आज देश-दुनियाँ पर्यावरणीय संकट से जूझ रही हैं. इस संकट का प्रमुख कारण वनों का दोहन है. वन जैव-विविधता के संरक्षण का प्रमुख साधन हैं. वनों की अंधाधुंध कटाई से जलवायु परिवर्तन जैसे विभिन्न खतरे धरती पर पैदा हो रहे हैं. दुनियाँ की सबसे व्यापक आबादी वाले भारत में लाखों वन काटे जा रहे हैं. परिणामस्वरूप, हरे-भरे जंगल नष्ट हो रहे हैं. सार्वजनिक जनजीवन प्रभावित हो रहा है. ऐसे में देश में कई व्यक्तित्व वनों और पर्यावरण को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. जिन्होंने अपना जीवन पर्यावरण के निए न्योछावर कर दिया है.
भारत देश में श्री विष्णु लांबा एक ऐसा ही प्रमुख नाम है जो वनों का पर्याय बन गया है. ‘ट्रीमैन ऑफ इंडिया’ के रूप में देश-दुनियाँ में चर्चित श्री विष्णु लांबा ने अपनी जिंदगी के 31 वर्ष पेड़ों को लगाने और उनका संवर्धन करने में लगा दिए हैं. अब तक विष्णु लाम्बा 1.5 करोड़ से अधिक पौधे लगाकर संरक्षित कर चुके हैं. भारत की आज़ादी के 100 वें वर्ष यानी 2047 तक विष्णु लांबा का लक्ष्य 5 करोड़ पौधे लगाकर उनका संवर्धन करना है. देश के 100 चिन्हित गांवों को पर्यावरणीय दृष्टि से आदर्श ग्राम बनाने के लिए यह 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
पारिवारिक पृष्ठभूमि और बचपन
विष्णु लाम्बा का जन्म भारत के राजस्थान में टोंक जिले के लाम्बा गाँव में हुआ. दुनियाँ के लिए अपरिचित इस लाम्बा गांव ने ट्रीमेंन के प्रयासों से आज दुनिया में एक अनोखी पहचान बनायी है. विष्णु लाम्बा ने महज 5 वर्ष की आयु में अपनी मां के साथ पहला पेड़ लगाया. तब से पर्यावरण और विष्णु एक दूसरे के पूरक हो गए. विष्णु का एक नाम पौधा चोर भी पड़ा, क्योंकि पौधे अधिक लग सके इसलिए वे पौधे चुराते थे. एक बार माँ नें मांगलियावास से तीन पत्ते कल्प वृक्ष के लाकर दिए और कहा एक भगवान् के लिए मंदिर देकर आओ. दूसरा अनाज के कोठे में रख दो, जिससे कभी घर में अनाज ख़त्म नहीं होगा. वहीं, तीसरा पत्ता अपनी किताब में रख ले, ताकि तुझे अकल आए. यह सुंदर घटना विष्णु के जीवन में घर कर गयी. इस घटना की प्रेरणा ने विष्णु के हाथों कल्पतरु संस्थान की नींव रखी. ऐसे में धरती पर पेड़ों के लिए शुरू हो गई श्री कल्पतरु संस्थान की कहानी.
पर्यावरणीय और सामाजिक कार्य
कल्पतरु संस्थान के अध्यक्ष विष्णु लाम्बा ख़ुद को अतिसाधारण सा व्यक्ति मानकर कार्य करते है. ऐसें में हर कोई उनका कायल है. विष्णु लांबा की विनम्रता, सहृदयता और प्रेम हर किसी को भाता है. वे अनेक पर्यावरणीय विरोधी योजनाएं रुकवा चुके हैं. इससे वे लाखों पेड़ बचा चुके हैं. वे लाखों पेड़ निशुल्क वितरण भी कर चुके हैं. विष्णु ने 5 लाख 25 हजार तुलसी के पौधे तैयार कर निशुल्क वितरण करने का विश्व कीर्तिमान भी रचा है. वह घायल पशु पक्षियों के लिए वर्ष भर रेस्क्यू ऑपरेशन भी चलाते हैं. विष्णु सालों से एक पौधा नियमित रूप से लगाते आ रहे है. किसी दिन किसी कारण से पौधा नहीं लगा पाते है तो अगले दिन दुगने पौधे लगाते है.
गर्मियों के महीनों में बेजुबान पक्षियों के लिए ‘’परिंदों के लिए परिंडा’’ अभियान चलाकर लाखों परिंडे, बर्ड हाउस, पानी की टंकियां इत्यादि लगाते है और वितरण करते है. ट्री मैन का कार्य अब अनेक अभियानों के माध्यम से देश और दुनिया के अनेक महत्वपूर्ण स्थलों पर किए जा रहे हैं. 1.5 करोड़ से अधिक पौधे लगाकर संरक्षित कर चुके विष्णु का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 5 करोड़ पौधे लगाने का है. उनके प्रयासों से ऋग्वेद काल के बाद पहली बार इको फ्रेंडली वेडिंग (पर्यावरणीय विवाह) संपन्न कराया जा चुका है.
ख़ुद ट्री मैन नें कार्यों की व्यस्तताओं के चलते विवाह नहीं किया. मगर, अपने भाई के विवाह में दहेज़ ना लेकर कन्यादान में सिर्फ कल्प वृक्ष के दो पौधे लिए. तब ससुराल पक्ष नें इस पहल से खुश होकर एक ट्रेक्टर पौधे दिए. बारातियों को भी विदाई में पौधे दिए और पौधारोपण कराया.
पशु-पक्षियों के संरक्षण की पहल
विष्णु लांबा ने विश्व में पहली बार हाथियों पर वृक्षों की सौभायात्रा निकलवाई. हजारों वृक्ष मित्रों का सम्मलेन कराया. वे लंबे समय से रेगिस्थान के जहाज ऊंट के सरक्षण को लेकर अभियान चला रहे थे. जिससे जुलाई 2014 में सरकार नें ऊंट को राज्य पशु का दर्ज़ा दिया. वे रास्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार का विरोध कर रोकथाम का विशेष प्रयास करते रहे है. ट्री मैन के प्रयासों का ही परिणाम था कि जयपुर साहित्य महाकुंभ जैसे अनेक बड़े मंचों पर बुके के स्थान पर तुलसी के पौधे मंचों पर भेंट किए जाने लगे.
विष्णु लांबा ऑपरेशन सिंदूर 2.0 कार्यक्रम के माध्यम से अब तक लाखों पौधे सिंदूर के लगवा चुके हैं और 200 से अधिक विलुप्त होती स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण कर चुके हैं. उन्होंने मकर संक्रांति पर चाइनीज़ मांझे से घायल होनें वाले पक्षियों के वर्षों से नि:शुल्क पक्षी चिकित्सा सिविर का आयोजन करवाने में खास भूमिका निभाई, जिससे हर वर्ष हज़ारों पक्षियों का उपचार किया जाता है.
'दो मन लकड़ी' की बात
ट्री मैन ने आज़ादी के बाद पहली बार देश के 22 राज्यों में भ्रमण कर 56 से अधिक क्रांतिकारियों के परिवारों को तलाशा, शहीदों के जन्म और बलिदान स्थलों पर पौधे लगाए और सभी क्रांतिकारी परिवारों को भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणव मुखर्जी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जैसे कई सम्माननीय नागरिकों से मिलवाया.
फ़िल्म पान सिह तोमर से प्रेरित होकर ट्रीमैन ने चम्बल के पूर्व कुंख्यात दसियों (डकैतों) को अपनी मुहीम से जोड़ा. उन्हें जयपुर बुलाया और एक कार्यक्रम के जरिए पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई. उसके बाद किसी ने जंगल लगाया, किसी ने स्कूल गोद ली, तो किसी ने गौशाला चलाना शुरु कर दिया. ट्री मैन नें कहा 'अब दो गज़ कफ़न' और 'दो गज जमीन' की जगह 'दो मन लकड़ी' की बात होनी चाहिए. जिसनें अपनें जीवन में 5 पेड़ नहीं लगाए, उसे चिता पर जलनें का कोई अधिकार नहीं. कम से कम अपनें अंतिम संस्कार के लिए अपनें जीवन में 5 पेड़ ज़रूर लगाएं और अगर परमात्मा नें जिंदगी दी, तो मैं आपके सहयोग से 5 करोड़ पेड़ लगाउंगा. उन्होंने 'हरित भारत - हर्षित भारत' का नारा भी दिया. बता दें कि पर्यावरण विरोधी योजनाओं को रुकवाने के चलते अनेक बार उन पर जानलेवा हमले भी हो चुके हैं. ट्री मैन कभी अकेले थे, लेकिन आज लाखों वालंटियर उनकी मुहिम का हिस्सा बनकर पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक सामाजिक सरोकारों में योगदान दे रहे हैं. ट्रीमैन विष्णु लाम्बा के सार्थक प्रयासों की चर्चा संयुक्त राष्ट्र तक है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के छठे प्रमुख एरिक सोलहेमे भी उनके गांव पहुंचकर उनके कार्यों को देख चुके हैं.
सम्मान और अभियान
विष्णु लांबा को विभिन्न पर्यावरणीय और सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें अब तक राजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार, अमृता देवी बिश्नोई पुरस्कार सहित 500 से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं. वे अमिताभ बच्चन और रवीना टंडन के साथ महाराष्ट्र शासन की ग्रीन आर्मी के ब्रांड एंबेसडर भी रह चुके हैं. वे मध्य प्रदेश शासन के एक पेड़ मां के नाम अभियान के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर नेतृत्व कर चुके हैं, जहां 12 घंटे में 12 लाख पेड़ लगाकर संरक्षित करते हुए विश्व कीर्तिमान भी कायम किया जा चुका है.
श्री कल्पतरु संस्थान के माध्यम से दुनिया भर में अनेक अभियान चलाए जाते हैं, जिनमें ग्रीन बचपन अभियान के माध्यम से 5 से 12 वर्ष के बच्चों को जोड़ा गया है. इंडो नेपाल ग्रीन मिशन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर बागमती नदी संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न कार्य किया जा रहे हैं. राजस्थान पुलिस के साथ चलाए जा रहे "खाकी वॉरियर्स अभियान" के अंतर्गत सैकड़ो पुलिस परिसरों में लाखों पौधे लगाकर संरक्षित किए जा चुके हैं. वहीं, अब श्री कल्पतरु संस्थान ने चंबल के डकैतों के पर्यावरण संरक्षण के कार्यों की सफलता के बाद 'नक्सल ग्रीन मिशन' का आगाज किया है. जिसके अंतर्गत हाल ही में समर्पण कर चुके नक्सलियों को वृक्ष मित्र बना कर मुख्य धारा में लाते हुए जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए जोड़ा जा रहा है.
ट्री मैन विष्णु लाम्बा से संवाद
देश में वन संरक्षण को मजबूत गति देने वाले श्री विष्णु लाम्बा से हमने उनके कार्य पर संवाद भी किया.
इस दौरान वे कहते हैं कि, 'मेरा उद्देश्य केवल वृक्ष लगाना नहीं बल्कि समाज और प्रकृति के बीच टूटते रिश्ते को पुनः स्थापित करना है. मेरे इस पेड़ लगाने और उन्हें बचाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य में मुझे कड़ा संघर्ष झेलना पड़ा है. मगर, मैंने संघर्ष का जबाव परिणाम से दिया है. मैंने संघर्षों को प्रचार का माध्यम नहीं बनाया. मैं पेड़ कितने लगाये गये इस तथ्य से अधिक इस पर ध्यान देता हूं कि, कितने पेड़ बचाये गये. संरक्षित किये गये. इसलिए अधिक लगाने के बजाए कम पेड़ लगाएं पर पेड़ों का संवर्धन करें.'
आगे वह कहते हैं कि, मेरा मानना है कि, वृक्ष लगाना कोई अभियान नहीं बल्कि जीवन जीने की शैली है. यदि हर व्यक्ति 5 पेड़ लगाकर उनका संवर्धन करें तब पर्यावरण संरक्षण की चुनौती से निपटा जा सकता है. मेरा मानना है कि, आने वाली पीढ़ियां हमें हमारे भाषण से नहीं कार्यों से ध्यान रखेगीं. मैं युवाओं को संदेश देते हुए कहना चाहता हूं कि, पेड़, जल, नदी, जंगल, जीव-जंतु के संरक्षण जैसे महान कार्य में आगे आएं ताकि धरती को समृद्ध बनाया जा सके.
लेखक: सतीश भारतीय