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Updated on: 2 February, 2026 6:02 PM IST
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर, में आयोजित संस्थान समीक्षा बैठक की झलक

शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री, ने कहा कि इंटीग्रेटेड खेती को केवल अनाज उत्पादन तक सीमित रखना अब समयोचित नहीं है, बल्कि इसमें फल, सब्जी एवं पशुपालन—विशेषकर ऊँट, भेड़ और बकरी पालन को भी सम्मिलित करना आज की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि समन्वित कृषि प्रणाली अपनाने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी.

केन्द्रीय कृषि मंत्री आज भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर, में आयोजित संस्थान समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आत्मनिर्भर थार के निर्माण हेतु एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें बीकानेर स्थित सभी अनुसंधान संस्थानों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी.

चौहान ने कहा कि शीघ्र ही बीकानेर स्थित भाकृअनुप के विभिन्न संस्थानों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे तथा उन्हें समयबद्ध रूप से प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने विशिष्ट फसलों, उन्नत बीजों, औषधीय खेती, विशेष रूप से खेजड़ी के महत्व, तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर बल दिया. साथ ही उन्होंने इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया.

उन्होंने ऊँटनी के दूध को अत्यंत गुणकारी बताते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी है तथा इसके सेवन से मधुमेह जैसी बीमारियों के प्रबंधन में सहायता मिल सकती है. उन्होंने केन्द्र द्वारा संचालित ‘आई लव  कैमल मिल्क’ अभियान की सराहना करते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया.

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, नई दिल्ली

संबोधन से पूर्व  चौहान ने राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र की विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों जिसमें, भाकृअनुप संस्थानों की ‘उन्नत कृषि एवं पशुधन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी’, ऊँट फार्म में नवजात (टोरडियों) की देखभाल एवं स्वास्थ्य संबंधी कार्यों, तथा उष्ट्र डेयरी में स्वच्छ उत्पादन, प्रसंस्करण एवं संकलन से जुड़ी वैज्ञानिक गतिविधियों एवं उष्‍ट्र संग्रहालय का अवलोकन किया और उनकी सराहना की. उन्होंने स्मरणीय  उद्यान में पौधा रोपण तथा ऊँट-गाड़ी की सवारी भी की.

इस अवसर पर डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, नई दिल्ली, ने कहा कि यदि बीकानेर में स्थित भाकृअनुप के सातों संस्थान एक टीम के रूप में कार्य करें, तो थार क्षेत्र में स्थायी विकास एवं खुशहाली सुनिश्चित हो सकती है. डॉ. जाट ने ‘रेगिस्तान के जहाज’ कहे जाने वाले ऊँट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलते परिवेश में ऊँटों की उपयोगिता को और अधिक प्रासंगिक सिद्ध करने की आवश्यकता है. ऊँट को बहुआयामी पशु के रूप में स्थापित करने तथा उसके संरक्षण, आजीविका और आर्थिक उपयोग से जुड़े पहलुओं पर प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए वैज्ञानिकों को अनुसंधान में नवाचार अपनाने को प्रोत्साहित किया.

कार्यक्रम में अर्जुन राम मेघवाल, केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री तथा अजय टम्टा, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री, ने भी सहभागिता निभाई.

कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनिल कुमार पूनिया, निदेशक, एनआरसीसी, बीकानेर, ने मंत्री महोदय को केन्द्र में संचालित अनुसंधान गतिविधियों तथा ऊँटनी के दूध के प्रति सामाजिक जागरूकता एवं इसे प्रोत्साहित करने हेतु चलाए जा रहे ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान की जानकारी दी. ऊँट प्रजाति से जुड़े अनुसंधान कार्यों को और अधिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने हेतु आश्‍वस्‍त किया .

इस अवसर पर डॉ. प्रवीण सिंह अढ़ायच, निजी सचिव, कृषि मंत्री; डॉ. सुमंत व्यास, राजुवास, बीकानेर; डॉ. राजेन्द्र बाबू दुबे, कुलगुरु, एसकेआरएयू, बीकानेर; डॉ. टी.के. भट्टाचार्य, निदेशक, एनआरसीई, हिसार; डॉ. एस.पी.एस. तंवर, निदेशक, काजरी, जोधपुर; डॉ. जगदीश राणे, निदेशक, सीआईएएच, बीकानेर सहित बीकानेर स्थित आईसीएआर के सभी संस्थानों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिकगण, पशुपालक, किसान एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.

English Summary: Union Minister Shivraj Singh Chouhan emphasized promoting I Love Camel Milk campaign at review meeting of ICAR-NRCC Bikaner
Published on: 02 February 2026, 06:10 PM IST

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