने योग्य नहीं रहता, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी.
इलाज का खर्च किस परिस्थिति में मिलेगा?
किसानों और पशुपालकों को इस सरकारी योजना का लाभ तब प्रदान किया जाएगा. अगर पशु की मृत्यु या स्थायी विकलांगता की पुष्टि की स्वीकृति होने के बाद ही योजना की बीमा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी. इसी से साथ सरकार का दावा है कि दावा मंजूर होने के एक महीने के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा, जिससे पशुपालकों को समय पर आर्थिक राहत उन मिल सकें.
कितने जिलों में लागू की जाएगी योजना?
इस सरकारी योजना का फायदा उत्तर प्रदेश के 75 जिलों को मिलेगा. यानी की यूपी सरकार इस योजना को इन सभी जिलों में लागू करेंगी. साथ ही सरकार का यह कहना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पशुओं के नुकसान से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है. इसलिए यह योजना पशुपालकों को आर्थिक जोखिम से बचाने और उनकी आय को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है.
किन बातों का रखना होगा ध्यान?
अगर आप इस सरकारी योजना का लाभ उठाने की सोच रहे हैं तो इन बातों को विशेष रुप से रखें ख्याल-
1. यह पशुधन जीवन बीमा योजना है, स्वास्थ्य बीमा योजना नहीं. यानी पशु के इलाज में आने वाला खर्च इस योजना के तहत कवर नहीं किया जाएगा. आर्थिक सहायता केवल पशु की मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में ही मिलेगी.
2. अगर बीमित पशु की मौत हो जाती है, तो पशुपालक को 24 घंटे के भीतर पशु चिकित्सालय या बीमा कंपनी को सूचना देनी होगी. इसके बाद सरकारी पशु चिकित्सक पोस्टमॉर्टम करेंगे. क्लेम के लिए मृत पशु के साथ ऐसी फोटो जरूरी होगी, जिसमें पशु के कान का बीमा टैग और उसका नंबर स्पष्ट दिखाई दे.
ध्यान रखें, अगर बीमा टैग टूट जाए या खो जाए, तो तुरंत नया टैग लगवाकर रिकॉर्ड अपडेट कराना जरूरी होगा. ऐसा नहीं करने पर क्लेम में परेशानी आ सकती है. इसके अलावा, इस योजना में मुख्य रूप से वयस्क दुधारू पशुओं, जैसे गाय और भैंस, को शामिल किया जाएगा. छोटे या नवजात पशु फिलहाल इस योजना के दायरे में नहीं होंगे.
लेखक: रवीना सिंह