Kisan Credit Card: किसानों को अब KCC से मिलेगा 5 लाख रूपये तक का लोन, जानें कैसे उठाएं लाभ? Farmers News: किसानों की फसल आगलगी से नष्ट होने पर मिलेगी प्रति हेक्टेयर 17,000 रुपये की आर्थिक सहायता! Loan Scheme: युवाओं को बिना ब्याज मिल रहा 5 लाख रूपये तक का लोन, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 18 March, 2019 12:39 PM IST

भारत के उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में पैतृक कृषि भूमि को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यदि हिंदू उत्तराधिाकारी पैतृक कृषि भूमि का अपना हिस्सा बेचना हैं तो उसे घर के व्यक्ति को ही प्राथमिकता देनी होगी यानि उत्तराधिकारी अपनी पैतृक कृषि भूमि को किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं बेच सकता. बता दे कि जस्टिस यूयू ललित व एमआर शाह की पीठ ने यह बड़ा फैसला हिमाचल प्रदेश के एक मामले में दिया. इस मामले में इस सवाल को लेकर याचिका दायर की गई थी कि क्या कृषि भूमि भी धारा 22 के प्रावधानों के दायरे में आती है.

गौरतलब है कि धारा 22 में यह प्रावधान है कि बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संपत्ति उत्तराधिकारियों पर आ जाती है. उत्तराधिकारी अपना हिस्सा बेचना चाहता है तो उसे अपने बचे हुए उत्तराधिकारी को प्राथमिकता देनी होगी. कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि हिन्दू उत्तराधिकारी पैतृक कृषि भूमि का अपना हिस्सा बेचना चाहता है तो उसे घर के ही किसी व्यक्ति को प्राथमिकता देनी होगी. वह अपनी संपत्ति किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं बेच सकता.

पीठ ने कहा कि कृषि भूमि भी धारा 22 के प्रावधानों से ही संचालित होगी. इसमें हिस्सा बेचने के लिए व्यक्ति को अपने घर के ही  किसी व्यक्ति को प्राथमिकता देनी होगी. पीठ ने आगे कहा कि धारा 4 (2) के खत्म होने का इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि यह प्रावधान कृषिभूमि पर काश्तकारी के अधिकारों से संबंधित था। पीठ ने धारा 22 पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 'धारा 22 प्रावधान के पीछे यह उद्देश्य है कि परिवार की संपत्ति परिवार के पास ही रहे और बाहरी व्यक्ति परिवार में न घुसे.

क्या था पूरा मामला

इस मामले में हिमाचल राज्य के रहने वाले लाजपत की मृत्यु के बाद उनकी कृषिभूमि दो पुत्रों नाथू और संतोष को मिली। जिसमें संतोष ने अपना जमीन का हिस्सा एक बाहरी व्यक्ति को इसे बेच दिया. जिसके बाद नाथू ने कोर्ट में याचिका दायर किया और कहा कि 'हिन्दू उत्तराधिकार कानून की धारा 22 के तहत उसे इस मामले में प्राथमिकता पर संपत्ति लेने का अधिकार प्राप्त है. ट्रायल कोर्ट ने डिक्री ( किसी अदालत या न्यायिक अधिकारी द्वारा जारी वह पत्र या कानूनी दस्तावेज़ जिसके द्वारा किसी को कोई आज्ञा या आदेश दिया जाता हो ) नाथू के पक्ष में दी और हाईकोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा.

English Summary: paternal farmland can not besold to an outsider, decision of the supreme court
Published on: 18 March 2019, 12:44 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now