देश के किसानों के लिए सरकार कई सरकारी कल्याणकारी योजना लेकर आती रहती है, जिसकी मदद से किसान अपनी खेती-बाड़ी से जुड़ी हर जरुरत को पूरा कर सकें. इसी दिशा में सरकार किसानों के लिए पीएम किसान योजना चला रही है, जिसके माध्यम से देशभर के किसानों को बेहद मदद मिल रही है. अब किसान भाइयों को इंतजार के 22वीं किस्त का यह सरकार द्वारा कब जारी की जाएगी और किन किसानों को 4000 हजार रुपये की किस्त मुहैया कराई जाएगी. इस योजना से जुड़ी पूरी जानकारी इस लेख में पढ़ें.
किन किसानों को मिलेगे 4000 हजार रुपये?
पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि किन किसानों के खातों में आएंगे 4000 हजार रुपये की 22वीं किस्त. ऐसे में सूत्रों के मुताबिक, यह कोई बोनस नहीं बल्कि उन किसानों के खाते में यह पैसा भेजा जाएगा, जिनकी 21वीं किस्त तकनीकी कारणों से अटक गई थी और ऐसे किसानों ने अपनी e-KYC, बैंक विवरण या आधार लिंकिंग से जुड़ी सभी गलतियों को सुधार लिया है, तो उन किसानों के खाते में 4000 हजार रुपये की राशि भेजी जाएगी.
किन किसानों की अटक सकती है 22वीं किस्त?
पीएम किसान योजना के तहत उन किसानों की किस्त रुक सकती है, जिन्होंने e-KYC नहीं करवाई या फिर Farmer ID नहीं बनाई है, क्योंकि सरकार ने कई राज्यों में किसान पहचान को डिजिटल रूप से प्रमाणित करने के लिए Farmer ID जरूरी कर दी है. इसके अलावा अगर जिन किसानों का बैंक खाते का आधार से सही लिंक नहीं है, उन किसान भाइयों की किस्त भी रुक सकती है.
तारीख को लेकर क्या कह रही हैं रिपोर्ट्स?
कई समाचार स्रोतों में यह संभावना जताई जा रही है कि 22वीं किस्त फरवरी या मार्च 2026 के बीच जारी होने की पूरी गुंजाइश है और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 24 फरवरी के बाद कभी भी किसानों के खाते में राशि ट्रांसफर हो सकती है, लेकिन इस बात की सरकारी पुष्टि नहीं है और सरकार की ओर से भी किस्त जारी करने की किसी तारीख का ऐलान नहीं किया गया है.
किसानों के लिए जरुरी सलाह
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जिन किसानों ने e-KYC नहीं करवाई है वे किसान तुरंत पूरा करें, CSC केंद्र या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम द्वारा.
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किसान अपने बैंक विवरण जांचें खाता सक्रिय है या नहीं, IFSC सही है या नहीं यह पूरी जानकरी सुनिश्चित करें.
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Aadhaar लिंकिंग सत्यापित करें और ख्याल रखें कि आधार-बैंक लिंकिंग में कोई त्रुटि न हो.
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जिन किसान भाइयों ने Farmer ID नहीं बनवाई है वे किसान जल्द ही बनवा लें.
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सरकारी पोर्टल, SMS अलर्ट या स्थानीय कृषि कार्यालय की सूचना पर भरोसा करें.
लेखक: रवीना सिंह