उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में हाल ही में हुई छापेमारी के बाद, यूपीएल ने अपने खरपतवार नाशक 'ट्रिस्केल' (यूपीएल एसएएस द्वारा विपणन) और 'त्रिशुक' (स्वाल द्वारा विपणन) जैसे दिखने वाले anya उत्पादों और भ्रामक प्रतियों के निर्माण एवं बिक्री के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसके बौद्धिक संपदा अधिकारों (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक क्षतिपूर्ति का दावा भी किया जाएगा.
कंपनी का कहना है कि बाज़ार में कुछ ऐसे उत्पाद उपलब्ध हैं जिनकी ब्रांडिंग और संवेष्टन 'त्रिशुक' और 'ट्रिस्केल' से मिलती-जुलती है, लेकिन उनकी कीमत काफी कम है. इससे किसान असली और मिलते-जुलते कथित पेटेंट-उल्लंघनकारी उत्पादों के बीच भ्रमित हो सकते हैं.
किसानों को मिलते-जुलते कृषि उत्पादों से बचाने के लिए यूपीएल ने मई और जून 2026 के दौरान न्यायिक अधिकारियों के साथ मिलकर मुज़फ़्फ़रनगर और सिकंदराबाद (उत्तर प्रदेश), करनाल (हरियाणा) तथा डेरा बस्सी (पंजाब) में की गई इस कार्रवाई के दौरान संदिग्ध विनिर्माण इकाई से बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की गई. साथ ही, अधिकारियों ने वितरण जाल और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत भी इकठ्ठा किए. यूपीएल ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जाएगी.
जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषी व्यक्तियों और कंपनियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जांच में सामने आया कि पेटेंटेड उत्पादों जैसे दिखने वाले anya उत्पाद बनाने वाले ऐसे ब्रांड name और design का इस्तेमाल कर रहे थे, जो देखने में असली उत्पादों से काफी मिलती-जुलती हैं. इसका उद्देश्य किसानों को भ्रमित कर मिलते जुलते उत्पाद बेचना था. ऐसे संदिग्ध ब्रांड्स में त्रिश, त्रिशान, त्रिशूल, ट्रिसम, ट्विंकल, अग्निवीर, त्रिकाल, त्रिदेव, पीसीएल प्रहार, एक्सवायझेड और कामट्रिस जैसे नाम शामिल हैं.
यूपीएल ने अपने पेटेंट प्राप्त फ़ॉर्मूलेशन '2,4-D सोडियम सॉल्ट 44% + मेट्रिब्यूज़िन 35% + पाइराज़ोसल्फ़्यूरॉन-एथिल 1.0% डब्ल्यूडीजी' (जो एक खरपतवार नाशक है) की सुरक्षा के लिए सख्त रुख अपनाया है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. यदि कोई निर्माता, वितरक या खुदरा विक्रेता ऐसे उत्पादों के निर्माण, वितरण या बिक्री में शामिल पाया जाता है, जो यूपीएल के पेटेंट अधिकारों का उल्लंघन करते हैं या करते हुए प्रतीत होते हैं, तो उसके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
कंपनी ने किसानों और चैनल भागीदारों से अपील की है कि वे फसल सुरक्षा उत्पाद खरीदते समय पूरी सतर्कता बरतें. कोई भी उत्पाद खरीदने से पहले उसकी पैकिंग, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, बैच नंबर और अन्य जरूरी विवरण अच्छी तरह जांच लें. यूपीएल ने चेतावनी दी है कि असामान्य रूप से बहुत कम कीमत पर मिलने वाले उत्पाद मिलते जुलते हो सकते हैं. ऐसे उत्पाद न केवल फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि लंबे समय में उपज और गुणवत्ता पर भी बुरा असर डाल सकते हैं.
यूपीएल के प्रवक्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा “यदि कोई व्यक्ति या संस्था यूपीएल के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों का उल्लंघन करते हुए ऐसे उत्पादों का निर्माण, बिक्री, बिक्री के लिए पेशकश या आयात करती पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह जवाबदेही केवल निर्माता तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी आपूर्ति शृंखला पर लागू होती है. ऐसे उत्पादों के निर्माण, वितरण, विपणन या बिक्री में शामिल निर्माता, वितरक, व्यापारी और विक्रेता—सभी को कानून के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.“ यूपीएल ने विशेष रूप से उन सभी कारोबारियों से अपील की है, जो 2,4-D सोडियम सॉल्ट 44% + मेट्रिब्यूज़िन 35% + पाइराज़ोसल्फ़्यूरॉन-एथिल 1.0% डब्ल्यूडीजी उत्पाद का व्यापार कर रहे हैं, जबकि उसका निर्माण यूपीएल लिमिटेड द्वारा नहीं किया गया है या उसका विपणन यूपीएल सस्टेनेबल एग्री सॉल्यूशन लिमिटेड अथवा स्वाल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा नहीं किया जा रहा है, वे तत्काल ऐसी गतिविधियां बंद करें और इसकी सूचना कंपनी को दें. कंपनी की पूर्व अनुमति के बिना ऐसे उत्पादों को बिक्री के लिए प्रस्तुत करना भी बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है, जिसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं.
यूपीएल ने स्पष्ट किया कि किसानों की सुरक्षा और कृषि सहयोग आपूर्ति शृंखला की विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. कंपनी का कहना है कि पेटेंटेड उत्पादों जैसे दिखने वाले उत्पादों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है. इसलिए किसानों से केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उत्पाद खरीदने और उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने की अपील की गई है.