Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! STIHL मल्टी-पर्पस स्टेशनेरी इंजन: आधुनिक कृषि और उद्योग के लिए क्रांतिकारी समाधान Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 29 January, 2019 2:20 PM IST

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अर्जी लगाई है कि अयोध्या में राम मंदिर परिसर की 67 एकड़ जमीन सरकार को दी जानी चाहिए क्योंकि यह जमीन सरकार के अधिकार में आती है. सरकार ने दलील दी है कि मंदिर क्षेत्र की कुल जमीन में से केवल 2.77 एकड़ जमीन पर ही विवाद है इसलिए विवादित जमीन को छोड़कर शेष हिस्सा राम जन्मभूमि न्यास (ट्रस्ट) को दे दी जाए.  

ये भी पढे : चुनाव से पहले किसानों के लिए चमत्कार कर पाएगी मोदी सरकार ?

केंद्र सरकार ने अपनी इस याचिका में कहा कि अयोध्या की 67 एकड़ जमीन का सरकार ने अधिग्रहण किया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकारार रखने का आदेश दिया है. इस पर केंद्र सरकार ने कहा है कि केवल 2.77 एकड़ जमीन पर ही विवाद है. जबकि शेष बची जमीन पर कोई विवाद ही नहीं है इसलिए उसे यथास्थिति बरकरार रखने कोई जरूरत नहीं है.

बता दें कि 6 दिसंबर, 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने 1993 में अध्यादेश लाकर विवादित स्थल और आस-पास की जमीन का अधिग्रहण किया था. इसमें 40 एकड़ जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है. शेष 19 एकड़ जमीन सरकार की है क्योंकि जमीन के अधिकाधिक मालिकों को मुआवजा सरकार द्वारा दे दिया गया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की याचिका में कहा कि हम चाहते हैं कि यह जमीन उन्हें (राम जन्मभूमि न्यास को) वापस कर दी जाए ताकि विवादित भूमि तक पहुंचने का रास्ता वगैरह बनाया जा सके. केंद्र

ये भी पढे : बजट 2019 में किसानों के लिए क्या है ?

वहीं दूसरी तरफ़ इस मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी ने बताया कि उन्हें केंद्र सरकार की इस याचिका से कोई आपत्ति नहीं है. सरकार बाबरी मस्जिद के अलावा जमीन का दूसरा हिस्सा लेने को स्वतंत्र है. रामलला पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहा ने कहा कि विवाद केवल 2.77 एकड़ जमीन पर है. राम मंदिर निर्माण के लिए इसी जमीन का निस्तारण जरुरी है.

गौरतलब है कि जब बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था तो विवादित ढ़ांचे के पास की 67 एकड़ जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहण कर ली गई थी. उसके बाद कोर्ट ने इस जमीन को यथास्थिति बनाए रखने का फैसला लिया था. इस जमीन के अधिग्रहण का मुख्य मकसद था कि बाद में विवादित जमीन जिस पार्टी को मिलेगी उसे यह जमीन दे दी जाएगी. सरकार चाहती है कि विवादमुक्त 67 एकड़ जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला वापस ले लिया जाए. केंद्र सरकार ने तर्क दिया है कि विवादित जमीन फैसला आने में देर हो रही है इसलिए मंदिर ट्रस्ट को उनकी जमीन वापस दी जा सकती है ताकि वे मंदिर निर्माण कर सकें.

English Summary: Modi government's big initiative on Ram temple, sought by the court for its land
Published on: 29 January 2019, 02:32 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now