राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ), नई दिल्ली द्वारा 27 से 31 जुलाई, 2026 तक मुख्यालय, नई दिल्ली में "मशरूम उत्पादन प्रौद्योगिकी एवं कटाई उपरांत प्रबंधन" विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना, उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया.
कार्यक्रम का उद्घाटन मनोज कुमार श्रीवास्तव, सलाहकार द्वारा सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं एनएचआरडीएफ गीत के साथ हुआ.
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खाद्य, पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए मशरूम उत्पादन को एक सतत एवं लाभकारी उद्यम के रूप में बढ़ावा देना था. प्रतिभागियों को मशरूम की वैज्ञानिक खेती, धान एवं गेहूँ के पुआल जैसे कृषि अवशेषों के उपयोग द्वारा मशरूम उत्पादन तथा फसल अवशेष जलाने के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया. कार्यक्रम में मशरूम प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन की संभावनाओं तथा मशरूम उद्यम स्थापित करने हेतु उपलब्ध विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं की भी जानकारी प्रदान की गई.
तकनीकी सत्रों का संचालन एस. सी. तिवारी, सहायक निदेशक एवं प्रशिक्षण समन्वयक द्वारा किया गया, जिसमें बटन, ऑयस्टर (ढींगरी), मिल्की एवं शिटाके मशरूम की खेती, उत्पादन प्रौद्योगिकी, रोग एवं कीट प्रबंधन, स्पॉन हैंडलिंग, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा व्यावसायिक उत्पादन तकनीकों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई. प्रतिभागियों ने डॉ. अजय यादव के साथ एचएआईसी मशरूम अनुसंधान एवं विकास केंद्र, मुरथल तथा आर.के. मशरूम फार्म, मुरथल, हरियाणा का भ्रमण भी किया, जहाँ उन्हें व्यावसायिक मशरूम उत्पादन प्रणालियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.
समापन समारोह के दौरान भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एपीडा के पूर्व सचिव, डॉ. सुधांशु ने एनएचआरडीएफ मशरूम स्पॉन प्रयोगशाला, बीज परीक्षण प्रयोगशाला एवं उद्यानिकी संग्रहालय का भ्रमण किया.
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. पी. के. गुप्ता, निदेशक, एनएचआरडीएफ ने डॉ. सुधांशु की विशिष्ट उपलब्धियों एवं योगदान पर प्रकाश डाला तथा मशरूम उत्पादन को एक लाभदायक कृषि-उद्यम बताते हुए इसके माध्यम से सतत आय एवं रोजगार सृजन की संभावनाओं पर बल दिया. उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने तथा प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का प्रसार किसानों एवं ग्रामीण युवाओं तक करने के लिए प्रेरित किया. प्रतिभागियों ने मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन विषयों पर प्राप्त व्यापक प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक अनुभव की सराहना की. उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से उनके तकनीकी ज्ञान एवं सफल मशरूम उद्यम स्थापित करने हेतु उद्यमशीलता कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इस अवसर पर डॉ. सुधांशु, पूर्व सचिव, एपीडा द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए.