दशहरा मैदान, रायसेन (मध्य प्रदेश) में शनिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव, प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण का भव्य शुभारंभ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया, जहाँ मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हजारों किसान, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे.
किसान की मेहनत और संघर्ष को दिल से समझते हैं राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंच से सबसे पहले रायसेन की धरती पर उपस्थित अन्नदाता बहनों–भाइयों को सिर झुकाकर नमन करते हुए कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और गाँव की मिट्टी में पले–बढ़े हैं, इसलिए किसान की मेहनत और संघर्ष को दिल से समझते हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि रायसेन में आयोजित यह उन्नत कृषि महोत्सव हमारे किसान भाइयों–बहनों के लिए केवल लाभदायक ही नहीं, बल्कि उनके जीवन की तस्वीर बदलने वाला सिद्ध होगा.
उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान के हित में इतना केंद्रित और विषयगत आयोजन वास्तव में सराहनीय है. राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हैं, और यह केवल कहने की बात नहीं, बल्कि पिछले वर्षों में जमीन पर हुए बेमिसाल कार्यों से साबित तथ्य है.
उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले अगर किसान के नाम पर पैसा निकलता था तो आधा रास्ते में ही दूसरों की जेब में चला जाता था, जबकि अब सरकार ने ऐसा सिस्टम बनाया है कि दिल्ली से जितना पैसा निकलता है, वह पूरा का पूरा सीधे किसान के खाते में पहुँचता है- बिना बिचौलिया, बिना कट, बिना झंझट.
उन्होंने कहा कि यह आर्थिक सहायता कोई दान नहीं, बल्कि किसान के पसीने और परिश्रम का सम्मान है, जिससे वह बीज, खाद और खेत के जरूरी खर्च पूरे कर पाते हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को जोखिम भरी खेती के लिए अनमोल सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि अब ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा या कीट–प्रकोप जैसी विपदाओं में फसल खराब होने पर सीधा मुआवजा किसान के खाते में जाता है, जिससे उनकी कमर न टूटे, हताशा–निराशा की जगह फिर से खड़े होने का हौसला मिले.
उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का जिक्र करते हुए कहा कि अब किसान अपनी मिट्टी की जांच कर जमीन की जरूरत के हिसाब से ही खाद डालते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है और लागत घटती है.
अगर किसान गेहूँ ही न उगाए तो पूरी चेन डगमगा जाएगी
रक्षा मंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्न नहीं उगाता, वह पूरी अर्थव्यवस्था, रोजगार और उद्योग–धंधों को उगाता है, क्योंकि अर्थव्यवस्था के प्राथमिक (खेती–पशुपालन), द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवाएँ) तीनों क्षेत्रों की जड़ें किसान की जमीन से जुड़ी हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि किसान गेहूँ उगाता है, वही गेहूँ ट्रक से मंडी तक जाता है, आटा मिल में प्रोसेस होकर बिस्कुट–ब्रेड फैक्ट्रियों तक पहुँचता है, वहाँ मजदूर और मशीनें काम करते हैं, फिर पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और दुकानों के जरिए वह उत्पाद उपभोक्ता तक पहुँचता है- यानी अगर किसान गेहूँ ही न उगाए तो पूरी चेन डगमगा जाएगी.
उन्होंने कहा कि इसीलिए वे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि किसान पूरी अर्थव्यवस्था को चलाता है और सरकार खेती को गर्व का विषय बनाने तथा किसान को पूरी आन–बान–शान के साथ जीवन जीने योग्य बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ड्रोन, सेंसर, मोबाइल तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग, बिना मिट्टी की खेती, संरक्षित खेती, बागवानी और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप और नवाचार के साथ कृषि से जुड़ें, क्योंकि कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं और गाँव का नौजवान जितना जुड़ता जाएगा, उतनी ही नई तकनीक और अधिक आमदनी के रास्ते खुलते जाएँगे.
उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा मंत्रालय ने कैंटोनमेंट क्षेत्रों में आसपास के किसानों से ही जैविक सब्जियाँ और श्री अन्न (ज्वार, बाजरा, रागी) खरीदने की पहल की है, जिससे किसानों की आय बढ़ रही है और जवानों को ताज़ा, पौष्टिक भोजन मिल रहा है, और इस तरह ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे को नए अर्थ के साथ चरितार्थ किया जा रहा है.
रायसेन की रीति, नीति, प्रीति, पहचान, शान और यहाँ की जनता की मुस्कान तक निराली है
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रायसेन की इस पवित्र धरा पर आज केवल सभा या रैली नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और किसान का महासंगम हो रहा है, जहाँ आधुनिक तकनीक, आधुनिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान, आधुनिक अनुसंधान और आधुनिक कृषि पद्धतियों को देखने–समझने और सीखने का अनोखा अवसर मिलेगा.
उन्होंने रायसेन को अद्भुत बताते हुए कहा कि रायसेन की रीति, नीति, प्रीति, पहचान, शान और यहाँ की जनता की मुस्कान तक निराली है, यहाँ के धान और गेहूँ ने विश्व–स्तर पर अलग पहचान बनाई है और सांची–भीमबेटका जैसे दो विश्व धरोहर स्थल, भोजपुर का विशाल शिवलिंग और नर्मदा–बेतवा की पावन धाराएँ इस जिले की गरिमा बढ़ाती हैं.
आत्मनिर्भर भारत बनाने के महायज्ञ में रक्षा और कृषि दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभ हैं
शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित, समृद्ध, गौरवशाली और आत्मनिर्भर भारत बनाने का महायज्ञ चल रहा है, जिसमें रक्षा और कृषि दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभ हैं. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मजबूत हुई देश की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत की स्पष्ट नीति है- हम किसी को छेड़ते नहीं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे छोड़ा भी नहीं जाएगा, और इसी मजबूत रक्षा–नीति के साथ किसान और कृषि के विकास का बड़ा अभियान भी पूरी शिद्दत से चल रहा है.
किसान ही भगवान और जनता ही जनार्दन है
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि वे जिस क्षेत्र से आते हैं, वहाँ की जनता ने उन्हें छह विधानसभा और छह लोकसभा सहित कुल 12 चुनाव जिताए हैं, इसलिए उनके लिए किसान ही भगवान और जनता ही जनार्दन है, जिनकी सेवा ही उनके लिए भगवान की पूजा के समान है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, 140 करोड़ भारतीयों के हर पेट तक पोषण–युक्त अनाज, फल–सब्जियाँ पहुँचाना और विदेशों पर निर्भरता कम करना सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता है, इसलिए कृषि में उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और कृषि का विविधीकरण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.
किसान केवल पारंपरिक अनाज–प्रधान खेती से आगे बढ़कर एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाएँ
उन्होंने रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास के किसानों से आग्रह किया कि वे केवल पारंपरिक अनाज–प्रधान खेती से आगे बढ़कर एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) अपनाएँ, क्योंकि जमीन के छोटे–छोटे टुकड़ों- एक, दो या तीन एकड़ पर भी अगर अनाज के साथ फल, सब्जी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन जोड़ा जाए, तो वास्तविक रूप से लाभकारी खेती संभव है.
उन्होंने बताया कि इस उन्नत कृषि महोत्सव में एक एकड़ के सम्पूर्ण इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल का लाइव डेमो लगाया गया है, और वैज्ञानिक मार्गदर्शन में इस मॉडल को अपनाने पर किसान एक एकड़ में भी दो लाख रुपये से अधिक की आमदनी कमा सकते हैं.
इस मेले को मात्र भाषण–कार्यक्रम की बजाय पाठशाला के रूप में तैयार किया गया है
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस मेले को मात्र भाषण–कार्यक्रम की बजाय पाठशाला के रूप में तैयार किया गया है, जहाँ देश के शीर्ष वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और उन्नतशील किसान अलग–अलग हॉलों में लगभग 20 विषयों पर सत्र लेंगे- हॉर्टिकल्चर, बागवानी, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, मशीनों के उपयोग से लागत घटाने, ड्रोन के बहुआयामी उपयोग, बाज़ार से जुड़ाव और मिट्टी परीक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि करीब 4000 किसानों ने इन सत्रों के लिए पंजीकरण कराया है, जहाँ वैज्ञानिक पहले प्रेजेंटेशन देंगे, फिर किसान खुलकर सवाल पूछ सकेंगे, और यही इस मेले की विशेषता है कि यह तमाशा नहीं, खेती की दशा–दिशा बदलने का ठोस प्रयास है.
केंद्र सरकार हर राज्य का कृषि रोडमैप तैयार कर रही है
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर केंद्र सरकार हर राज्य का कृषि रोडमैप तैयार कर रही है, क्योंकि हर राज्य की परिस्थितियाँ और एग्रो–क्लाइमेटिक कंडीशंस अलग हैं. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के लिए भी राज्य सरकार के साथ मिलकर एक समग्र कृषि रोडमैप बनाया जाएगा, जबकि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास इन चार जिलों के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने विशेष कृषि रोडमैप तैयार किया है, जिसे कल दोपहर 1 बजे यहाँ औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा. इस रोडमैप में किस क्षेत्र में कौन–सी फसल, कौन–सा हॉर्टिकल्चर, कौन–सी दलहन–फसल, कौन–सी बीज किस्म और यदि किसान बागवानी करना चाहें तो कौन–से पौधे लगाने चाहिए; इसका पूरा वैज्ञानिक खाका दिया गया है.
रोडमैप को जमीन पर लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी
शिवराज सिंह ने आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं के समन्वय से इस रोडमैप को जमीन पर लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी, क्योंकि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी बदलने का वास्तविक प्रयास है.
म.प्र. में 55 दाल मिलें खोलने का निर्णय भारत सरकार ने लिया है
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार की मंशा इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब बनाने की है, जहाँ अनेक किसान फल–सब्जी की खेती के साथ–साथ फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स से भी जुड़ें, ताकि कच्चे माल से प्रोसेस्ड प्रोडक्ट बनाकर अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सके, जैसे बासमती के उदाहरण में एक यूनिट लगने के बाद क्षेत्र में बासमती की खेती का विस्तार हुआ और किसानों की आय बढ़ी.
उन्होंने बताया कि यहाँ दलहन मिशन को पूरी ताकत से लागू किया जाएगा और मध्य प्रदेश में 55 दाल मिलें खोलने का निर्णय भारत सरकार ने लिया है, ताकि चना, मसूर, उड़द और तुअर जैसी दालों की खेती को मजबूत बाज़ार मिले. उन्होंने स्पष्ट घोषणा की कि किसान जितनी मसूर, उड़द और तुअर पैदा करेंगे और बेचना चाहेंगे, उतनी पूरी मात्रा भारत सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने का काम करेगी और खेती से लेकर बाजार तक की सभी कड़ियों पर चल रही योजनाओं को इस क्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा.
नया मृदा/eFARM मोबाइल ऐप
शिवराज सिंह चौहान ने नए मृदा/eFARM मोबाइल ऐप का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसान केवल मोबाइल लेकर खेत पर घूमेंगे तो तुरंत पता चल जाएगा कि मिट्टी में कौन–से पोषक तत्व हैं और कौन–सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है, जिससे ‘रामलाल ने एक बोरी डाली तो श्यामलाल भी डाल दे’ जैसी आदतों की जगह वैज्ञानिक खाद प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, किसान अनावश्यक खाद खर्च से बचेंगे और उत्पादन भी बढ़ेगा.
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे तीनों दिन पूरी गंभीरता से इन सत्रों में भाग लें, सीखें और अपनी कृषि पद्धति बदलें, क्योंकि कम जमीन पर अलग–अलग फसलों के साथ अधिक आमदनी प्राप्त करना ही इस महोत्सव का मूल उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी तीनों दिन यहीं रहकर विभिन्न सत्रों में भाग लेंगे, केवल भाषण देकर लौट जाने वाले नहीं हैं, और किसान भी सूचना के अनुसार अलग–अलग सत्रों में सक्रिय भागीदारी करें.
अब शासन की कार्य–संस्कृति बदल चुकी है
म.प्र. के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में अब शासन की कार्य–संस्कृति बदल चुकी है, विभाग अलग–थलग नहीं, बल्कि समन्वित और मिशन मोड में काम कर रहे हैं, और यह सब यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बदली हुई सोच और कार्यशैली का परिणाम है.
उन्होंने मंच से जोरदार तालियों के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का अभिनंदन करते हुए कहा कि वे छह बार सांसद और छह बार विधायक रहे हैं और जिस भी काम को हाथ में लेते हैं, उसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाना उनकी पहचान है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह भव्य कार्यक्रम पूरे मंच के लिए गर्व की बात है, जहाँ समय भले सीमित हो, लेकिन संकल्प असीमित है.
उन्होंने इस मंच को एक ओर सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवानों के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दूसरी ओर खेत में देश की अर्थव्यवस्था संभालने वाले किसानों को एक साथ सम्मान देने वाला मंच बताते हुए कहा कि यह आयोजन दोनों की गरिमा बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कार्यक्रम है, जहाँ देश सीमा पर सुरक्षित है और खेतों में मेहनतकश किसान भारत का मान–सम्मान बढ़ा रहे हैं.
प्रदर्शनी परिसर नगर बसने जैसा
उन्होंने उल्लेख किया कि आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में दोगुना निर्यात कर रहा है, जबकि पहले कांग्रेस के समय गेहूँ तक आयात करना पड़ता था, पर अब रायसेन अकेला 47 देशों को बासमती चावल निर्यात कर रहा है, जो किसान की मेहनत और भारत सरकार की नीतियों का परिणाम है.
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस शासन और भाजपा सरकार की तुलना करते हुए कहा कि 1956 में मध्य प्रदेश बनने के बाद लगभग 55 साल कांग्रेस की सरकार रही, तब सिंचाई का रकबा सीमित था और गेहूँ का समर्थन मूल्य 90–100 रुपये प्रति क्विंटल से आगे नहीं बढ़ पाया, जबकि भाजपा सरकारों शिवराज सिंह चौहान, उमा भारती, बाबूलाल गौर और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गेहूँ का दाम 2625 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँचा है और सिंचाई क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, साथ ही किसानों को दिन में नियमित बिजली उपलब्ध कराई जा रही है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान, महिला, गरीब और युवा- इन चार वर्गों को केंद्र में रखकर विकास की जो व्यापक नीति बनाई है, उसकी जमीनी झलक इस प्रदर्शनी और उन्नत कृषि महोत्सव में स्पष्ट दिखाई दे रही है. उन्होंने ऊपर से प्रदर्शनी परिसर को देखकर इसे नगर बसने जैसा दृश्य बताते हुए कहा कि पशुपालन, बागवानी, उन्नत कृषि यंत्र, विविध सत्रों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का यह विशाल ताना–बाना मानो हनुमान जी के विराट रूप की तरह विस्तार लिए हुए है, जो यह दिखाता है कि किसान किस–किस क्षेत्र में किस–किस प्रकार से काम कर सकता है.
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने पूरे वर्ष को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है और इस कड़ी में भारत सरकार के सहयोग से तैयार यह विशाल प्रदर्शनी और प्रशिक्षण–केन्द्रित मेला मध्य प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा. उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम सब मिलकर इस आयोजन की मूल भावना के अनुसार हर सत्र का लाभ उठाने और विकास की इस रफ्तार को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए कृत–संकल्पित हैं.
मंच पर कार्यक्रम के पहले, रक्षा मंत्री के आगमन के बाद सबसे पहले कॉर्न कटर मशीन, सोलर पैनल और पंप, माइक्रो इरिगेशन और हाइड्रोजन–पावर्ड ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों का लाइव डेमो हुआ, इसके बाद पशुपालन, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं पोषण, उर्वरक (IFFCO), क्रॉप साइंस, मत्स्य पालन, राष्ट्रीय उद्यानिकी बोर्ड और CIMMYT–BISA सहित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कराया गया.
मंच पर सांची क्षेत्र के विधायक डॉ. प्रभु राम चौधरी द्वारा स्वागत भाषण के बाद प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना और केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा ने भी किसानों को संबोधित किया. योजनाओं के तहत किसानों को लाभ–वितरण किया गया और साथ ही मृदा/eFARM मोबाइल ऐप लॉन्च कर किसानों को मिट्टी की सेहत की जाँच, पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक सिफारिशें मोबाइल पर उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई, जबकि तीन दिन तक 20 से अधिक तकनीकी सत्रों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और थीम–आधारित हॉल में किसानों को उन्नत तकनीक से रूबरू कराया जाएगा.
उद्घाटन समारोह में राज्य के पशुपालन मंत्री लखन पटेल, उद्यान मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, प्रभारी मंत्री नारायण सिंह पवार, जिले के मंत्री नरेंद्र पटेल, नर्मदापुरम के सांसद दर्शन चौधरी, अन्य सांसद- विधायक सहित वरिष्ठ नेता, किसान मोर्चा पदाधिकारी, जिला अध्यक्षगण, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के डीजी डॉ. एम.एल. जाट भी उपस्थित थे.