मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के गेहूं किसानों को रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को लेकर किसानों को बड़ी राहत दी है. राज्य में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद का कार्य लगातार जारी है और सरकार ने किसानों की सुविधा को देखते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 23 मई 2026 तक कर दिया गया है, जिससे किसानों को राहत की सांस मिली है. इससे किसान अपनी उपज बेचने से वंचित नहीं रहेंगे और समय पर ही भुगतान प्राप्त कर सकेंगे.
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
राज्य सरकार का यह फैसला किसानों के लिए किसी राहत से कम नहीं है. कई जिलों में खराब मौसम का सामना कर रहे किसान अपनी फसलों को मंडियों तक नहीं पहुंचा पा रहे थे. ऐसे में स्लॉट बुकिंग की तिथि का आगे बढ़ने से किसानों को यह फायदा हुआ की उनको अपनी फसलें बेचने का समय मिल गया और वह अब बिना किसी जल्दबाजी के अपनी फसलों को बाजार में बेच सकेंगे.
वहीं, कृषि विभाग अधिकारियों का यह कहना है कि इस बार प्रदेश में गेहूं का उत्पादन अच्छा हुआ है और भारी मात्रा में किसान केंन्द्रों पर आकर स्लॉट बुकिंग करा रहे हैं.
कब तक बनेंगी तौल पर्चियां
राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा को देखते हुए तौल पर्ची को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है, क्योंकि पहले तौल पर्ची बनाने का समय सीमित ही रहता था, जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था. इसके अलावा, किसान भाइयों लंबी लाइनों में लगकर अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता था. इसी परेशानी से किसानों को जूझते देखते हुए सरकार ने अब समय बढ़ाकर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक कर दिया है.
तौल कांटों की संख्या बढ़ने से किसानों को क्या लाभ होगा?
मध्यप्रदेश में केंन्द्रों पर लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए. सरकार ने सबसे अहम यह फैसला लिया है. अब गेहूं उपार्जन केंन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी है. इससे प्रतिदिन अधिक मात्रा में गेहूं की तौल हो सकेंगी और प्रक्रिया में इस बदलाव से किसानों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. समय रहते वह अपनी उपज को बेच सकेंगे.
समर्थन मूल्य पर हो रही खरीद
मध्यप्रदेश में गेहूं किसानों को काफी हद तक राहत की सांस मिली है. गेहूं स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ने से लेकर तौल कांटों की संख्या बढ़ने से किसानों को बढ़ी मदद मिली है. साथ ही राज्य सरकार किसानों से उनकी उपज की खरीद केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ही कर रही है. इससे किसानों को उनकी फसल के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे किसानों को बाजार में कम कीमत मिलने वाली परेशानी से राहत मिली और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है.
लेखक: रवीना सिंह