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Updated on: 15 May, 2026 5:42 PM IST
डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप)

आज भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर के तत्वावधान में संस्थान परिसर में "मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए उर्वरकों का संतुलित उपयोग" विषय पर एक दिवसीय किसान गोष्ठी के आयोजन हुआ। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मारवाड़ रत्न, डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) उपस्थित रहे। अपने प्रेरणादायी बोधन में डॉ. जाट ने कृषि क्षेत्र में मिट्टी की उर्वरता को अक्षुण्ण रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया और कहा कि आधुनिक कृषि में मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण ही टिकाऊ खेती एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण उत्पादन का एकमात्र आधार है।

उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी मिट्टी का नियमित परीक्षण करवाएं और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाएं। महानिदेशक ने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग के बजाय जैविक एवं जैव उर्वरकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति देशव्यापी जागरूकता फैलाने हेतु पिछले एक माह से निरंतर विशेष अभियान संचालित किर रहा है। उनके अनुसार विकसित कृषि ही विकसित भारत का आधार है विकसित कृषि में योगदान देने वाले किसानों की सफलता की गाथा लिखी जानी चाहिए ताकि अन्य किसान भी इससे प्रेरित हो सके।

इसी अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. जे.पी. मिश्रा, निदेशक, अटारी, जोधपुर, ने भी अपना विचार साझा किया। उन्होंने अटारी संस्थान द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर किए जा रहे कृषि नवाचारों और महत्वपूर्ण शोध कार्यों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों प्रदान करने और इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में डॉ. हनुमान सहाय जाट, निदेशक, काजरी, ने गोष्ठी के मूलभूत उद्देश्यों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का प्राथमिक लक्ष्य कृषक समुदाय को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक खेती की नवीनतम विधियों तथा टिकाऊ कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने रेखांकित किया कि वैज्ञानिक जानकारियों के उचित क्रियान्वयन से न केवल खेती की लागत में प्रभावी रूप से कमी आएगी, बल्कि किसानों की उत्पादकता और आय में भी आशातीत वृद्धि होगी। निदेशक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में काजरी द्वारा बाजरा, मूंग, उड़द, मोठ, ग्वार आदि फसलों की पोषक तत्वों से भरपूर अनेक किस्में विकसित का विकास किया गया हैं।

साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नई किस्मों में जैविक और अजैविक तनाव सहनशीलता प्रदान करने के लिए पारंपरिक किस्मों का उपयोग किया जाता रहा है। इसके लिए एनबीपीजीआर स्टेशन शुष्क क्षेत्रों में पाए जाने वाले जर्मप्लाज्म के संरक्षण में अच्छा काम कर रहा है।

गोष्ठी के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर विकसित मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की विभिन्न पद्धतियों, संतुलित उर्वरक उपयोग के वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत कृषि यंत्रों के बारे में विस्तार से तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम के विधिवत समापन के अवसर पर डॉ. हनुमान सहाय जाट द्वारा सभी अतिथियों, गणमान्य नागरिकों, वैज्ञानिकों और दूर-दराज से आए सहभागी किसानों के प्रति औपचारिक आभार व्यक्त किया गया।

इस वृहद आयोजन में जोधपुर संभाग के सैकड़ों प्रगतिशील किसान, राज्य सरकार के कृषि अधिकारियों, वरिष्ठ वैज्ञानिकों, शोधार्थियों तथा कृषि आदान विक्रेताओं ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया। साथ ही कार्यक्रम के दौरान आयोजित चर्चा सत्र में किसानों द्वारा पूछे गए खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिकों ने तर्कसंगत समाधान प्रस्तुत किया।

English Summary: Soil Health Management Icar Cazri Jodhpur Balanced Use of Fertilizers Icar Director General Message
Published on: 15 May 2026, 05:50 PM IST

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