उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में गौशालाओं में निराश्रित गोवंश के बेहतर भरण-पोषण के लिए जरुरी कदम उठाया है. अक्सर देखा जाता है, जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है वैसे ही पशुओं में बीमारी से लेकर चारे, पानी की समस्या सामने आती है, जिससे पशुपालकों को बेहद नुकसान होता है. इस क्रम में राज्य सरकार में बड़ा कदम उठाकर सघन निरीक्षण अभियान की शुरुआत करने वाली है, जो 1 मई से 15 मई तक पूरे प्रदेश चलाया जाएगा. साथ ही निरीक्षण अभियान के जरिए न सिर्फ व्यवस्थाओं की हकीकत जानी जाएगी, बल्कि कमियों को तुरंत दूर करने की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी.
गर्मी के लिए क्या पुख्ता इंतजाम है?
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बढ़ती गर्मी और लू के प्रभाव से गोवंश को बचाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएं. उन्होंने कहा कि गौशालाओं में छाया, पानी, हरा चारा, भूसा, चोकर और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.
इसके अलावा, मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
हर स्तर पर निगरानी, 18 मंडलों में नोडल अधिकारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने अभियान को और भी ज्याद प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 18 मंडलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. ये अधिकारी गौशालाओं का औचक निरीक्षण करेंगे और वहां की व्यवस्थाओं का आकलन करेंगे इस प्रकार-
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चारे और पानी की उपलब्धता
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पशुओं के लिए छाया और शेड की व्यवस्था
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चिकित्सा सुविधाएं और दवाओं का स्टॉक
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साफ-सफाई और स्वच्छता
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प्रबंधन में पारदर्शिता और तकनीकी उपयोग
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स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी
‘भूसा बैंक’ को मिलेगा बढ़ावा
यूपी सरकार ने गौशालाओं में चारे की स्थायी व्यवस्था के लिए ‘भूसा बैंक’ की अवधारणा को मजबूत करने का फैसला किया है कि हर गौशाला में कम से कम 10 कुंतल भूसे का सुरक्षित भंडारण होना जरुरी है.
इसके अलावा, खाली पड़े पशु सेवा केंद्र, पशु चिकित्सालय और अस्थायी गोआश्रय स्थलों को भूसा भंडारण के लिए उपयोग में लाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही स्थानीय किसानों को भी भूसा खरीदने पर भी जोर दिया जा रहा है.
स्थानीय किसानों से न्यूनतम दर पर भूसा खरीदने पर भी जोर दिया गया है, ताकि आपूर्ति लगातार बनी रहे और किसानों को भी लाभ मिले.
भूसा संग्रह का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने इस साल 60.99 लाख कुंतल भूसा संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया है. अब तक 20.32 लाख कुंतल भूसा एकत्र किया जा चुका है, जो लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. कुछ जिले इस अभियान में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. हरदोई, महाराजगंज, सहारनपुर, मऊ, देवरिया, गोरखपुर, हमीरपुर, वाराणसी, बदायूं और बांदा जैसे जिले भूसा संग्रह में आगे हैं.
वहीं, सोनभद्र, इटावा, कन्नौज, लखनऊ और कासगंज जिलों को अपनी रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि वे तय समयसीमा में लक्ष्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करें.
लेखक: रवीना सिंह