यूपी सरकार ने किसानों और उनके परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बेहद ही अहम सरकारी योजना की शुरुआत की है “मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना”, जिसका ऐलान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ₹392 करोड़ की 114 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम गांधी मैदान, मधुबन, मऊ 29 मई को किया है और इस दौरान सीएम योगी ने कहां की राज्य के किसान परिवार के सदस्य या बटाईदार के साथ कोई दुर्घटना होती है या वह प्रकृति आपदा का शिकार होते हैं, तो उनको इस सरकारी योजना के अंर्तगत ₹5 लाख तक की तत्काल आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी.
किसानों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा
यूपी सरकार ने इस योजना की शुरुआत इस मुख्य उद्देश्य के साथ की है, ताकि किसानों और उनके परिवारों को आकस्मिक दुर्घटनाओं या प्राकृतिक आपदाओं के समय आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा सकें, क्योंकि अक्सर ऐसे संकट के समय परिवार आर्थिक रूप से टूट जाता है, जिससे उनकी आजीविका पर भी असर पड़ता है. सरकार की यह योजना ऐसे समय में एक मजबूत सहारा बनती है.
कितनी मिलेगी सहायता और कब तक होगा भुगतान?
सरकारी जानकारी के अनुसार, यदि किसी किसान या उसके परिवार के सदस्य की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह गंभीर रूप से घायल होता है, तो प्रभावित परिवार को ₹5 लाख तक की सहायता राशि दी जाती है.
सबसे खास बात यह है कि यह राशि 24 घंटे के भीतर परिवार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिल सके और वे संकट से उबरने की दिशा में कदम बढ़ा सकें.
“मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना” की पात्रता क्या है?
इस सरकारी योजना की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल भूमिधारी किसान ही नहीं, बल्कि बटाईदार और किसान परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल किए गए हैं. इससे यह सुनिश्चित होता है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके और कोई भी पात्र व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे.
कैसे योजना में आवेदन करें?
अगर आप इस सरकारी योजना का लाभ उठाते हैं, तो आपका इसकी आवेदन प्रक्रिया की भी जानकारी होनी चाहिए. इस योजना में अप्लाई करने के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट उत्तर प्रदेश कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के माध्यम से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
इसके अलावा, किसान आवेदन करने के दौरान इन जरुरी दस्तावेज जिनमें- खतौनी, आयु प्रमाण पत्र, और मृत्यु या मेडिकल रिपोर्ट को तैयार रखे तभी आप इस योजना की राशि करा लाभ उठा सकेंगे.
लेखक: रवीना सिंह