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Updated on: 6 August, 2019 4:38 PM IST

सुमिन्तर इंडिया आर्गेनिक्स  द्वारा महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के अकोला वाशिम यवतमाल बुलढाणा जिले के 7 गावों के लगभग 190  किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है वर्तमान में लगी सोयाबीन की फसल में जैविक विधि से कीट निंयत्रण हेतु के प्रशिक्षण का आयोजन किया गया था. प्रशिक्षण  का मुख्य उदेश्य.विषरहित कीट निंयत्रण का विदर्भ क्षेत्र में पिछले दिनों बुवाई के पश्‍चात् 20-22  दिन तक वर्षा न होने से फसल प्रभावित हो रही थी पिछले दिनों एक सप्ताह लगातार वर्षा होने से फसल की बढ़वार संतोष जनक है. इस वर्षा के बाद कीट प्रकोप की संभावना रहती है. इसके लिए किसानों को यह बताया गया की कैसे विषरहित कीट निंयत्रण करे. प्रशिक्षण का प्रबंधन कंपनी के तरफ महाराष्ट्र परियोजना के वरिष्ठ प्रबन्धक राजीव पाटिल एवं सहायक प्रबंधक महेश उन्होंले ने किया. यह प्रशिक्षण विभिन्न भाषाओं में आयोजित किया गया तथा सुमिन्तर इंडिया द्वारा किसानों के खेत पर विकसित आदर्श जैविक प्रक्षेक्ष पर जबिक विधि से उगायी जा रही सोयाबीन की फसल को भी प्रशिक्षण में आये किसानों को दिखाया गया.

किसानों को प्रशिक्षण कंपनी के वरिष्ठ प्रबन्धक शोध एवं विकास संजय श्रीवास्तव ने दिया. 

श्रीवास्तव ने किसानों को बताया की खरपतवार मुक्त खेत को रखना फोरोफोन ट्रैप का प्रयोग कर कीट की उपस्थिति का पट लगाना यह कीट निंयत्रण से पूर्व की प्रकिर्या है. प्र्त्येक कीट हेतु अलग - अलग प्रकार के फोरोफोन का प्रयोग होता है ट्रैप लगाने के पश्‍चात्  जैसे ही कीट के अगमन की सूचना मिल जाए तो किसानों को विषरहित स्वनिर्मित वानस्पतिक कीट नाशी का प्रयोग खेत में करना चाहिए. फोरोफोन ट्रैप को बुवाई के 10-15 दिन बाद खेत में लगाना उत्तम होता है इसमें कीट के उपस्थिति की अग्रमि जानकारी मिल जाती है.

जैसे ही कीट की जानकारी मिले सवनिर्मित कीटनाशी का प्रयोग करना चाहिए जिसके प्रमुख है - नीम तेल , नीम बीज सत , दशवर्णीत पांचपत्ती काट, ब्रह्मछत्र निमास्त्व लहसुन मिर्चसत आदि.

इन कीट नाशको बनाने में आसपास स्वयं उगने वाली वनस्पति जैसे नीम घतूरा, आक, निर्गुडी कनेर सीताफल,करेंज ( कडुवदाम) घानेरी ( लेटना कैमरा ) अरंड , वेसरम आदि के पत्तो का प्रयोग होता है जो की निःशुल्क आसानी से उपलब्ध है.

संजय श्रीवास्तव ने किसानों को बताया कि जो कि वानस्पतिक कीटनाशी हम बनाते है उनका प्रयोग कीट के संक्रमण कि सम्भावना होने पर करने पर अच्छा परिणाम मिलता है. इसमें शुरुआत में ही कीट नष्ट हो जाते है फसल सुरक्षित रहती है. साथ ही विषमुक्त उत्पादन मिलता है उक्त प्रकार के कीट नाशी को बनाकर एवं स्प्रे करने का तरीका थोड़े क्षेत्र पर स्प्रेकर बताया गया. प्रशिक्षण के दौरान कीट निंयत्रण  में विभिन्न शकाओ को किसानों से प्रस्तुत किया जिसका उनको उचित समाधान बताया गया.

कुछ किसानों का प्रश्न था कि हम सोयाबीन के साथ अन्तवर्ती फसल तुअर लगावे है जिसमे मरू या उकठा रोग कि समस्या आती है. इसमें समाधान हेतु संजय श्रीवास्तव ने बताया कि झाइको डरमा नामक जैविक फफूंदनाशी से बीज एवं भूमि उपचार करें.

यही एक उत्तम  समाधान है किसान तुअर  की बुवाई बहुत सघन करते है यह भी एक कारक है  उकटा रोग का एवं जलजमान से भी फसल  क्षतिग्रस्त होती है। तुअर में किट की समस्या को पूछा जिसका समाधान उन्हें  बताया गया । वह भी जैविक विधि से बिना खर्चे के किसानों से  संजय श्रीवास्तव ने विशेष आग्रह किया कि जैविक खेती अपनाएं तथा ये बताया गया कि उनके सम्पर्क में आने वाला कंपनी का प्रत्येक कर्मचारी जो कि फील्ड में रहता है सदैव उनको जैविक खेती के तकीनीकी ज्ञान को उपलब्ध कराएगा । फील्ड का प्रत्येक कर्मचारी  समय - समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करता है एवं सामाजिक समस्या का जैविक निदान का तरीका सीखकर आपको बताता है.

अन्त में कम्पनी के महाराष्ट्र परियोजना के वरिष्ट प्रबन्धक राजीव पाटिल एवं सहायक प्रबन्धक महेश ने आये हुए किसानों को धन्यवाद दिया.

सुमिन्तर इंडिया  द्वारा विकशित जैविक  आदर्श प्रक्षेत पर उगायी गयी सोयाबीन कि फसल  को देख कर आपस में  चर्चा करते दिखाई दिये कि बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपने पास उपलब्ध साधन से अच्छी पैदावार  कम लागत में ली जा सकती है तथा हम जो भी उगाएंगे वह विष मुक्त होगा जिसका प्रयोग हम अपने खाने में करते है.

English Summary: sumanthar india trained farmers for pesticide free pest management
Published on: 06 August 2019, 04:48 PM IST

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