कम बारिश, महंगी खाद और बढ़ती गर्मी: किसानों के लिए क्या है समाधान? Success Story: 72 एकड़ में गन्ने की खेती, इंटरक्रॉपिंग मॉडल और 2 करोड़ का कारोबार - सरताज खान की सफलता की कहानी खेती से 100 करोड़ का टर्नओवर: हेलीकॉप्टर के बाद अब हवाई जहाज से कृषि क्रांति लाएंगे डॉ. राजाराम त्रिपाठी Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 12 June, 2026 12:27 PM IST
मध्य प्रदेश किसानों को खाद लेने से पहले कराना होगा ई-टोकन (Image Source-AI generate)

देश में किसान खरीफ सीजन की फसलों की तैयारी में व्यस्त है और इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार ने खाद प्रणाली को लेकर बड़ा कदम उठाया है और यह फैसला लेकर खाद वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली लागू कर दी है, जिसके अंतर्गत किसानों को उर्वरक प्राप्त करने हेतू सबसे पहले ऑनलाइन ई-टोकन (E-Vikas System) बुक करना होगा, क्योंकि सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा.

राज्य सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य फसलों की बुवाई का कार्य शुरू हो जाता है. ऐसे समय में किसानों की सबसे बड़ी जरूरत उर्वरकों की उपलब्धता होती है. पिछले वर्षों में खाद की कमी, लंबी कतारों और कालाबाजारी जैसी समस्याओं को देखते हुए कृषि विभाग ने इस बार डिजिटल निगरानी आधारित ई-विकास प्रणाली लागू की है.

क्या है ई-विकास प्रणाली?

ई-विकास प्रणाली एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिसके माध्यम से किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए पहले टोकन बुक करना होगा. टोकन जारी होने के बाद किसान निर्धारित अवधि के भीतर अधिकृत उर्वरक विक्रय केंद्र से खाद खरीद सकेंगे. यदि किसान तय समय में खाद नहीं लेते हैं तो उनका टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और उन्हें दोबारा आवेदन करना पड़ेगा. और इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य खाद वितरण को सुव्यवस्थित करना और वास्तविक मांग के अनुसार उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. इससे विभाग को भी यह जानकारी मिल सकेगी कि किस क्षेत्र में कितनी मात्रा में खाद की आवश्यकता है.

फार्मर आईडी बनी सबसे जरूरी शर्त

नई व्यवस्था में फार्मर आईडी यानी एग्रीस्टैक आधारित किसान पहचान पत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है. जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, वे ई-विकास पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कर पाएंगे और उन्हें ई-टोकन भी जारी नहीं होगा.

टोकन बुक करने की क्या प्रक्रिया है?

सरकार ने किसानों के लिए टोकन बुकिंग प्रक्रिया को सरल बनाया है. किसान घर बैठे या किसी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की सहायता से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, टोकन प्राप्त करने के लिए किसान को ई-विकास पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. इसके बाद आधार आधारित सत्यापन, भूमि विवरण का प्रमाणीकरण और फसल संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी. किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार डीएपी, यूरिया, एनपीके या अन्य उर्वरकों का चयन कर सकते हैं. आवेदन पूरा होने के बाद उन्हें डिजिटल ई-टोकन जारी कर दिया जाएगा.

जरूरत के अनुसार कई बार ले सकेंगे खाद

मध्य प्रदेश के किसानों को इस नई व्यवस्था से यह लाभ होगा की किसान केवल एक बार ही नहीं बल्कि आवश्यकता पड़ने पर कई बार उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं. यदि किसी किसान को पहली खरीद के बाद अतिरिक्त खाद की जरूरत होती है तो वह दोबारा ई-टोकन बुक कर सकता है. इससे किसानों को अपनी फसल और भूमि की जरूरत के अनुसार उर्वरक लेने की सुविधा मिलेगी.

टोकन बुकिंग करने का क्या समय रहेगा?

किसान ई-विकास पोर्टल पर प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक टोकन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी. किसान इस समयावधि के भीतर किसी भी दिन ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. खाद वितरण होने के साथ ही संबंधित विक्रय केंद्र के स्टॉक से मात्रा स्वतः कम हो जाएगी, जिससे पूरे सिस्टम की निगरानी रियल टाइम में संभव हो सकेगी.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: MP Fertilizer Update E-token Mandatory for Purchasing Fertilizer know Complete Booking process
Published on: 12 June 2026, 12:32 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now