Rabi Crop Farming: रबी मौसम की फसलों की बुआई हेतु खेत की अग्रिम तैयारी Escorts Kubota ने मनीष शर्मा को एग्री बिजनेस का प्रेसिडेंट नियुक्त किया, ट्रैक्टर और Agri Business की संभालेंगे जिम्मेदारी धान की फसल के लिए Dhanuka Agritech Limited ने पेश किया “Polin” फफूंदनाशी Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 5 October, 2026 3:49 PM IST
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए अधिकारियों और अभियंताओं से आह्वान किया कि वे इस चिंतन शिविर को केवल औपचारिक "कर्मकांड" न रहने दें, बल्कि धरातल पर आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों के ठोस और नवाचारपूर्ण समाधान खोजें.

उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएमजीएसवाई का अगला चरण केवल सामान्य निर्माण का नहीं, बल्कि 'क्वालिटी कनेक्टिविटी' (गुणवत्तापूर्ण संपर्क) का होना चाहिए. कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल सहित सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से आए पीएमजीएसवाई के सचिव, मुख्य अभियंता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे. 

गांव की पगडंडियों से ही होकर जाता है विकसित भारत का रास्ता

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि पूज्य बापू ने कहा था कि विकसित भारत का रास्ता खेतों की पगडंडी और गांव की गलियों से होकर जाता है. जब तक गांव का विकास नहीं होगा, तब तक देश का समग्र विकास अधूरा है.

उन्होंने अपने बाल्यकाल का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्हें गांव से भोपाल पढ़ने जाने के लिए 13 किलोमीटर का रास्ता पगडंडियों और कीचड़ के बीच घोड़े पर बैठकर तय करना पड़ता था. उन्होंने कहा, "मैंने उस दर्द को अपनी आंखों से देखा है जब सड़क न होने के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को खटिया पर लादकर ले जाया जाता था और वे रास्ते में ही दम तोड़ देते थे."

​उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन करते हुए उनकी प्रसिद्ध पंक्तियों का स्मरण किया और कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देश के ग्रामीण जनजीवन और अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है. अब तक देश में करीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बन चुकी हैं.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पीएमजीएसवाई के चौथे चरण (PMGSY-IV) में 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य मिला है, जिसमें से 20 हजार किलोमीटर की स्वीकृति हो चुकी है और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करना है. 

स्वीकृति से निर्माण तक 72 दिनों की समय-सीमा का हो कड़ाई से पालन

केंद्रीय मंत्री चौहान ने परियोजनाओं में होने वाली देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि स्वीकृति मिलने से लेकर निर्माण कार्य शुरू होने तक के लिए 72 दिन की समय-सीमा निर्धारित है, लेकिन कुछ राज्य इसका उल्लंघन कर रहे हैं. उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे राज्यों का पूरा हिसाब-किताब तैयार किया जाए. उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह समयबद्ध बनाया जाए. बार-बार टेंडर निरस्त होना, बोली न आना जैसी बाधाओं का पहले से ही 'प्री-टेंडर प्लानिंग' के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए, क्योंकि अनावश्यक देरी से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ती है और परियोजनाएं लटकती हैं. 

​'चिट्ठी-चिट्ठी का खेल बंद हो, व्यक्तिगत फॉलो-अप से लें फॉरेस्ट क्लीयरेंस'

वन एवं पर्यावरण अनुमतियों (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) में होने वाली देरी पर उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल औपचारिकता के लिए चिट्ठी लिखकर बैठ जाना समाधान नहीं है. उन्होंने कहा, "चिट्ठी-दर-चिट्ठी का खेल नहीं चलेगा. मन में तड़प होनी चाहिए कि काम कैसे तेजी से हो. अधिकारी सीधे पर्यावरण विभाग और जिला कलेक्टरों के साथ बैठकर लंबित मामलों का एकमुश्त निस्तारण कराएं."

जलवायु-अनुकूल सड़कें और वैज्ञानिक डीपीआर निर्माण

चौहान ने बदलते मौसम, बाढ़, भूस्खलन और अतिवृष्टि की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश विविधताओं से भरा है, इसलिए हर राज्य और भौगोलिक क्षेत्र के लिए एक जैसा इंजीनियरिंग मॉडल (वन साइज फिट्स ऑल) लागू नहीं किया जा सकता. डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करते समय स्थानीय ढलान, जल निकासी (ड्रेनेज), पुलिया और जलभराव की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाए. उन्होंने कहा कि यदि सड़क बन जाए और पानी निकासी न होने से ग्रामीणों के घरों में पानी भरे, तो ऐसी सड़क का कोई अर्थ नहीं है. सड़क के साथ ही पुलिया, मजबूत ड्रेनेज और पौधरोपण सुनिश्चित किया जाना चाहिए. 

गुणवत्ता से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं, ब्लैकलिस्ट होंगी लापरवाह एजेंसियां

गुणवत्ता नियंत्रण पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यदि कोई एजेंसी घटिया निर्माण करती है तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और यह भी निगरानी रखी जाए कि वही ठेकेदार किसी दूसरे या रिश्तेदार के नाम से नई कंपनी बनाकर काम में न घुस पाए. उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे केवल दफ्तरों या हवाई दौरों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में जाकर धरातल पर औचक निरीक्षण करें. 

​बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को मिलेगा सम्मान और वरीयता

चौहान ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों की सराहना की:

गुणवत्ता में अग्रणी राज्य: गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान.

​रखरखाव (मेंटेनेंस) में बेहतर राज्य: पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु.

​नई तकनीक (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन-FDR): उत्तर प्रदेश ने इसमें उल्लेखनीय कार्य किया है. 

​संपत्तियों की क्यूआर कोडिंग नवाचार: असम राज्य ने इसमें सराहनीय काम किया है. 

​उन्होंने घोषणा की कि जो राज्य समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ काम पूरा करेंगे, उन्हें आगामी स्वीकृतियों में वरीयता (वेटेज) दी जाएगी और उनके लिए एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा. वहीं, खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों को अपनी कार्यशैली सुधारनी होगी. 

5 साल की गारंटी और 'लाइफ साइकिल मैनेजमेंट'

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि निर्माण के बाद 5 वर्षों तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होती है. यदि शुरुआती छोटे गड्ढों की तुरंत मरम्मत (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) कर दी जाए, तो सड़क सालों-साल सुरक्षित रहती है. उन्होंने सोच को केवल कंस्ट्रक्शन तक सीमित न रखते हुए 'लाइफ साइकिल मैनेजमेंट' पर केंद्रित करने का निर्देश दिया. साथ ही, उन्होंने राज्यों से आह्वान किया कि 5 साल की गारंटी अवधि खत्म होने के बाद के मेंटेनेंस के लिए एक स्थायी वित्तीय व्यवस्था बनाई जाए, जैसा कि मध्य प्रदेश में मंडी निधि से किया गया था. 

पीएम जनमन और संवेदनशील क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर हो काम

उन्होंने निर्देश दिया कि पीएम जनमन योजना के तहत छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, झारखंड और आंध्र प्रदेश के दूरदराज एवं नक्सल प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर सड़कें बनाई जाएं, क्योंकि यह केवल बुनियादी ढांचा नहीं बल्कि सच्ची राष्ट्र सेवा है.

​सच्ची देशभक्ति: काम को पूरी ईमानदारी से अंजाम देना

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और अभियंताओं में नई ऊर्जा भरते हुए कहा, "आज के दौर में अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है. प्रधानमंत्री जी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि सरकार केवल फाइलों में बंद नहीं, बल्कि जनता की लाइफ में महसूस होनी चाहिए." उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई की मूल सोच "कंस्ट्रक्शन से कनेक्टिविटी, कनेक्टिविटी से कंटिन्यूटी और कंटिन्यूटी से कम्युनिटी" होनी चाहिए. उन्होंने शिविर के प्रतिभागियों से कहा कि वे लकीर के फकीर बनने के बजाय लीक से हटकर मौलिक व व्यावहारिक सुझाव दें, जिन्हें सरकार नीतियों में शामिल करने के लिए पूरी तरह तत्पर है.

English Summary: PMGSY rural roads quality Shivraj Singh Chouhan blacklist negligent agencies
Published on: 05 October 2026, 03:53 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now