दिल्ली में आज भी कई ऐसी बहुत सारी (कच्ची) कॉलोनियां है जहां लोग बड़ी तादाद में रह रहें हैं पर उनके पास कोई मालिकाना हक नहीं है. साथ ही इन परिवारों को यह डर सताता रहता है कि कई उनसे उनका घर टूट न जाएं. ऐसे में केंद्र सरकार ने राजधानी के लोगों के लिए बड़ा कदम उठाया है पीएम उदय (PM-UDAY) योजना की शुरुआत कर. इस योजना के तहत सरकार राज्य के लोगों को मालिकाना हक दिलाएंगी और 45 लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक.
क्या है पीएम उदय योजना?
पीएम उदय (PM-UDAY) योजना का उद्देश्य दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनके मकानों का कानूनी मालिकाना हक प्रदान करना है. इस योजना के तहत पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर स्वामित्व प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं. सरकार का लक्ष्य है कि अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिले और उनकी संपत्ति का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हो.
कितने परिवारों को मिलेगा लाभ?
दिल्ली की लगभग 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 45 लाख से अधिक परिवार वर्षों से अपने घरों के कानूनी स्वामित्व का इंतजार कर रहे हैं. इन परिवारों के पास मकान तो हैं, लेकिन उनके नाम पर वैध स्वामित्व दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें संपत्ति खरीदने-बेचने, बैंक से ऋण लेने और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
इसी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2019 में पीएम उदय योजना की शुरुआत की थी, ताकि इन कॉलोनियों के निवासियों को उनके घरों का कानूनी मालिकाना हक दिया जा सके.
पीएम उदय योजना आवेदन में कमी क्यों आई?
पीएम उदय योजना शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि लाखों लोग इसका लाभ उठाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. अधिकारियों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण रेगुलराइजेशन शुल्क का अधिक होना था. साथ ही बता दे कि सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाल ही में प्रक्रिया आसान किए जाने के बाद भी 50 से कम आवेदन प्राप्त हुए हैं. इससे स्पष्ट है कि लोगों की सबसे बड़ी चिंता शुल्क और अन्य खर्च हैं.
इसी स्थिति को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अप्रैल 2026 में DDA को पत्र लिखकर योजना के तहत लगने वाली फीस कम करने की मांग की थी. अब DDA इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
अब तक कितने लोगों को मिला लाभ?
पीएम उदय योजना का लक्ष्य लाखों परिवारों को मालिकाना हक देना था, लेकिन पिछले छह वर्षों में केवल करीब 40 हजार लोगों को ही इसका लाभ मिल पाया. इस योजना में लाभ लेने वालों की संख्या इसलिए कम है. इसके पीछे के कारण है- अधिक शुल्क, तकनीकी शर्तें, अतिरिक्त निर्माण से जुड़े नियम और दस्तावेजी जटिलताओं के कारण अधिकांश लोग आवेदन करने से बचते रहे.
कितनी कॉलोनिया योजना से बाहर?
दिल्ली में पीएम उदय योजना के तहत अधिकांश अनधिकृत कॉलोनियों को शामिल किया गया है, लेकिन जिन कॉलोनियों से जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं, उन्हें फिलहाल योजना के दायरे से बाहर रखा गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक करीब 200 कॉलोनियां कोर्ट में चल रहे मामलों के कारण अभी इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकी हैं.
लेखक: रवीना सिंह