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Updated on: 10 July, 2026 12:49 PM IST
प्याज भण्डारण संरचना' में मिल रहा है भारी अनुदान (Image Source-AI generate)

राजस्थान के अलवर जिले के किसानों के लिए राहत की खबर सामने आ रही है कि सरकार जिले के किसानों को भंडारण पर 50 प्रतिशत तक भारी अनुदान प्रदान कर रही है और यह खबर प्याज किसानों के लिए राहत भरी है. साथ ही आपको बता दे कि इस सरकारी योजना के तहत किसानों को 25 मीट्रिक टन क्षमता वाली प्याज भंडारण संरचना के निर्माण के लिए सब्सिडी प्रदान की जाएगी.

प्याज की खेती में किसान कौन-सी तकनीक अपना रहे हैं?

देश में जिस तरह से मानसून ने दस्तक दे दी है ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है प्याज के बीज और कंद को सुरक्षित रखना. अधिक नमी होने के कारण कंद और बीज खराब होने की संभावनाएं बढ़ जाती है, जिससे किसानों की अगली फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. इसी परेशानी को देखते हुए अलवर और खैरथल-तिजारा जिले किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं, जो इस प्रकार है-

कई गांवों में किसान प्याज की गंठियों (कण) को छोटे-छोटे गुच्छों में बांधकर घरों के अंदर ऊंचाई पर लटका रहे हैं. इससे बीज सीधे जमीन या नमी के संपर्क में नहीं आता और बारिश के मौसम में भी सुरक्षित रहता है. किसान ऐसे स्थानों का चयन कर रहे हैं जहां पर्याप्त हवा आती रहे और नमी कम हो.

कब शुरू होगी प्याज की रोपाई?

अलवर जिले में प्याज की रोपाई का कार्य अगस्त महीने से शुरू होने की संभावना है. इसके लिए किसान अभी से गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने में जुटे हुए हैं. बीज की गुणवत्ता जितनी बेहतर होगी, उत्पादन भी उतना ही अच्छा मिलेगा और लागत से अधिक कमाई होगी. इसलिए किसान अगस्त के महीने में प्याज की रोपाई करने पर विशेष ध्यान देते हैं.

प्याज की इन 3 उन्नत किस्मों का करें चुनाव

अलवर और खैरथल-तिजारा क्षेत्र के किसान है तो आप इन 3 उन्नत किस्मों को अपनाकर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं-

पूसा सोना (Sel-126) : पूसा सोना प्याज की यह किस्म दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, पंजाब के किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. इससे किसान भाई इसकी औसत उपज करीब 25 टन प्रति हेक्टेयर है तक प्राप्त कर सकते हैं.

पूसा शोभा (Sel-126): वर्ष 2018 में विकसित यह किस्म दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के किसानों के लिए अनुशंसित है. इसकी औसत उपज 25 टन प्रति हेक्टेयर है. इसके चपटे व सख्त कंद भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात के लिए उपयुक्त हैं.

पूसा रिद्धि (Sel.-338): प्याज की यह किस्म किसानों के लिए अच्छा विकल्प है. इससे किसान 31 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही यह किस्म तीखी गंध, उच्च एंटीऑक्सीडेंट (क्वेरसेटिन) मात्रा तथा बेहतर भंडारण और निर्यात क्षमता के कारण किसानों के बीच लोकप्रिय मानी जाती है.

कितना मिलेगा अनुदान?

प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को कई बार मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है. इस समस्या को कम करने के लिए सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत समन्वित फसलोत्तर प्रबंधन योजना चला रही है. इस योजना के अंतर्गत 25 मीट्रिक टन क्षमता वाली प्याज भंडारण संरचना के निर्माण पर इकाई लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम 87,500 रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है.

आवेदन कैसे करें?

योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

आवेदन के समय किसानों को निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे-

  •  आधार कार्ड या जनाधार कार्ड

  •  छह माह से अधिक पुरानी न होने वाली जमाबंदी की प्रति

  •  भूमि से संबंधित आवश्यक दस्तावेज

  •  बैंक खाते की जानकारी

  •  विभाग द्वारा मांगे गए अन्य जरूरी दस्तावेज

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Rajasthan government 50 Percent Subsidy For Onion Farmers Eligibility Know apply Process
Published on: 10 July 2026, 12:56 PM IST

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