Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! PM Kusum Yojana से मिलेगी सस्ती बिजली, राज्य सरकार करेंगे प्रति मेगावाट 45 लाख रुपए तक की मदद! जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 22 April, 2024 5:47 PM IST
पशुओं के लिए आहार

हरे चारे के साइलेज के बारे में कुछ गलत धारणाओं के बारे में डेयरी किसानों/Dairy Farmers को जागरूक करने के लिए गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा एक चर्चा सत्र आयोजित किया गया. डॉ प्रकाश सिंह बराड़, प्रसार शिक्षा निदेशक ने कहा कि पंजाब के डेयरी उद्योग/Dairy Industry ने काफी प्रगति की है और इस अवधि के दौरान हरे चारे का अचार भी पशु आहार के रूप में लोकप्रिय हो गया. लेकिन चारे के अचार/Fodder Pickles की खराब गुणवत्ता के कारण कई जगहों पर पशुओं के स्वास्थ्य/Animal Health को काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि पशुपालक समुदाय को जागरूक एवं शिक्षित बनाने के लिए इस परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया है.

डॉ रविंदर सिंह ग्रेवाल, निदेशक पशुधन फार्म्स ने साइलेज बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पूरी प्रक्रिया के हर पहलू के बारे में बताया, जिसमें चारा काटने से लेकर उसे दबाने और भंडारण करने तक शामिल है. उन्होंने कहा कि साइलेज किसी भी समय किसी कमी के कारण क्षतिग्रस्त हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि साइलेज में फफूंद या कोई अन्य विकार हो तो हमें पशुओं के लिए साइलेज का उपयोग/Use of Silage नहीं करना चाहिए. उन्होंने बताया कि हम किसी भी जुगाली करने वाले जानवर को साइलेज दे सकते हैं.

डॉ राकेश शर्मा, प्रसार शिक्षा विभाग के प्रमुख ने खराब गुणवत्ता वाले साइलेज के कारण मवेशियों को होने वाली समस्याओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि साइलेज का उपयोग करने से पहले विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में परीक्षण कराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि समय-समय पर जांच करायी जानी चाहिए.

डॉ एएस पन्नू ने कहा कि साइलेज की गुणवत्ता की समस्या ज्यादातर मध्यम और छोटे किसानों को आती है क्योंकि कम मवेशी होने के कारण उन्हें साइलेज को लंबे समय तक खुले में रखना पड़ता है. इस चर्चा में लगभग 100 पशु चिकित्सकों, क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों, विशेषज्ञों और किसानों ने भाग लिया.

English Summary: pickles made from green fodder Dairy Farmers Animal Health Veterinary University
Published on: 22 April 2024, 05:52 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now