उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर प्रगतिशील किसान सरताज खान ने गन्ने की खेती को नई पहचान दी है. मेहनत, दूरदर्शिता और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से उन्होंने पारंपरिक खेती को एक सफल और लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया है. आज वे गन्ने की उन्नत किस्मों की खेती से सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं. 16 फरवरी 2026 को लखनऊ में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 75वें स्थापना दिवस समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया, जिससे उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली.
पारिवारिक विरासत से आधुनिक सोच तक का सफर
प्रगतिशील किसान सरताज खान के परिवार में गन्ने की खेती की परंपरा लगभग 50 वर्षों से चली आ रही है. उनके पिता एक कुशल और अनुभवी किसान थे, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें खेती की बारीकियां सिखाईं. खेतों में काम करते हुए उन्होंने मिट्टी की पहचान, मौसम की समझ और फसल प्रबंधन के गुण सीखे. पिता की सीख ने उनके भीतर खेती के प्रति सम्मान और समर्पण का भाव जगाया.
समय के साथ प्रगतिशील किसान सरताज खान ने महसूस किया कि बदलते दौर में केवल पारंपरिक तरीकों से अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता. इसलिए उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और नई किस्मों को अपनाने का निर्णय लिया. उन्होंने खेती को व्यवसायिक दृष्टिकोण से देखा और योजनाबद्ध तरीके से अपने फार्म का विस्तार किया.
“शाहीद फार्म्स” की स्थापना और पहचान
सरताज खान के पास कुल 70 एकड़ भूमि है, जिसमें से 50 एकड़ में वे गन्ने की खेती करते हैं. अपने फार्म का नाम उन्होंने “शाहीद फार्म्स” रखा है, जो आज आसपास के क्षेत्रों में गुणवत्ता और उत्पादन के लिए जाना जाता है. उनके खेतों में वैज्ञानिक पद्धति स्पष्ट दिखाई देती है.
वे गन्ने की उन्नत किस्में जैसे- 13235, 0118, 14201 और 16202 की खेती करते हैं. इन किस्मों का चयन उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया है. सही प्रबंधन और उन्नत तकनीकों के कारण उन्हें प्रति एकड़ लगभग 720 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है, जो सामान्य औसत से कहीं अधिक है.
ट्रेंच विधि और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग
गन्ने की बेहतर पैदावार के लिए सरताज खान ट्रेंच विधि का प्रयोग करते हैं. इस पद्धति में खेत में गहरी नालियां बनाकर दो आंख वाले गन्ने के टुकड़ों (बड) की बुवाई की जाती है. इससे पौधों का जमाव बेहतर होता है और जड़ों को पर्याप्त पोषण मिलता है.
इसके साथ ही वे संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देते हैं. आधुनिक उपकरणों और मशीनों का उपयोग कर वे श्रम लागत को कम करते हैं और उत्पादन क्षमता बढ़ाते हैं. उनकी खेती में वैज्ञानिक सोच और व्यवहारिक अनुभव का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है.
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
16 फरवरी 2026 को लखनऊ में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 75वें स्थापना दिवस समारोह में सरताज खान को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर निदेशक डॉ. दिनेश सिंह, पूर्व कुलपति सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय डॉ. के.के. सिंह, डॉ. टी. दामोदर, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. सुधीर शुक्ल एवं अन्य वैज्ञानिकों ने उन्हें स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और प्रमाणपत्र प्रदान किया.
यह सम्मान उनके वर्षों की मेहनत, नवाचार और कृषि के क्षेत्र में योगदान का प्रमाण है. इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है.
किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत
सरताज खान की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह हजारों किसानों के लिए प्रेरणा है. वे समय-समय पर आसपास के किसानों को अपने फार्म पर बुलाकर नई तकनीकों की जानकारी देते हैं. वे सहफसली खेती, उन्नत बीजों के चयन और वैज्ञानिक सलाह के महत्व पर जोर देते हैं.
उनका मानना है कि यदि किसान सही दिशा में मेहनत करें, वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं और बाजार की मांग को समझें, तो खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है. आज सरताज खान एक ऐसे प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने परंपरा और तकनीक के संगम से सफलता की नई मिसाल कायम की है.