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Updated on: 15 March, 2026 8:43 PM IST
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेले के दौरान कुलपति ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में क्या कहा जानें।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेला किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि उद्यमियों के बीच नई तकनीकों और अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। मेले के दौरान कुलपति ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि पूसा का किसान मेला वर्षों से किसानों के लिए नई तकनीक, उन्नत बीज प्रजातियों और कृषि नवाचारों को जानने का बड़ा अवसर प्रदान करता रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार सहित कई राज्यों के किसान हर साल इस मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि यहां से वे नई-नई बीज प्रजातियां, पौधे और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी लेकर अपने खेतों तक पहुंचाते हैं।

कुलपति ने कहा कि इस वर्ष मेले में कई अद्भुत पौधे और कृषि उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं, जिन्हें देखकर किसान काफी उत्साहित नजर आए। कई ऐसी नई प्रजातियां और नवाचार यहां देखने को मिले, जिन्हें आम तौर पर किसान पहले नहीं देख पाए थे। इससे किसानों को खेती में नई संभावनाओं और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नवाचार और प्रयोगों को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने बताया कि मेले में बड़ी संख्या में कृषि उद्यमी भी पहुंचे हैं, जो अपने-अपने उत्पादों के साथ यहां आए हैं। इन उत्पादों की अच्छी बिक्री भी हुई और कई उद्यमियों ने लाखों रुपये का कारोबार किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि कृषि आधारित उद्यमिता के क्षेत्र में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं और युवा भी इस क्षेत्र में आगे आ रहे हैं।

कुलपति ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करनी होगी। देश के संसाधनों और स्वदेशी उत्पादों का अधिक उपयोग करना जरूरी है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि जब देश का पैसा देश के भीतर ही संचालित होगा, तभी भारत वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

उन्होंने विशेष रूप से मखाना उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार के लिए यह एक महत्वपूर्ण फसल है। केंद्र सरकार द्वारा मखाना बोर्ड के गठन का निर्णय राज्य के किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे मखाना उत्पादन, अनुसंधान और विपणन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में बिहार मखाना उत्पादन और अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाएगा।

कुलपति ने मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में भी बिहार की प्रगति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में बिहार देश में अग्रणी बनता जा रहा है। इस क्षेत्र में कई नए प्रयोग किए जा रहे हैं और शहद के साथ-साथ कई प्रकार के मूल्य संवर्धित उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जा रही है। विश्वविद्यालय में मौजूद बड़ी संख्या में गौवंश से प्राप्त गोबर और अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग कर प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पाद तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और किसानों को पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए प्रेरित करना है।

कुलपति ने कहा कि किसान मेला केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न विषयों पर गोष्ठियों का भी आयोजन किया गया है। इन गोष्ठियों में कृषि तकनीक, किसानों की आय बढ़ाने के उपाय, ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और कृषि व उद्यमिता के क्षेत्र में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में वैज्ञानिक किसानों से सीधे संवाद करते हैं, उनकी समस्याओं को सुनते हैं और वैज्ञानिक समाधान भी बताते हैं। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचता है।

कुलपति ने यह भी कहा कि इस मेले में बड़ी संख्या में स्कूलों के बच्चे भी पहुंचे। कई बच्चों ने पहली बार फसलों, पौधों और कृषि से जुड़े विभिन्न पहलुओं को नजदीक से देखा। बच्चों ने यह भी जाना कि गेहूं, चना जैसी फसलें खेतों में कैसे उगती हैं और उनसे खाद्य पदार्थ कैसे तैयार होते हैं। इससे नई पीढ़ी को खेती और प्रकृति के प्रति जागरूक बनाने में मदद मिलती है।

अपने संबोधन के अंत में कुलपति ने मेले के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए मेले में आए किसानों, उद्यमियों, विद्यार्थियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और कृषि को अधिक समृद्ध बनाने का प्रयास करता रहेगा।

रिपोर्ट : रामजी कुमार FTJ बिहार।

English Summary: Three-day farmers fair organized at Dr Rajendra Prasad Central Agricultural University emerged as a hub of innovation for farmers and scientists
Published on: 15 March 2026, 08:56 PM IST

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