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पराली प्रबंधन को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने की साझा समीक्षा
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पराली समस्या नहीं, किसान की आय और मिट्टी की सेहत का समाधान: कृषि भवन में हुई उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक
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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का राज्यों को स्पष्ट संदेश- पराली जलाने की रोकथाम के लिए युद्ध स्तर पर उतरें, अब समय बहुत कम
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मिट्टी भी बचानी है, किसान को समृद्ध भी बनाना है- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह
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हरियाणा और यूपी में घटीं पराली जलाने की घटनाएं, मध्य प्रदेश- राजस्थान में बढ़ोतरी पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने जताई चिंता; त्वरित एक्शन के निर्देश
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मशीनें खेत में चलें, कागजों में नहीं: पुरानी मशीनों की मरम्मत और छोटे किसानों को रियायती दर पर उपलब्धता अनिवार्य- शिवराज सिंह
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केंद्र सरकार राज्यों को दे रही है हरसंभव आर्थिक सहयोग; पंजाब उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) शीघ्र भेजे ताकि जारी हो सके अगली किस्त- शिवराज सिंह
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कलेक्टर्स फील्ड में उतरें, माइक्रो-प्लानिंग से काम करें: पराली को धुआं बनाने के बजाय बिजली, बायो-सीएनजी और खाद में बदलने का रोडमैप तैयार- शिवराज सिंह
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026, धान कटाई के मौजूदा सीजन में पराली (फसल अवशेष) प्रबंधन को मिशन मोड में अमलीजामा पहनाने के लिए आज कृषि भवन, नई दिल्ली में महत्वपूर्ण अंतर-मंत्रालयी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। इस बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, दिल्ली-एनसीआर सहित प्रमुख राज्यों- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्रीगण, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन सचिव नरेंद्र भूषण सहित केंद्र एवं राज्यों के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने दो-टूक कहा कि फसल कटाई और रबी बुवाई के बीच समय बहुत कम बचा है, इसलिए प्रशासनिक अमले को फाइलों से निकलकर सीधे जमीन पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा। जिला स्तर पर जिलाधिकारियों (कलेक्टर्स) की त्वरित बैठकें आयोजित कर सख्त निगरानी और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए।
पराली समस्या नहीं, किसान की आय और मिट्टी की सेहत सुधारने का माध्यम: शिवराज सिंह
बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धान की कटाई चल रही है और किसान को अगली फसल की बुवाई की जल्दी है। ऐसे में केवल यह कह देना कि पराली मत जलाओ, काफी नहीं होगा। हमें किसान को आसान, सुलभ और सस्ता विकल्प देना होगा। पराली जलाने से न सिर्फ वायु प्रदूषण होता है, बल्कि मिट्टी के मित्र कीट और पोषक तत्व जलकर राख हो जाते हैं। हमें अपनी धरती माता और मिट्टी की सेहत को बचाना है। पराली खेत में मिले तो जैविक खाद बनती है और खेत से बाहर जाए तो बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली और चारे के रूप में किसान की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनती है।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पराली की आग रोकना नहीं, बल्कि एक ऐसा सशक्त तंत्र विकसित करना है जिससे किसान को पराली जलाने की आवश्यकता ही न पड़े और पर्यावरण अनुकूल खेती के जरिए कार्बन क्रेडिट जैसी संभावनाओं का लाभ भी अन्नदाताओं को मिले।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में घटनाओं पर चिंता, युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश
बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के विश्लेषण पर बोलते हुए चौहान ने कहा कि संतोष की बात है कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर की अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3% और उत्तर प्रदेश में लगभग 32% की उल्लेखनीय कमी आई है, साथ ही पंजाब में भी कुछ गिरावट दर्ज हुई है। लेकिन, मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले 55 से बढ़कर 277 (452% की वृद्धि) और राजस्थान में 20 से बढ़कर 60 (200% की वृद्धि) होना अत्यंत चिंताजनक है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने इन दोनों राज्यों को आगाह करते हुए कहा कि प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तत्काल विशेष कार्ययोजना लागू की जाए। उन्होंने कहा कि चूंकि अभी कटाई का एक बड़ा हिस्सा बाकी है, इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, वे भी कतई ढिलाई न बरतें और पूरी सतर्कता रखें।
मशीनों का शत-प्रतिशत उपयोग हो, पुरानी मशीनें बंद न पड़ें
केंद्रीय मंत्री चौहान ने मशीनों की कार्यशीलता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक राज्यों को 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं और चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 और नई मशीनें दी गई हैं। लेकिन केंद्रीय सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि पंजाब में लगभग 40% और हरियाणा में 48% पुरानी मशीनें बंद या गैर-कार्यशील पाई गई हैं। चौहान ने निर्देश दिए कि नई मशीनें बांटने के साथ-साथ पुरानी बंद पड़ी मशीनों की तत्काल मरम्मत कराकर उन्हें चालू किया जाए, अन्यथा मशीनों की कमी का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) को सक्रिय करने पर जोर देते हुए कहा कि छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें मिलना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
केंद्र से भरपूर आर्थिक मदद; पंजाब जल्द भेजे यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट
फंड्स की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए बैठक में बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत वर्ष 2018-19 से 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की गई है (जिसमें पंजाब को ₹2,056.50 करोड़, हरियाणा को ₹1,171.71 करोड़, उत्तर प्रदेश को ₹868.67 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹59 करोड़ शामिल हैं)। चालू वर्ष 2026-27 के लिए भी 592.57 करोड़ रुपये का आवंटन तय कर 430.87 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, आवंटित राशि के धीमे उपयोग पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान को समय पर साधन मिलने चाहिए। विशेष रूप से पंजाब सरकार से आग्रह किया गया कि वह पूर्व में जारी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) तत्काल केंद्र को भेजे, ताकि योजना की अगली किस्त बिना किसी रुकावट के तुरंत जारी की जा सके।
सूखे क्षेत्रों में पराली चारे का बने सहारा, उद्योगों से सीधे जुड़ें किसान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सूखे की स्थिति है, वहां पराली को चारे के रूप में सुरक्षित संग्रहित कर मवेशियों तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही, थर्मल पावर प्लांट्स में पराली पेलेट्स की को-फायरिंग, कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) और 2G बायो-इथेनॉल संयंत्रों से किसानों की सीधी सप्लाई चेन जोड़ी जाए। उन्होंने राज्यों से कहा कि स्वीकृत आपूर्ति परियोजनाओं को बिना देरी के धरातल पर शुरू कराया जाए। पूसा-44 जैसी अधिक समय लेने वाली किस्मों के स्थान पर कम अवधि वाली उन्नत किस्मों (जैसे पूसा 2090, PR126 आदि) को बढ़ावा दिया जाए ताकि कटाई के बाद खेत खाली करने का पर्याप्त समय मिल सके।
राज्यों को हरसंभव सहायता का भरोसा
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का मुख्य दायित्व राज्यों का है, लेकिन केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक मोर्चे पर हर कदम पर राज्यों और अन्नदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने सभी भागीदार मंत्रालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और जिला प्रशासनों से आह्वान किया कि वे इसे एक साझा राष्ट्रीय संकल्प मानकर कार्य करें, ताकि हमारे खेत प्रदूषणमुक्त और किसान खुशहाल बन सकें।
दोपहर 3 बजे के बाद सैटेलाइट गैप पर सख्त निगरानी के निर्देश: भूपेंद्र यादव
बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों के साथ समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि उपग्रह निगरानी में दोपहर 3 बजे के बाद आने वाले अंतराल (सैटेलाइट पास न होने) के दौरान ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड के जरिए पराली जलाने पर सख्त निगरानी रखी जाए।