Tarbandi Yojana: अब 2 बीघा जमीन वाले किसानों को भी मिलेगा तारबंदी योजना का लाभ, जानें कैसे उठाएं लाभ? Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Subsidy: भेड़-बकरी पालन शुरू करना हुआ आसान! सरकार दे रही 50% सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन! Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक सिंचाई के लिए पाइप खरीदने पर किसानों को ₹15,000 तक की सब्सिडी, जानिए पात्रता और आवेदन प्रक्रिया!
Updated on: 10 April, 2018 12:00 AM IST
By:

किसान अब फसल चक्र में परिवर्तन करने लगे हैं। 6 गांव के 150 किसानों ने पहले आलू की खेती कर रहे थे, लेकिन मौसम की वजह से नुकसान हो गया। अब किसानों ने पायलेट प्रोजेक्ट बनाकर औषधीय पौधों की खेती शुरू की है। जिसमें सफलता मिलने लगी है। पहली बार 20 एकड़ में नेपाली सतावर की खेती कर रहे हैं। आगे 100 एकड़ में खेती करने का लक्ष्य बनाया है। किसानों के प्रयास को देखते हुए डाबर कंपनी ने औषधीय पौधों को खरीदने के लिए अनुबंध भी कर लिया है। 

कोरबा ब्लाक के किसानों ने मिलकर जय मां सर्वमंगला उत्पादक संघ बनाया था। जिसमें 13 गांव के 541 किसान शामिल हैं। केराकछार, ठाकुरखेता, पतरापाली, मुढुनारा व सरदुकला के किसानों ने जब सतावर के पौधे लगाए तो डर बना हुआ था कि यहां का वातावरण में तैयार होगा कि नहीं लेकिन सफलता मिल गई। अभी खेत में पौधे लहलहा रहे हैं। साथ ही प्रयोग के तौर पर 5 एकड़ में श्योनाक, पाढ़ल, बेल व गम्भारी की भी खेती कर रहे हैं। 

उत्पादक संघ के अध्यक्ष गोविंद सिंह राठिया ने बताया कि और भी किसानों को औषधीय पौधे की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसमें नाबार्ड का भी काफी सहयोग रहा है। डाबर कंपनी ने कुछ और पौधों की खेती करने सलाह दी है। लेकिन पहले शुरूआत सतावर से ही की गई है। 

बाजार में 250 से 400 रुपए किलो: नेपाली सतावर का मार्केट में प्रोसेसिंग के बाद 250 से 400 रुपए किलो है। यह फसल डेढ़ साल में तैयार हो जाता है। नगदी फसल में किसानों को बेहतर आय होने की संभावना है। पौधे तैयार होने के बाद नुकसान होने का खतरा भी नहीं रहता है। 

किसानों ने ग्राम केराकछार में 20 टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उद्यान व कृषि विभाग भी सहयोग कर रही है। स्टोरेज में वनौषधियों के साथ ही जैविक खेती से तैयार फसल को भी रखेंगे ताकि बाजार में अच्छी कीमत मिल सके। 

वनांचल में 400 से अधिक औषधीय पौधों को पहचान की गई है। लेकिन जिन पौधों की डिमांड है उसका कलेक्शन भी करेंगे। इसमें 10 प्रकार के पौधे शामिल हैं। केवाच के पौधे बहुतायत है। इसका फल औषधी के रूप में उपयोग होता है। इसी तरह बेल भी मिल जाता है।

English Summary: Nabard news
Published on: 10 April 2018, 01:52 AM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now