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Updated on: 6 October, 2026 12:06 PM IST

किसानों की पारंपरिक और स्थानीय फल किस्मों के संरक्षण, मूल्य संवर्धन और बाजार से बेहतर जुड़ाव के उद्देश्य से समस्तीपुर के कल्याणपुर प्रखंड के मालीनगर गांव में एक दिवसीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ. इसका आयोजन आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ के फसल सुधार एवं जैव-प्रौद्योगिकी विभाग ने बिहार राज्य जैव विविधता परिषद, पटना (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार) के सहयोग से किया गया.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा), पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए), नई दिल्ली और बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय का भी सहयोग रहा. कार्यशाला का विषय था "कृषक किस्म का संरक्षण, गागर नींबू एवं आंवला फलों का मूल्य संवर्धन के माध्यम से फलोद्यानों को सशक्त बनाना."

किस्मों को पंजीकरण की जानकारी

सीआईएसएच के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार सिंह ने किसानों को आम, अमरूद, नींबू, करौंदा, बेल, आंवला और कटहल जैसे फलों की स्थानीय व पारंपरिक किस्मों के संरक्षण और पंजीकरण की प्रक्रिया बताई. उन्होंने कहा कि किसानों के पास मौजूद विशिष्ट और उपयोगी किस्मों का संरक्षण और उचित दस्तावेजीकरण भविष्य में उनके अधिकारों की रक्षा करता है और जैव विविधता संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने विरासत वृक्ष की उपयोगिता पर भी जानकारी दी.

कीट-रोग और बाग प्रबंधन पर सुझाव कृषि विज्ञान केंद्र, मालदा (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष डॉ. दुष्यंत राघव ने जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय किस्मों के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने लीची और आम में कीट एवं रोग प्रबंधन की तकनीकें भी बताईं. कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली (समस्तीपुर) के डॉ. धीरू कुमार तिवारी ने किसानों से संवाद किया और लीची-आम के बाग में पोषण प्रबंधन तथा जीर्णोद्धार (पुराने बागों के कायाकल्प) की जानकारी दी.

विशेषज्ञों ने किसानों से अपनी पारंपरिक किस्मों की पहचान कर उनके संरक्षण और पंजीकरण की पहल करने का आह्वान किया. स्थानीय कृषि और बागवानी उत्पादों के मूल्य संवर्धन के जरिए आय बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा हुई.

किसानों की समस्याएं

विभिन्न प्रखंडों से आए लगभग 45-50 किसानों ने कार्यशाला में भाग लिया. अधिकतर किसानों ने ये समस्याएं बताईं-

  • लीची में कम फलन

  • बीजू आम में एकांतर फलन (एक साल अच्छी फसल, अगले साल कम)

  • बेल के फलों का गिरना

  • आंवला में अफलन

  • कटहल में फलों का गिरना

  • महिला किसानों ने आंवला, बेल और आम के प्रसंस्कृत उत्पाद बनाने पर जल्द प्रशिक्षण कराने का आग्रह किया.

  • कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को स्थानीय किस्मों के संरक्षण के साथ कृषक अधिकार, जैव विविधता संरक्षण, मूल्य संवर्धन और बाजार व्यवस्था से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाना रहा.

English Summary: samastipur bihar workshop on conservation and value addition of traditional fruit varieties
Published on: 06 October 2026, 12:12 PM IST

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