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Updated on: 27 March, 2026 6:17 PM IST
ताड़ से कमाई का सुनहरा अवसर ( Image Source- AI generate)

बिहार सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और पारंपरिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. आगामी नीरा सीजन अप्रैल से जुलाई 2026 को ध्यान में रखते हुए मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि लाइसेंस से संबंधित सभी प्रक्रियाएं समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएं, ताकि लोगों को समय रहते रोजगार के अवसर भी मिल सकें.

लाइसेंस नवीकरण और नए आवेदनों पर जोर

विभाग का मुख्य फोकस उन टैपर्स (ताड़ी निकालने वाले श्रमिकों) पर है, जिन्होंने वर्ष 2025-26 में लाइसेंस प्राप्त किया था. इन सभी का नवीकरण वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनिवार्य रूप से कराया जाएगा. इसके साथ ही, नए इच्छुक आवेदकों के लिए भी अवसर खोले गए हैं. अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्राप्त आवेदनों की तेजी से जांच कर पात्र अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द लाइसेंस जारी किया जाए.

जीविका समूहों के साथ समन्वय

इस पूरी प्रक्रिया में जीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका मिशन) की महत्वपूर्ण भूमिका है. जिला परियोजना प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि वे जीविका समूहों के साथ समन्वय बनाकर काम करें, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीणों को इस योजना से जोड़ा जा सके. जीविका से जुड़े नीरा उत्पाद समूहों में पंजीकृत लोगों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें प्रशिक्षण और लाइसेंस दोनों उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

क्या है नीरा और क्यों है खास

नीरा ताड़ के पेड़ों से प्राप्त एक प्राकृतिक, खमीर-मुक्त रस होता है, जिसे स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में देखा जाता है. यह पूरी तरह गैर-मादक (non-alcoholic) होता है और शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है. सरकार का उद्देश्य इसे एक वैकल्पिक रोजगार स्रोत के साथ-साथ पौष्टिक पेय के रूप में लोकप्रिय बनाना है.

नियमों का पालन अनिवार्य

बिहार नीरा (ताड़ का खमीर मुक्त रस) नियमावली, 2017’ के अनुसार, नीरा निकालने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है. बिना लाइसेंस के इस कार्य को करना अवैध माना जाएगा. यही कारण है कि विभाग इस बार किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के लिए पहले से ही सभी तैयारियां सुनिश्चित कर रहा है.

ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार की इस पहल का एक बड़ा लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना है. खासकर उन इलाकों में जहां ताड़ के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, वहां यह योजना लोगों के लिए आय का स्थायी स्रोत बन सकती है. इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि पलायन की समस्या में भी कमी आ सकती है.

प्रशिक्षण और सुरक्षा पर भी ध्यान

नए टैपर्स को लाइसेंस देने के साथ-साथ उन्हें उचित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से नीरा निकाल सकें. इससे उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहेगी और बाजार में इसकी मांग भी बढ़ेगी.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Neera Cultivation Scheme 2026 New Tappers Instructions Issued to Complete Licensing Process Before April
Published on: 27 March 2026, 06:22 PM IST

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