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Updated on: 17 September, 2026 4:49 PM IST
आलू के गिरते भाव पर सरकार देगी सब्सिडी की छूट (Image Source-shutterstock)

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ समेत अन्य जिलों के आलू किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है कि जिस तरह से बाजर में आलू के दाम में गिरावट आई है. इस न्यूज को सुनकर किसानों के मन में घबराहट हो गई है कि इस भाव गिरावट से उनकी फसल से अच्छे दाम नहीं मिलेंगे और उनको भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा. इसी परेशानी को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना लागू की है, जिसके तहत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.

भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना क्या है? 

भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आलू उत्पादक किसानों के हित में शुरू की गई एक कल्याणकारी योजना है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में आलू की कीमतों में अचानक आने वाली गिरावट से किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है. साथ ही इस योजना के तहत, सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये का कोष बनाया है. यानी की जब बाजार में आलू के दाम गिरते हैं, तो किसानों को निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारण के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल (अधिकतम 40,000 रुपये) की सब्सिडी दी जाती है.

बाजार भाव गिरने पर सीधा अनुदान

जब बाजार में आलू की आवक अधिक होने के कारण कीमतें अत्यधिक गिर जाती हैं, तब सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई करेगी. कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित एक विशेष समिति राज्य में आलू की वास्तविक उत्पादन लागत का निर्धारण करेगी. बाजार दर इस लागत से नीचे जाने पर:

  •  किसानों को निर्धारित उत्पादन लागत का 25 प्रतिशत, या

  •  उत्पादन लागत और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का जो भी अंतर होगा,

  •  इन दोनों में से जो भी राशि कम होगी, वह सीधे किसान को अनुदान के रूप में दे दी जाएगी.

  •  इस श्रेणी के तहत एक पात्र किसान को अधिकतम 40,000 रुपये तक की आर्थिक मदद मिल सकती है.

निजी कोल्ड स्टोरेज में भंडारण पर आर्थिक सहायता

बाजार में तुरंत फसल न बेचकर भविष्य के लिए सुरक्षित रखने वाले किसानों को भी राहत दी गई है. यदि कोई पंजीकृत किसान अपने आलू को निजी शीतगृहों (कोल्ड स्टोरेज) में भंडारित करता है, तो उसे सरकार की तरफ से 100 रुपये प्रति क्विंटल (यानी 1 रुपये प्रति किलोग्राम) की दर से भंडारण शुल्क पर सीधा अनुदान दिया जाएगा.

योजना में शामिल होने की क्या पात्रता है?

योजना का लाभ वास्तविक और छोटे-मझोले किसानों तक सीमित रखने के लिए उद्यान विभाग ने कड़े मानक तय किए हैं-

  • भूमि की अधिकतम सीमा: एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर रोपित क्षेत्र के आधार पर ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा.

  •  उत्पादन की सीमा: बाजार भाव में गिरावट वाले अनुदान के लिए प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल उत्पादन मानक माना गया है. वहीं कोल्ड स्टोरेज भंडारण सब्सिडी के लिए प्रति हेक्टेयर अधिकतम 200 क्विंटल उत्पादन की सीमा तय की गई है.

  •  रोपित क्षेत्रफल का सटीक निर्धारण राजस्व विभाग के अद्यतन खसरा-खतौनी दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाएगा.

डिजिटल पंजीकरण और डीबीटी से पारदर्शिता

भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाया है. योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं:

  • किसानों का उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक एग्रीटेक पोर्टल पर पंजीकृत आलू उत्पादक होना और एक वैध किसान आईडी (Farmer ID) धारक होना आवश्यक है.

  • आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे.

  •  स्वीकृत अनुदान की धनराशि किसी भी नकद या चेक के बजाय सीधे लाभार्थी किसान के आधार-सीडेड बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाएगी.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Potato Farmers Subsidy Falling Potato Prices Government Scheme
Published on: 17 September 2026, 04:59 PM IST

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