डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद समर्थित परियोजना के तहत कृषिरत महिलाओं की आजीविका सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से संवेदीकरण सह जागरूकता कार्यशाला का आयोजन खानपुर, समस्तीपुर में किया गया. गौरतलब है कि कार्यशाला में बड़ी संख्या में कृषक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. उषा सिंह के स्वागत भाषण से हुआ.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुल 15 वैज्ञानिक, परियोजना की मुख्य अन्वेषक तथा सभी सह-अन्वेषक उपस्थित रहे. कार्यशाला का आयोजन एडवांस्ड काउंसिलिंग सेंटर फॉर एडवांस्ड कंसल्टेंसी के सहयोग से मसीना फार्म परिसर में किया गया. जहाँ अनुसंधान एवं प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं.
मशरूम उत्पादन और कृषि उद्यमिता पर विशेष प्रशिक्षण
कार्यशाला के मुख्य अतिथि पी. एस. पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि नारी शक्ति सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की सबसे सशक्त आधारशिला है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कृषक महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि न्यूनतम भूमि वाली महिलाएं भी मशरूम उत्पादन एवं उसके विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर सकती हैं. विश्वविद्यालय उनके विपणन में भी सहयोग करेगा.
गांव की बेटियां बनेंगी ड्रोन पायलट, खुलेगा कस्टम हायरिंग सेंटर
इस अवसर पर, महिला सशक्तिकरण की दिशा में दो बड़ी ऐतिहासिक घोषणाएं की गईं. कुलपति डॉ. पांडेय ने मिल्की गांव की 2 महिलाओं को विश्वविद्यालय द्वारा दिए जाने वाले अत्यंत आधुनिक 'ड्रोन पायलट' प्रशिक्षण के लिए नि:शुल्क आमंत्रित किया. साथ ही कृषि कार्यों में महिलाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई और कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की घोषणा भी की गई.
महिलाओं को मिला आधुनिक कृषि यंत्रों व मूल्य संवर्धन का ज्ञान
सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की डीन डॉ. उषा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषक महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसरों पर जागरूकता समय की आवश्यकता है और इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए. परियोजना की मुख्य अन्वेषक डॉ. संगीता देव ने कृषक महिलाओं को नवीन कृषि तकनीकों एवं आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग के प्रति जागरूक किया. उन्होंने महिलाओं को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कृषि आधारित उद्यमिता की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया.
मशरूम उत्पादन बना मुख्य आकर्षण
कार्यशाला में मशरूम कंसल्टेंट डॉ. दयाराम ने कम लागत में मशरूम उत्पादन की तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि मशरूम के विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों से भी आय सृजन संभव है. इस अवसर पर सहभागी महिलाओं के बीच मशरूम स्पॉन का वितरण किया गया. साथ ही डॉ. आर. पी. प्रसाद के नेतृत्व में मशरूम उत्पादन का लाइन डेमोंस्ट्रेशन (प्रत्यक्ष प्रशिक्षण) कराया गया, जिससे महिलाओं को उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला.
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बिनीता सत्पथी द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गीतांजलि चौधरी ने प्रस्तुत किया. इस कार्यशाला के सफल आयोजन में परियोजना से जुड़े सभी सह-अन्वेषकों डॉ. सविता कुमारी, डॉ. निधि, डॉ. शिप्रा कुमारी एवं डॉ. तुलिका कुमारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा. कार्यशाला के अंत में महिलाओं ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई प्रेरणा और अवसर प्रदान करते हैं.
लेखक: रामजी कुमार, एफटीजे, कृषि जागरण, समस्तीपुर, बिहार