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Updated on: 17 February, 2026 11:11 PM IST
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
  • भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर अटकलों का खंडन, किसानों के हित सर्वोपरि- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

  • “भारत नहीं झुकेगा, किसानों पर आंच नहीं आने देंगे”- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों पर सरकार अडिग- शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चल रही विभिन्न अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए आज राजस्थान के जयपुर से स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं किया जाएगा.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे किसानों के बीच भारत के कृषि मंत्री के रूप में "पूरी जिम्मेदारी" से कह रहे हैं कि किसी भी समझौते में भारतीय किसानों के हितों से समझौता नहीं किया गया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गेहूं, चावल, मक्का जैसी संवेदनशील फसलों पर दरवाज़ा बंद है, चावल उत्पादन में भारत आज दुनिया में नंबर-1 है और चीन से आगे निकल चुका है. ऐसे में किसानों को नुकसान पहुँचाने वाला कोई आयात स्वीकार ही नहीं किया गया.

भारतीय किसानों के हित सुरक्षित

सेब के मुद्दे पर उठाए जा रहे सवालों पर कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत को हर साल लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब की जरूरत होती है जो अभी तुर्की और ईरान जैसे देशों से भी आता है. उन्होंने कहा कि यदि इसमें से मात्र 1 लाख मीट्रिक टन सेब अमेरिका से लिया जाए और उस पर आयात मूल्य ₹80 प्रति किलो के ऊपर ₹25 शुल्क जोड़कर कोटा तय किया जाए तो यह भारत के सेब उत्पादकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि “तुर्की से लेने के बजाय कहीं और से लेने का मामूली बदलाव मात्र है.

सोयाबीन और मक्का पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पर कोई रियायत नहीं दी गई है और यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस शासन में 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात होता था जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे.

शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ निर्देश दिए हैं कि दूध, घी, दही, पनीर सहित कोई भी डेयरी उत्पाद भारत की धरती पर किसी भी कीमत पर आयात नहीं होने दिया जाएगा, ताकि देश के दूध उत्पादक किसानों को नुकसान न हो.

कपास के मामले में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि घरेलू उत्पादन के मुकाबले उद्योगों की जरूरत अधिक होने से उद्योगों को कुछ कपास आयात करना पड़ता है जिससे कपड़ा उद्योग चल सके, रोजगार बढ़े और निर्यात बढ़े. उन्होंने बताया कि भारत का टेक्सटाइल निर्यात विभिन्न उत्पादों को मिलाकर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का है जिसे 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की क्षमता है और इसके फलस्वरूप अंततः लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही मिलेगा.

उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि जीरा, मेथी, इसबगोल जैसी राजस्थान में पैदा होने वाली मसाला फसलों सहित भारतीय मसालों पर आयात की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि इन मसालों का निर्यात 0 फीसदी ड्यूटी पर अमेरिका जैसे बाजारों में बढ़ाने की व्यवस्था की गई है जिससे सीधे भारतीय किसानों को फायदा होगा.

केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के सामने दो वादे किए थे– “भारत को कभी झुकने नहीं दूंगा” और “किसानों के हितों को सर्वोपरि रखूंगा, उन पर आंच नहीं आने दूंगा”– और दोनों पर हमारी सरकार मजबूती से खड़ी है. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया गया, वैसे ही कृषि और किसानों के हितों पर भी कोई समझौता नहीं होगा और हर वैश्विक समझौता “किसान-प्रथम दृष्टिकोण” से ही देखा जाएगा.

English Summary: Union Agriculture Minister said door is closed on wheat rice maize and dairy no imports at any cost
Published on: 17 February 2026, 11:17 PM IST

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